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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही पांच में से एक चीता का नाम आशा रखा था। निश्चित तौर पर उन्हें बताया होगा कि यह चीता प्रेग्नेंट हो सकती है। इसी वजह से उसके नाम को देश की उम्मीद से जोड़कर आशा रखा गया है। अब इस आशा ने ही वन विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों को घनचक्कर बना दिया है। दरअसल, कोई चीता प्रेग्नेंट है या नहीं, इसका जवाब तलाशना आसान नहीं होता। आम तौर पर फीमेल चीतों के शरीर में कोई बड़े बदलाव नहीं होते हैं। होते भी हैं तो शावकों के जन्म से तीन-चार दिन पहले। गर्भाधान की अवधि भी 90 से 95 दिन होती है, जो कि नवंबर में पूरे होने वाले हैं।
फिलहाल यह तय किया गया है कि सात चीतों को यानी चार फीमेल और तीन मेल चीतों को ही बड़े बाड़ों में छोड़ा जाएगा। आशा को फिलहाल कम से कम 15 नवंबर तक क्वारंटाइन बाड़े में ही रखा जाएगा। वन विभाग से जुड़े अधिकारियों को उम्मीद है कि शायद तब तक आशा की प्रेग्नेंसी से जुड़े ठोस संकेत मिल जाएंगे।
अब तक आशा की प्रेग्नेंसी से जुड़े जो भी संकेत मिले हैं, उनसे स्पष्ट कुछ नहीं हो सका है। जब आशा को नामीबिया से भारत लाया गया, तब तमाम टेस्ट हुए थे। उस समय भ्रूण होने की पुष्टि हुई थी। हालांकि, ब्लड टेस्ट में प्रेग्नेंसी नेगेटिव रही थी। भारत आने के बाद उसके मल के नमूने जांच के लिए जबलपुर की लैबोरेटरी में भेजे गए, लेकिन वहां चीतों के प्रेग्नेंसी टेस्ट के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। यानी अब तक कुछ भी साफ नहीं है। ब्लड और यूरीन टेस्ट से प्रेग्नेंसी की पुष्टि हो सकती है, लेकिन नए माहौल में ढल रहे चीतों के पास जाने से बचा जा रहा है। हो सकता है कि चीतों को इससे स्ट्रेस हो, जो इस समय ठीक नहीं। इस वजह से अधिकारियों ने वेट एंड वॉच पॉलिसी अपना रखी है।
10 नवंबर तक मिलने लगेंगे लक्षण
चीतों में सामान्य तौर पर गर्भाधान की अवधि 93 दिन की होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीतों का शरीर पतला होता है और उनमें शारीरिक बदलाव डिलीवरी से तीन-चार दिन पहले होता है। शावकों के जन्म से तीन-चार दिन पहले फीमेल चीता के स्तनों में सूजन आती है। इसी तरह पेट के निचले हिस्से में उभार दिखाई देता है। यह संकेत पढ़ना भी आम नहीं है और चीतों का विशेषज्ञ ही इसे समझ सकता है।
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