Home Breaking News Children Literature Award: क्षमा शर्मा सहित 21 रचनाकार सम्मानित, भेंट किया गया ताम्रफलक और 50 हजार की राशि

Children Literature Award: क्षमा शर्मा सहित 21 रचनाकार सम्मानित, भेंट किया गया ताम्रफलक और 50 हजार की राशि

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Children Literature Award: क्षमा शर्मा सहित 21 रचनाकार सम्मानित, भेंट किया गया ताम्रफलक और 50 हजार की राशि

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लेखितका क्षमा शर्मा

लेखितका क्षमा शर्मा
– फोटो : amar ujala

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हिंदी की वरिष्ठ लेखिका क्षमा शर्मा को साहित्य अकादमी बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। दिल्ली के मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में क्षमा शर्मा को ‘क्षमा शर्मा की चुनिंदा बाल कहानियां’ के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया।

समारोह में 23 भारतीय भाषाओं के बाल रचनाकारों को पुरस्कार दिया जाना था। अर्शिया सत्तार (अंग्रेजी) और ए. सेतुमाधावन (मलयालम) किन्हीं कारणों से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए। विजेताओं को पुरस्कार स्वरूप एक ताम्रफलक और 50 हजार रुपए की राशि प्रदान की गई। बाल साहित्य पुरस्कार अर्पण समारोह में मुख्य अतिथि साहित्यकार प्रकाश मनु ने कहा कि अच्छा बाल साहित्य वह है, जिससे बच्चे का मन कली की तरह खिल जाए। साहित्य अकादमी के सचिव ए श्रीनिवासनराव ने कहा कि वर्तमान में क्लाइमेट चेंज विषय पर लिखने की जरूरत है। अकादमी के अध्यक्ष चंद्रशेखर कंबार ने कहा कि बच्चे ऊर्जा, उत्साह और जिज्ञासाओं से भरे होते हैं। समापन वक्तव्य साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष माधव कौशिक ने दिया।

साहित्य अकादमी बाल साहित्य पुरस्कार 2022 विजेता… क्षमा शर्मा (हिंदी), अर्शिया सत्तार (अंग्रेजी), जफर कमाली (उर्दू), दिगंत ओजा (असमिया), जया मित्र (बाङ्ला), देवबार रामसियारी (बोडो) राजेश्वर सिंह ‘राजू’ (डोगरी), किरीट गोस्वामी (गुजराती), तम्मण्ण बीगार (कन्नड), हमीदुल्लाह वानी (कश्मीरी), ज्योति कुंकलकार (कोंकणी), वीरेंद्र झा (मैथिली), ए सेतुमाधवन ‘सेतु’ (मलयालम), नाओरेम लोकेश्वर सिंह (मणिपुरी), संगीता राजीव बर्वे (मराठी), मीना सुब्बा (नेपाली), नरेंद्र प्रसाद दास (ओडिआ), विश्वामित्र दाधीच (राजस्थानी), कुलदीप शर्मा (संस्कृत), गणेश मरांडी (संताली), मनोहर निहलानी (सिंधी), जि मीनाक्षी (तमिल), पत्तिपाका मोहन (तेलुगु)।

पुरस्कार विजेता लेखकों का परिचय
क्षमा शर्मा, हिंदी
मयूर विहार फेज वन दिल्ली निवासी 66 वर्षीय क्षमा शर्मा हिंदी की प्रख्यात लेखिका और पत्रकार हैं। उनकी अब तक करीब 50 कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें काला कानून, कस्बे की लड़की, शिब्बू पहलनवान और मिट्टू का घर प्रमुख हैं। उन्हें बाल कल्याण संस्थान बाल साहित्य पुरस्कार, हिंदी अकादमी पुरस्कार, भारतेंदु हरीशचंद्र सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। उन्हें क्षमा शर्मा की चुनिंदा बाल कहानियां कहानी संग्रह के लिए बाल साहित्य पुरस्कार दिया गया है।

राजेश्वर सिंह ‘राजू’ डोगरी
राजेश्वर सिंह राजू डोगरी, हिंदी एवं अंग्रेजी के लेखक, पत्रकार और रंगमंच कलाकार हैं। जम्मू निवासी 56 वर्षीय राजेश्वर बैंक में कार्यरत हैं। उनकी भगवान मेरे नहीं हैं, अतीत गौरवमय था, अब वतन आजाद है सहित कई कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं। प्रोफेसर रामनाथ शास्त्री मेमोरियल पुरस्कार, स्वामी ब्रह्मानंद तीर्थ साहित्य सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार पा चुके राजू को सिक्ख-मत्त के लिए बाल साहित्य पुरस्कार से नवाजा गया है।

हमीदुल्लाह वानी, कश्मीरी
कश्मीरी साहित्यकार कमर हमीदुल्लाह शिक्षक रह चुके हैं। उनकी तीन कृतियां पुलिया-चोकुन-हेंज, अदेले-फारूकी और दाइएल प्रकाशित हो चुकी हैं। 78 वर्षीय हमीदुल्लाह को शायरी मराज पुरस्कार और शाहपारी मराज पुरस्कार मिल चुका है। कविता संग्रह दाइएल के लिए कश्मीरी में बाल साहित्य पुरस्कार से नजावे गए हमीदुल्लाह ने इसे वर्तमान के विषयों को आधार बनाकर लिखा है, जो बच्चे की मानवीय दृष्टि विकसित करने का प्रयास करती है।

