Home Breaking News अवसर: आईटी व बीपीएम कंपनियों में 6 माह में बढ़ेंगी नौकरियां, 50 कंपनियों में काम कर रहे कर्मचारियों पर सर्वे

अवसर: आईटी व बीपीएम कंपनियों में 6 माह में बढ़ेंगी नौकरियां, 50 कंपनियों में काम कर रहे कर्मचारियों पर सर्वे

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अवसर: आईटी व बीपीएम कंपनियों में 6 माह में बढ़ेंगी नौकरियां, 50 कंपनियों में काम कर रहे कर्मचारियों पर सर्वे

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प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।
– फोटो : सोशल मीडिया

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आर्थिक दबाव के कारण आईटी और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (बीपीएम) क्षेत्रों में सितंबर में नियुक्तियों में कमी देखी गई। लेकिन हाल में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि 51 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि अगले छह महीनों में भर्ती के मौके बढ़ेंगे। लगभग एक-तिहाई (34 प्रतिशत) उत्तरदाताओं ने कहा कि भर्ती में गिरावट आने वाली है, जबकि सीआईईएल एचआर अध्ययन के अनुसार, 15 प्रतिशत का मानना है कि यह हमेशा की तरह ही बनी रहेगी मतलब न बढ़ेगी और न घटेगी। 

यह अध्ययन भारत में कार्यरत शीर्ष 50 आईटी/बीपीएम कंपनियों में कार्यरत 10 लाख कर्मचारियों के ऑनलाइन सर्वेक्षण पर आधारित है। महामारी के दौरान, आईटी कंपनियों ने दुनिया भर में डिजिटल परिवर्तन की लहर के चलते बढ़ी मांग को देखा और बड़े पैमाने पर लोगों को नौकरी पर रखा था। अब जबकि मांग कम हो गई है, कंपनियां फिर से ‘राइटसाइजिंग’ कर रही हैं।

नौकरी देने में बंगलूरू अव्वल
अध्ययन में आगे पता चला कि छोटी कंपनियों के उत्तरदाताओं के बीच कंपनियों द्वारा काम पर रखने के इरादे में आशावाद का स्तर अधिक पाया गया। दूसरी ओर, मध्य और बड़े आकार की कंपनियों के अधिकांश उत्तरदाता हायरिंग आउटलुक के बारे में अधिक निराशावादी नजर आए। नौकरी के मोर्चे पर किए अध्ययन में पाया गया कि 28 फीसदी नौकरी के मौके देने की वजह से बंगलूरू आईटी और बीपीएम प्रतिभाओं के लिए सबसे पसंदीदा ठिकाना बना हुआ है।

  • दिल्ली (14%), हैदराबाद (13%) और पुणे (12%) का नंबर आता है। कुल नौकरी पोस्टिंग में से विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने लगभग 66% नौकरियों का योगदान दिया है। जबकि भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने 18 फीसदी का योगदान दिया।

कंपनियां अधिक पैसा खर्च करने को भी हैं तैयार
सीआईईएल एचआर सर्विसेज के प्रबंध निदेशक और सीईओ आदित्य नारायण मिश्रा ने कहा कि आईटी प्रतिभा की मांग, जो वर्ष की पहली छमाही के दौरान अपने चरम पर थी और इस दौरान कंपनियों को काम पर रखने की होड़ लगी हुई थी। कंपनियां सही कौशल के साथ संसाधनों को कंपनी में लाने के लिए अतिरिक्त पैसा खर्च करने के लिए तैयार थीं। लेकिन भर्ती के इस उन्माद में सांस्कृतिक जुड़ाव के पक्ष की अनदेखी की गई। इसका परिणाम तब देखने को मिला जब लोग वापस ऑफिस आकर काम करने लगे। 

  • इस परिस्थिति का खामियाजा कई लोगों को उठाना पड़ा और कंपनी ने उनके साथ अनुबंध समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा कि बड़ी टेक फर्मों के प्रदर्शन पर दबाव बन रहा है क्योंकि वो कुछ भी नवोन्मेषी लाने में सक्षम नहीं हैं।

आर्थिक दबाव के कारण आईटी और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (बीपीएम) क्षेत्रों में सितंबर में नियुक्तियों में कमी देखी गई। लेकिन हाल में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि 51 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि अगले छह महीनों में भर्ती के मौके बढ़ेंगे। लगभग एक-तिहाई (34 प्रतिशत) उत्तरदाताओं ने कहा कि भर्ती में गिरावट आने वाली है, जबकि सीआईईएल एचआर अध्ययन के अनुसार, 15 प्रतिशत का मानना है कि यह हमेशा की तरह ही बनी रहेगी मतलब न बढ़ेगी और न घटेगी। 

यह अध्ययन भारत में कार्यरत शीर्ष 50 आईटी/बीपीएम कंपनियों में कार्यरत 10 लाख कर्मचारियों के ऑनलाइन सर्वेक्षण पर आधारित है। महामारी के दौरान, आईटी कंपनियों ने दुनिया भर में डिजिटल परिवर्तन की लहर के चलते बढ़ी मांग को देखा और बड़े पैमाने पर लोगों को नौकरी पर रखा था। अब जबकि मांग कम हो गई है, कंपनियां फिर से ‘राइटसाइजिंग’ कर रही हैं।

नौकरी देने में बंगलूरू अव्वल

अध्ययन में आगे पता चला कि छोटी कंपनियों के उत्तरदाताओं के बीच कंपनियों द्वारा काम पर रखने के इरादे में आशावाद का स्तर अधिक पाया गया। दूसरी ओर, मध्य और बड़े आकार की कंपनियों के अधिकांश उत्तरदाता हायरिंग आउटलुक के बारे में अधिक निराशावादी नजर आए। नौकरी के मोर्चे पर किए अध्ययन में पाया गया कि 28 फीसदी नौकरी के मौके देने की वजह से बंगलूरू आईटी और बीपीएम प्रतिभाओं के लिए सबसे पसंदीदा ठिकाना बना हुआ है।

  • दिल्ली (14%), हैदराबाद (13%) और पुणे (12%) का नंबर आता है। कुल नौकरी पोस्टिंग में से विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने लगभग 66% नौकरियों का योगदान दिया है। जबकि भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने 18 फीसदी का योगदान दिया।


कंपनियां अधिक पैसा खर्च करने को भी हैं तैयार

सीआईईएल एचआर सर्विसेज के प्रबंध निदेशक और सीईओ आदित्य नारायण मिश्रा ने कहा कि आईटी प्रतिभा की मांग, जो वर्ष की पहली छमाही के दौरान अपने चरम पर थी और इस दौरान कंपनियों को काम पर रखने की होड़ लगी हुई थी। कंपनियां सही कौशल के साथ संसाधनों को कंपनी में लाने के लिए अतिरिक्त पैसा खर्च करने के लिए तैयार थीं। लेकिन भर्ती के इस उन्माद में सांस्कृतिक जुड़ाव के पक्ष की अनदेखी की गई। इसका परिणाम तब देखने को मिला जब लोग वापस ऑफिस आकर काम करने लगे। 

  • इस परिस्थिति का खामियाजा कई लोगों को उठाना पड़ा और कंपनी ने उनके साथ अनुबंध समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा कि बड़ी टेक फर्मों के प्रदर्शन पर दबाव बन रहा है क्योंकि वो कुछ भी नवोन्मेषी लाने में सक्षम नहीं हैं।



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