Home Breaking News आज का शब्द: झुमका और संजय अलंग की कविता- स्थाई सन्नाटे में पसरे मेरे कस्बे में शोर मच गया

आज का शब्द: झुमका और संजय अलंग की कविता- स्थाई सन्नाटे में पसरे मेरे कस्बे में शोर मच गया

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आज का शब्द: झुमका और संजय अलंग की कविता- स्थाई सन्नाटे में पसरे मेरे कस्बे में शोर मच गया

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                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- झुमका, जिसका अर्थ है- कान में पहनने का एक प्रसिद्ध गहना। प्रस्तुत है संजय अलंग की कविता- स्थाई सन्नाटे में पसरे मेरे कस्बे में शोर मच गया
                                                                                                
                                                     
                            

अल्हड़ गदराई युवती सा बहता
अलमस्त बरसाती नाला है-झुमका
 
लगा बनने उस पर बाँध
स्थाई सन्नाटे में पसरे
मेरे कस्बे में शोर मच गया
कस्बे से से झुंड के झुंड उसे देखने जाने लगे
इंजीनियर, ठेकेदारों की फ़ौज़ आने लगी 

कस्बे का व्यापार बढ़ निकला 
बातों का भी 
नए-नए लोग आए 
लोगों को शगल मिला 
बेरोज़गारों को काम 
व्यापारियों को दाम 

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2 minutes ago

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