Home Breaking News Morbi Bridge Collapse: ऐसी मरम्मत हुई कि पुल और कमजोर हो गया, एल्युमिनियम शीट के वजन को नहीं झेल पाया

Morbi Bridge Collapse: ऐसी मरम्मत हुई कि पुल और कमजोर हो गया, एल्युमिनियम शीट के वजन को नहीं झेल पाया

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Morbi Bridge Collapse: ऐसी मरम्मत हुई कि पुल और कमजोर हो गया, एल्युमिनियम शीट के वजन को नहीं झेल पाया

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मोरबी हादसा

मोरबी हादसा
– फोटो : ANI

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मोरबी पुल हादसे पर सुनवाई के दौरान इसकी मरम्मत में इस्तेमाल सामग्री को लेकर सवाल उठे। लोक अभियोजक एच एस पांचाल ने फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत को बताया कि पुल की मुख्य केबल फोर-लेयर एल्युमीनियम शीट से बने नए फर्श के वजन के कारण टूट गई थी। इसके अलावा मरम्मत प्रक्रिया के दौरान पुल के केबलों को बदला नहीं गया था।

केबल की मरम्मत की जाती तो यह घटना नहीं होती
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मोरबी के पुलिस अधीक्षक पी ए जाला ने अदालत से कहा कि अगर केबल की मरम्मत की जाती तो यह घटना नहीं होती। हालांकि, ओरेवा के प्रबंधक पारेख ने अदालत को बताया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना इसलिए हुई क्योंकि यह ईश्वर की इच्छा थी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात पुलिस ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर यह जानकारी दी है कि मोरबी पुल हादसा उसकी नई फ्लोरिंग की वजह से हुआ। मरम्मत के नाम पर ब्रिज में लगे लकड़ी के बेस को बदलकर एल्युमिनियम की चार लेयर वाली चादरें लगा दी गई थीं। इससे पुल का वजन काफी बढ़ गया था। भीड़ बढ़ने पर पुरानी केबल इस वजन को संभाल नहीं सकीं और पुल टूट गया। 

अदालत को पुल हादसे की फोरेंसिक रिपोर्ट सौंपी 
गुजरात पुलिस ने मंगलवार को मजिस्ट्रियल कोर्ट में पुल हादसे की फोरेंसिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपी। सरकारी वकील पंचाल ने सुनवाई के बाद बताया कि पुलिस की तरफ से पेश रिमांड अर्जी में साफ लिखा है कि मरम्मत के दौरान पुल के ढांचे की मजबूती पर काम नहीं किया गया। केवल पुल की फ्लोरिंग से लकड़ी को हटाकर एल्युमिनियम की चादरें लगा दी गईं। 

सरकारी वकील ने बताया कि फोरेंसिक साइंस लैब की जांच में पता चला है कि जिन चार केबलों पर ब्रिज टिका था, छह महीने की मरम्मत के दौरान उन्हें नहीं बदला गया था। फोरेसिंक एक्सपर्ट के मुताबिक, बेहद पुरानी हो चुकी केबल नई फ्लोरिंग समेत लोगों का भार नहीं सह सकीं और केबल टूट गईं।

पुलिस ने अदालत को यह भी बताया कि जिन ठेकेदारों को पुल मरम्मत का काम दिया गया था, वे इसे करने के लिए योग्य नहीं थे। वे सस्पेंशन ब्रिज की तकनीक और स्ट्रक्चर की मजबूती के बारे में जरूरी जानकारी नहीं रखते थे। लिहाजा उन्होंने पुल की ऊपरी सजावट पर ही फोकस किया। इसीलिए पुल देखने में तो मजबूत और सुंदर नजर आ रहा था, लेकिन अंदर से वह कमजोर हो चुका था।

विस्तार

मोरबी पुल हादसे पर सुनवाई के दौरान इसकी मरम्मत में इस्तेमाल सामग्री को लेकर सवाल उठे। लोक अभियोजक एच एस पांचाल ने फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत को बताया कि पुल की मुख्य केबल फोर-लेयर एल्युमीनियम शीट से बने नए फर्श के वजन के कारण टूट गई थी। इसके अलावा मरम्मत प्रक्रिया के दौरान पुल के केबलों को बदला नहीं गया था।

केबल की मरम्मत की जाती तो यह घटना नहीं होती

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मोरबी के पुलिस अधीक्षक पी ए जाला ने अदालत से कहा कि अगर केबल की मरम्मत की जाती तो यह घटना नहीं होती। हालांकि, ओरेवा के प्रबंधक पारेख ने अदालत को बताया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना इसलिए हुई क्योंकि यह ईश्वर की इच्छा थी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात पुलिस ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर यह जानकारी दी है कि मोरबी पुल हादसा उसकी नई फ्लोरिंग की वजह से हुआ। मरम्मत के नाम पर ब्रिज में लगे लकड़ी के बेस को बदलकर एल्युमिनियम की चार लेयर वाली चादरें लगा दी गई थीं। इससे पुल का वजन काफी बढ़ गया था। भीड़ बढ़ने पर पुरानी केबल इस वजन को संभाल नहीं सकीं और पुल टूट गया। 

अदालत को पुल हादसे की फोरेंसिक रिपोर्ट सौंपी 

गुजरात पुलिस ने मंगलवार को मजिस्ट्रियल कोर्ट में पुल हादसे की फोरेंसिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपी। सरकारी वकील पंचाल ने सुनवाई के बाद बताया कि पुलिस की तरफ से पेश रिमांड अर्जी में साफ लिखा है कि मरम्मत के दौरान पुल के ढांचे की मजबूती पर काम नहीं किया गया। केवल पुल की फ्लोरिंग से लकड़ी को हटाकर एल्युमिनियम की चादरें लगा दी गईं। 

सरकारी वकील ने बताया कि फोरेंसिक साइंस लैब की जांच में पता चला है कि जिन चार केबलों पर ब्रिज टिका था, छह महीने की मरम्मत के दौरान उन्हें नहीं बदला गया था। फोरेसिंक एक्सपर्ट के मुताबिक, बेहद पुरानी हो चुकी केबल नई फ्लोरिंग समेत लोगों का भार नहीं सह सकीं और केबल टूट गईं।

पुलिस ने अदालत को यह भी बताया कि जिन ठेकेदारों को पुल मरम्मत का काम दिया गया था, वे इसे करने के लिए योग्य नहीं थे। वे सस्पेंशन ब्रिज की तकनीक और स्ट्रक्चर की मजबूती के बारे में जरूरी जानकारी नहीं रखते थे। लिहाजा उन्होंने पुल की ऊपरी सजावट पर ही फोकस किया। इसीलिए पुल देखने में तो मजबूत और सुंदर नजर आ रहा था, लेकिन अंदर से वह कमजोर हो चुका था।



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