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अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजार में कई कारणों से जारी दबाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई पड़ रहा है। आज सेंसेक्स में गिरावट के कारण निवेशकों के लाखों करोड़ रुपये डूब गए। दिवाली के बाद हुए कारोबार में सेंसेक्स में 288 पॉइंट या लगभग 0.48 फीसदी की गिरावट आई। निफ्टी भी इससे अछूता नहीं रहा और इसमें 74 पॉइंट या 0.42 फीसदी की कमी दर्ज की गई। आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी दबाव के कारण आने वाले दिनों में भी कमजोरी का यह दौर बना रह सकता है।
प्रभावित हो सकता है आयात
अमेरिका के दबाव के बावजूद ओपेक देशों ने तेल उत्पादन में कटौती करने का निर्णय लिया है, जिसका असर तेल-गैस कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में दिखाई पड़ सकता है। इससे महंगाई से जूझ रहे अमेरिकी-यूरोपीय बाजारों को राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। इससे बाजार पर असर पड़ना भी तय है और एशियाई देशों से होने वाला आयात प्रभावित हो सकता है। कुछ भारतीय कंपनियों को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। ब्रिटिश पीएम के रूप में ऋषि सुनक के आने से भी निवेशकों को आशंका है कि ब्रिटिश अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए वे कड़े कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे। इससे भी बाजार पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि रूस-युक्रेन युद्ध के और ज्यादा गहराने की आशंका है। इससे आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन के बाधित होने और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका मजबूत हो गई है। इससे भी भारत से होने वाला निर्यात प्रभावित हो सकता है।
चीन में राष्ट्रपति के रूप में एक और कार्यकाल मिलने के बाद शी जिनपिंग पर देश की टूटती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का बड़ा दबाव होगा। कई चीनी बैंक अपने निवेशकों को पैसा वापस करने की स्थिति में नहीं हैं, तो चीन की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा रियल स्टेट कारोबार बेहद कमजोर हालत में पहुंच गया है। अनुमान है कि इस परिस्थिति से निपटने के लिए चीन एक बार फिर मूल उद्योगों को ज्यादा राहत देकर निर्माण क्षेत्र में मजबूत होने की कोशिश कर सकता है। इससे भी भारत पर असर पड़ सकता है।
85 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है
भारतीय शेयर बाजार पर सबसे ज्यादा नकारात्मक असर गिरते रुपये के कारण पड़ रहा है। रुपया लगातार गिर रहा है और मंगलवार को यह 82.81 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया है। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में रुपये में गिरावट का यह दौर जारी रह सकता है। आर्थिक विशेषज्ञों की आशंका है कि दिसंबर के अंत तक यह 85 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है। निवेशकों को आशंका है कि यदि ऐसा होता है तो उनके निवेश की बाजार कीमत घट सकती है।
लिहाजा नुकसान से बचने के लिए निवेशक भारतीय बाजारों से पैसा निकालकर डॉलर में निवेश करने को प्राथमिकता दे सकते हैं। इससे भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों के बाहर जाने का खतरा बढ़ सकता है और घरेलू निवेशकों को एक और झटका लग सकता है।
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