विस्तार

हिंदी की वरिष्ठ लेखिका क्षमा शर्मा को साहित्य अकादमी बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। दिल्ली के मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में क्षमा शर्मा को ‘क्षमा शर्मा की चुनिंदा बाल कहानियां’ के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया।

समारोह में 23 भारतीय भाषाओं के बाल रचनाकारों को पुरस्कार दिया जाना था। अर्शिया सत्तार (अंग्रेजी) और ए. सेतुमाधावन (मलयालम) किन्हीं कारणों से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए। विजेताओं को पुरस्कार स्वरूप एक ताम्रफलक और 50 हजार रुपए की राशि प्रदान की गई। बाल साहित्य पुरस्कार अर्पण समारोह में मुख्य अतिथि साहित्यकार प्रकाश मनु ने कहा कि अच्छा बाल साहित्य वह है, जिससे बच्चे का मन कली की तरह खिल जाए। साहित्य अकादमी के सचिव ए श्रीनिवासनराव ने कहा कि वर्तमान में क्लाइमेट चेंज विषय पर लिखने की जरूरत है। अकादमी के अध्यक्ष चंद्रशेखर कंबार ने कहा कि बच्चे ऊर्जा, उत्साह और जिज्ञासाओं से भरे होते हैं। समापन वक्तव्य साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष माधव कौशिक ने दिया।

साहित्य अकादमी बाल साहित्य पुरस्कार 2022 विजेता… क्षमा शर्मा (हिंदी), अर्शिया सत्तार (अंग्रेजी), जफर कमाली (उर्दू), दिगंत ओजा (असमिया), जया मित्र (बाङ्ला), देवबार रामसियारी (बोडो) राजेश्वर सिंह ‘राजू’ (डोगरी), किरीट गोस्वामी (गुजराती), तम्मण्ण बीगार (कन्नड), हमीदुल्लाह वानी (कश्मीरी), ज्योति कुंकलकार (कोंकणी), वीरेंद्र झा (मैथिली), ए सेतुमाधवन ‘सेतु’ (मलयालम), नाओरेम लोकेश्वर सिंह (मणिपुरी), संगीता राजीव बर्वे (मराठी), मीना सुब्बा (नेपाली), नरेंद्र प्रसाद दास (ओडिआ), विश्वामित्र दाधीच (राजस्थानी), कुलदीप शर्मा (संस्कृत), गणेश मरांडी (संताली), मनोहर निहलानी (सिंधी), जि मीनाक्षी (तमिल), पत्तिपाका मोहन (तेलुगु)।

पुरस्कार विजेता लेखकों का परिचय

क्षमा शर्मा, हिंदी

मयूर विहार फेज वन दिल्ली निवासी 66 वर्षीय क्षमा शर्मा हिंदी की प्रख्यात लेखिका और पत्रकार हैं। उनकी अब तक करीब 50 कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें काला कानून, कस्बे की लड़की, शिब्बू पहलनवान और मिट्टू का घर प्रमुख हैं। उन्हें बाल कल्याण संस्थान बाल साहित्य पुरस्कार, हिंदी अकादमी पुरस्कार, भारतेंदु हरीशचंद्र सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। उन्हें क्षमा शर्मा की चुनिंदा बाल कहानियां कहानी संग्रह के लिए बाल साहित्य पुरस्कार दिया गया है।

राजेश्वर सिंह ‘राजू’ डोगरी

राजेश्वर सिंह राजू डोगरी, हिंदी एवं अंग्रेजी के लेखक, पत्रकार और रंगमंच कलाकार हैं। जम्मू निवासी 56 वर्षीय राजेश्वर बैंक में कार्यरत हैं। उनकी भगवान मेरे नहीं हैं, अतीत गौरवमय था, अब वतन आजाद है सहित कई कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं। प्रोफेसर रामनाथ शास्त्री मेमोरियल पुरस्कार, स्वामी ब्रह्मानंद तीर्थ साहित्य सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार पा चुके राजू को सिक्ख-मत्त के लिए बाल साहित्य पुरस्कार से नवाजा गया है।

हमीदुल्लाह वानी, कश्मीरी

कश्मीरी साहित्यकार कमर हमीदुल्लाह शिक्षक रह चुके हैं। उनकी तीन कृतियां पुलिया-चोकुन-हेंज, अदेले-फारूकी और दाइएल प्रकाशित हो चुकी हैं। 78 वर्षीय हमीदुल्लाह को शायरी मराज पुरस्कार और शाहपारी मराज पुरस्कार मिल चुका है। कविता संग्रह दाइएल के लिए कश्मीरी में बाल साहित्य पुरस्कार से नजावे गए हमीदुल्लाह ने इसे वर्तमान के विषयों को आधार बनाकर लिखा है, जो बच्चे की मानवीय दृष्टि विकसित करने का प्रयास करती है।



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