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गृहमंत्री अमित शाह
– फोटो : अमर उजाला
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ऐसे में आज हम आपको अमित शाह की पूरी कहानी बताएंगे। उनका बचपन कैसा रहा? वह कब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहली बार मिले? कैसे मोदी-शाह की दोस्ती बढ़ी और उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा? आइए जानते हैं…
पहले शाह की शुरुआत जान लीजिए
मुंबई में जन्में अमित शाह के दादा मनसा (गुजरात) के नगरसेठ हुआ करते थे। पिता अनिल चंद्र शाह का नाम पीवीसी पाइप के बड़े व्यापारियों में शामिल रहा। महेसाणा में स्कूलिंग पूरी करने के बाद शाह बायोकेमिस्ट्री की पढ़ाई करने के लिए अहमदाबाद पहुंचे। यहां उन्होंने सीयू शाह साइंस कॉलेज में दाखिला लिया। शाह ने यहां से बायोकेमिस्ट्री में बीएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद अपने पिता के व्यवसाय में हाथ बंटाने लगे। शाह ने इस दौरान अहमदाबाद की को-आपरेटिव बैंकों में स्टॉक ब्रोकर का भी काम किया।
राजनीति से कब जुड़े अमित शाह?
अमित शाह गुजराती व्यवसायी परिवार से ताल्लुक रखते थे और शुरू से ही वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस से जुड़े रहे। बचपन में वह संघ की शाखाओं में जाया करते थे। कॉलेज के समय भी वह संघ से जुड़े रहे, जहां 1982 में पहली बार उनकी मुलाकात नरेंद्र मोदी से हुई। उस वक्त मोदी संघ के प्रचारक हुआ करते थे और युवाओं से जुड़ी गतिविधियों का दायित्व उनके पास था।
संघ के दायरे से बाहर आते हुए 1983 से शाह ने छात्र राजनीति की शुरुआत की। तब उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी जॉइन कर ली थी। चार साल बाद 1987 में शाह भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा से जुड़ गए। इसके एक साल बाद ही नरेंद्र मोदी भी संघ के दायित्वों से बाहर निकलकर भाजपा के साथ जुड़ गए थे।
भाजयुमो में अमित शाह ने खूब मेहनत की। वार्ड सेक्रेटरी, तालुका सेक्रेटरी, स्टेट सेक्रेटरी से उपाध्यक्ष और महासचिव तक का सफर पूरा किया। शाह की सबसे बड़ी खूबी उनके मैनेजमेंट का तरीका है। 1991 में जब लालकृष्ण आडवाणी गांधीनगर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने पहुंचे तो शाह ने चुनाव प्रबंधन की बड़ी जिम्मेदारी निभाई।
मोदी-शाह की जोड़ी ने गांव-गांव में भाजपा को मजबूत किया
1995 में पहली बार भाजपा ने गुजरात में सरकार बनाई। तब गुजरात के ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस काफी मजबूत हुआ करती थी। उस दौरान नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने गांव-गांव में जाकर भाजपा को मजबूत बनाया। दोनों ने आठ हजार से ज्यादा गांवों में दूसरे नंबर के कद्दावर नेताओं को पार्टी से जोड़ा। ये वो लोग थे, जो ग्राम प्रधान चुनावों में हार गए थे, लेकिन दूसरे नंबर पर थे। इससे गांव-गांव में भाजपा का एक मजबूत नेटवर्क बन गया।
1999 में अमित शाह अहमदाबाद जिला को-आपरेटिव बैंक के अध्यक्ष चुने गए। उस दौरान इन चुनावों में जातियों का दबदबा हुआ करता था। पटेल, गड़ेरिया और क्षत्रिय जाति से आने वाले लोग ही इस चुनाव में जीतते थे। शाह की जाति इनमें से नहीं थी, फिर भी अपनी सूझबूझ से उन्होंने इसमें जीत हासिल की। जब शाह अध्यक्ष चुने गए थे, तब बैंक 36 करोड़ रुपये के घाटे में था। अमित शाह ने एक साल के अंदर इस घाटे को मुनाफे में बदल दिया और 27 करोड़ रुपये का फायदा हुआ। आज की डेट में ये बैंक 250 करोड़ से भी ज्यादा फायदे में है।
कांग्रेस को कमजोर करके मजबूत होते गए मोदी और शाह
मोदी और शाह की जोड़ी ने गुजरात में कांग्रेस को हर तरफ से कमजोर किया। राजनीतिक नुकसान पहुंचाने के बाद दोनों की जोड़ी ने राज्य की खेल समितियों से भी कांग्रेसियों को बाहर करना शुरू कर दिया। गुजरात स्टेट चेस एसोसिएशन, गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन, गुजरात स्टेट फाइनेंशियल कॉरपोरेशन के महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली।
