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India New Space High: सबसे भारी रॉकेट LAWM3-M2 को 36 सैटेलाइट के साथ ISRO ने किया लॉन्च

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India New Space High: सबसे भारी रॉकेट LAWM3-M2 को 36 सैटेलाइट के साथ ISRO ने किया लॉन्च

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GSLV Mk-3 Rocket

GSLV Mk-3 Rocket
– फोटो : ANI

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भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC) से रविवार रात 12.07 बजे LAWM3-M2/NAWEB INDIA-1 मिशन लॉन्च किया। भारी लिफ्ट रॉकेट जीएसएलवी एमके-3 (GSLV Mk-3) का नाम बदलकर एलवीएम3 एम2 (LVM3 M2) कर दिया गया है। इसमें 36 ‘वनवेब’ उपग्रह हैं। 43.5 मीटर लंबा और वजनी 644 टन एलवीएम 3 एम2 रॉकेट श्रीहरिकोटा में भारत के रॉकेट पोर्ट के पैड से लॉन्च किया गया है।

 

एक और लॉन्चिंग संभव
दरअसल वनवेब के साथ इसरो की डील हुई है। वह ऐसी दो लॉन्चिंग करेगा। यानी इस लॉन्चिंग के बाद एक और लॉन्चिंग होनी है। माना जा रहा है कि अगले साल जनवरी में वनवेब के लिए दूसरी लॉन्चिंग भी संभव है। इन सैटेलाइट्स को धरती के निचली कक्षा में तैनात किया जाएगा। ये ब्रॉडबैंड कम्यूनिकेशन सैटेलाइट्स हैं। जिनका नाम वनवेब लियो (OneWeb Leo) है। बता दें कि LVM3 रॉकेट की ये पहली व्यावसायिक उड़ान है।

इस रॉकेट की पांचवीं लॉन्चिंग
गौरतलब है कि इससे पहले साल 2019 में इस रॉकेट से चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2), 2018 में GSAT-2, 2017 में GSAT-1 और उससे पहले साल 2014 में क्रू मॉड्यूल एटमॉस्फियरिक री-एंट्री एक्सपेरीमेंट (CARE) लेकर गया था। ये सारे मिशन भारत सरकार से जुड़े हुए थे, लेकिन यह पहला मौका है जब कोई निजी कंपनी का सैटेलाइट इस रॉकेट में जा रहा है। अब तक इस रॉकेट से चार लॉन्चिंग की गई हैं। चारों की चारों सफल रही है। यह इसकी पांचवीं लॉन्चिंग है।

विस्तार

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC) से रविवार रात 12.07 बजे LAWM3-M2/NAWEB INDIA-1 मिशन लॉन्च किया। भारी लिफ्ट रॉकेट जीएसएलवी एमके-3 (GSLV Mk-3) का नाम बदलकर एलवीएम3 एम2 (LVM3 M2) कर दिया गया है। इसमें 36 ‘वनवेब’ उपग्रह हैं। 43.5 मीटर लंबा और वजनी 644 टन एलवीएम 3 एम2 रॉकेट श्रीहरिकोटा में भारत के रॉकेट पोर्ट के पैड से लॉन्च किया गया है।

 


एक और लॉन्चिंग संभव

दरअसल वनवेब के साथ इसरो की डील हुई है। वह ऐसी दो लॉन्चिंग करेगा। यानी इस लॉन्चिंग के बाद एक और लॉन्चिंग होनी है। माना जा रहा है कि अगले साल जनवरी में वनवेब के लिए दूसरी लॉन्चिंग भी संभव है। इन सैटेलाइट्स को धरती के निचली कक्षा में तैनात किया जाएगा। ये ब्रॉडबैंड कम्यूनिकेशन सैटेलाइट्स हैं। जिनका नाम वनवेब लियो (OneWeb Leo) है। बता दें कि LVM3 रॉकेट की ये पहली व्यावसायिक उड़ान है।

इस रॉकेट की पांचवीं लॉन्चिंग

गौरतलब है कि इससे पहले साल 2019 में इस रॉकेट से चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2), 2018 में GSAT-2, 2017 में GSAT-1 और उससे पहले साल 2014 में क्रू मॉड्यूल एटमॉस्फियरिक री-एंट्री एक्सपेरीमेंट (CARE) लेकर गया था। ये सारे मिशन भारत सरकार से जुड़े हुए थे, लेकिन यह पहला मौका है जब कोई निजी कंपनी का सैटेलाइट इस रॉकेट में जा रहा है। अब तक इस रॉकेट से चार लॉन्चिंग की गई हैं। चारों की चारों सफल रही है। यह इसकी पांचवीं लॉन्चिंग है।



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