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आज का शब्द: चौखट और केदारनाथ सिंह की कविता ‘उस तट पर भी जा कर दीया जला आना’

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आज का शब्द: चौखट और केदारनाथ सिंह की कविता ‘उस तट पर भी जा कर दीया जला आना’

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हिंदी हैं हम शब्द-श्रृंखला में आज का शब्द है चौखट जिसका अर्थ है 1. चौकोर ढाँचा जिसमें किवाड़ के पल्ले लगाए जाते हैं; देहरी 2. मर्यादा; सीमा। कवि केदारनाथ सिंह ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 

जाना, फिर जाना,
उस तट पर भी जा कर दीया जला आना,
पर पहले अपना यह आँगन कुछ कहता है,
उस उड़ते आँचल से गुड़हल की डाल
बार-बार उलझ जाती है,
एक दीया वहाँ भी जलाना;

जाना, फिर जाना,
एक दीया वहाँ जहाँ नई-नई दूबों ने कल्ले फोड़े हैं,
एक दीया वहाँ जहाँ उस नन्हें गेंदे ने
अभी-अभी पहली ही पंखड़ी बस खोली है,
एक दीया उस लौकी के नीचे
जिसकी हर लतर तुम्हें छूने को आकुल है
एक दीया वहाँ जहाँ गगरी रखी है,
एक दीया वहाँ जहाँ बर्तन मँजने से
गड्ढा-सा दिखता है,
एक दीया वहाँ जहाँ अभी-अभी धुले
नये चावल का गंधभरा पानी फैला है,
एक दीया उस घर में -
जहाँ नई फसलों की गंध छटपटाती हैं,
एक दीया उस जंगले पर जिससे
दूर नदी की नाव अक्सर दिख जाती है
एक दीया वहाँ जहाँ झबरा बँधता है,
एक दीया वहाँ जहाँ पियरी दुहती है,
एक दीया वहाँ जहाँ अपना प्यारा झबरा
दिन-दिन भर सोता है,
एक दीया उस पगडंडी पर
जो अनजाने कुहरों के पार डूब जाती है,
एक दीया उस चौराहे पर
जो मन की सारी राहें
विवश छीन लेता है,
एक दीया इस चौखट,
एक दीया उस ताखे,
एक दीया उस बरगद के तले जलाना,
जाना, फिर जाना,
उस तट पर भी जा कर दीया जला आना,
पर पहले अपना यह आँगन कुछ कहता है,
जाना, फिर जाना।

1 hour ago

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