पहली बार 1997 में शाह ने गुजरात विधानसभा का उपचुनाव सरखेल सीट से लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद 2012 तक लगातार वह इस सीट से चुनाव जीतते रहे। 2002 में जब गुजरात में नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने अमित शाह को अपनी कैबिनेट में शामिल कर लिया। उस वक्त शाह सबसे कम उम्र के मंत्री थे, जिनके पास कई अहम विभाग थे। मोदी को शाह पर इतना भरोसा था कि उन्होंने उस दौरान उन्हें गृह, कानून, जेल, बॉर्डर सिक्योरिटी, सिविल डिफेंस समेत 12 विभागों की जिम्मेदारी दे दी थी। इसके बाद शाह कई विवादों में भी रहे। उनपर गुजरात दंगे के दौरान फर्जी एनकाउंटर कराने का आरोप लगा। इसके अलावा भी कई तरह के गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ा।
फिर जब केंद्र में बनी सरकार, चाणक्य हो गए शाह
2014 में जब केंद्र में भाजपा की सरकार बनी तो नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए। पीएम मोदी अपने साथ अमित शाह को भी राष्ट्रीय राजनीति में लेकर आए। शाह को उस दौरान भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। वह राज्यसभा के सांसद भी बनाए गए। इसके बाद लगातार दो बार शाह पार्टी के अध्यक्ष रहे।
शाह के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए 10 से ज्यादा राज्यों में भाजपा की सरकार बनी। 2014 से 2016 के बीच महाराष्ट्र, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, झारखंड और असम में भाजपा की सरकार बनी। हालांकि, बिहार और दिल्ली में जरूर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। 2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा बहुमत के साथ सरकार बनाने में कामयाब हुई। उत्तराखंड में भी भाजपा को बड़ी जीत मिली। इसके बाद गुजरात, हिमाचल प्रदेश में भी भाजपा की सरकार बन गई।
मार्च 2018 में पहली बार कम्युनिस्ट के प्रभाव वाले नॉर्थ ईस्ट राज्य त्रिपुरा पर भाजपा का कब्जा हो गया। इसके अलावा नगालैंड, मेघालय में भी भाजपा सहयोगी पार्टी के रूप में सरकार में शामिल हुई। 2019 लोकसभा चुनाव भी शाह की अगुआई में ही भाजपा ने लड़ा और धमाकेदार जीत हासिल की। इस दौरान दुनिया में सबसे ज्यादा सदस्यों वाली पार्टी होने का रिकॉर्ड भी भाजपा के नाम दर्ज हुआ।
गृहमंत्री रहते हुए लिए बड़े फैसले
30 मई 2019 को जब मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत हुई तो अमित शाह भी मंत्रिमंडल में शामिल हो गए। तब शाह को गृहमंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। शाह के गृहमंत्री रहते हुए ही भाजपा ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया और जम्मू कश्मीर-लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया। 2019 में शाह ने एनआरसी और सीएए को लेकर संसद में बिल पेश किया। इसको लेकर देशभर में खूब हंगामा हुआ। इसी साल शाह ने क्रिमिनल प्रोसिजर (आईडेंटिफिकेशन) बिल पास कराया।
पत्नी और एक बेटे के बारे में भी जान लीजिए
1987 में अमित शाह की शादी सोनल शाह से हुई। दोनों के एक बेटे हैं, जय शाह। जय इस वक्त एशियन क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष हैं। इसके अलावा बीसीसीआई के सचिव भी हैं। जय का जन्म 22 सितंबर 1988 को हुआ था। शाह की छह बहने हैं, जिनमें दो शिकागो में रहती हैं। सभी बहनें चर्चा से दूर रहती हैं।
विस्तार
गृहमंत्री अमित शाह का आज 58वां जन्मदिन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत तमाम राजनीतिक हस्तियों ने शाह को बधाई दी। 22 अक्तूबर 1964 को शाह का जन्म मुंबई में हुआ था। अमित शाह एक व्यापारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं।
ऐसे में आज हम आपको अमित शाह की पूरी कहानी बताएंगे। उनका बचपन कैसा रहा? वह कब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहली बार मिले? कैसे मोदी-शाह की दोस्ती बढ़ी और उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा? आइए जानते हैं…
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