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Solar Eclipse
– फोटो : एएनआई
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ओडिशा में गुरुवार को सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ तर्कवादियों ने चिकन बिरयानी की दावत की, जिस पर संतों और धर्मगुरुओं ने नाराजगी व्यक्त की है। वहीं बिरयानी वितरण के खिलाफ कुछ धार्मिक संगठनों ने पुरी और कटक के अलग-अलग पुलिस थानों में चार रिपोर्ट दर्ज कराई हैं। वहीं दावत देने वाले तर्कवादियों ने खुद को अंधविश्वास का भंडाफोड़ करने वाला बताया है।
अभिशाप हो सकता है सूर्य ग्रहण के दौरान खाया गया भोजन
पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि वे अज्ञानी हैं। उनके कार्य सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं और सूर्य ग्रहण के दौरान उन लोगों द्वारा खाया गया भोजन (चिकन बिरयानी) ही उनके जीवन का अभिशाप हो सकता है। आगे उन्होंने कहा कि जो लोग नए सिद्धांत गढ़ते हैं, बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं, वे अपने जीवन और बड़े पैमाने पर समाज को नुकसान पहुंचाते हैं।
साथ ही उन्होंने कहा कि भारतीयों के दर्शन, विज्ञान और सामाजिक व्यवहार के आधार पर मानदंड और परंपराएं बनाई गई हैं और इनके आधार पर ही पता चलता है कि किस समय क्या खाना चाहिए। वहीं प्रसिद्ध उड़िया संत और पद्मश्री बाबा बलिया ने भी बिरयानी वितरण के कृत्य की निंदा की और उन्होंने मंगलवार को सूर्य ग्रहण के दौरान उपवास की परंपरा को सार्वजनिक रूप से चुनौती दी थी।
खाने से किसी को कोई नहीं रोक सकता
उन्होंने कहा कि खाना खाने से किसी को कोई नहीं रोक सकता। लेकिन, गुमराह करने वाला समाज स्वस्थ संस्कृति स्थापित नहीं करता। सूर्य या चंद्र ग्रहण के दौरान खाली पेट रहने की प्रथा विज्ञान पर आधारित है। वहीं तर्कवादियों पर इस बात का कोई असर नहीं है, उन्होंने कहा कि आठ नवंबर को आने वाले चंद्र ग्रहण के दौरान भी ऐसा ही करेंगे।
अपनी बात पर अडिग तर्कवादी
उत्कल विश्वविद्यालय में सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रताप रथ ने कहा मैं जो मानता हूं उस पर कायम हूं जो कुछ भी वैज्ञानिक नहीं है उसका अभ्यास नहीं करना चाहिए। मैंने बचपन से ग्रहण के दौरान खाया है और आगे भी करता रहूंगा। साथ ही कहा कि मैंने किसी कानून का उल्लंघन नहीं किया है और संविधान के खिलाफ काम नहीं किया है।
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