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स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है, भले ही देश में कोरोना के मामले फिलहाल काफी कंट्रोल में हैं पर इसे हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए। कोरोना संक्रमण और इसके लक्षणों में कई तरह के बदलाव देखे जा रहे हैं, जिनके बारे में जानना काफी आवश्यक है।
आइए जानते हैं कि तीन साल में कोरोनावायरस के संक्रमण और लक्षणों में किस प्रकार के बदलाव आ गए हैं और फिलहाल इनसे बचाव के लिए अब किस तरह की सावधानियां बरतते रहने की आवश्यकता है?
मार्च-अप्रैल 2021 में देश में आई कोरोना की दूसरी लहर काफी विनाशकारी थी, इससे संक्रमितों में गंभीर लक्षणों और इसके कारण मौत के मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए। दूसरी लहर के लिए कोरोना के डेल्टा वैरिएंट को प्रमुख कारण माना जाता है, इसकी प्रकृति काफी संक्रामक और गंभीर लक्षणों वाली थी। संक्रमितों में फेफड़ों से संबंधित समस्याएं, सांस की दिक्कत देखी गई।
हालांकि साल 2022 में आई तीसरी लहर में लक्षणों की गंभीरता कम हो गई। तीसरी लहर के लिए ओमिक्रॉन वैरिएंट को कारण माना गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि ओमिक्रॉन की संक्रामकता दर तो अधिक है पर इसके कारण गंभीर रोगों के विकसित होने का जोखिम कम पाया गया।
कोरोनावायरस में लगातार हो रहे म्यूटेशन के साथ इसकी प्रकृति में बदलाव देखा गया। डेल्टा से संक्रमण के दौरान जहां बुखार, सर्दी-जुकाम के साथ सांस की दिक्कतें अधिक दर्ज की गईं वहीं ओमिक्रॉन के जारी संक्रमण में ज्यादातर लोग एसिम्टोमैटिक या फिर हल्के लक्षणों वाले पाए जा रहे हैं।
इस साल की शुरुआत में, ब्रिटेन में 17,500 रोगियों पर किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि अब संक्रमितों में स्वाद और गंध न आने जैसी समस्या नहीं देखी जा रही है, जोकि दूसरी लहर के दौरान प्रमुख लक्षणों में से एक था। ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण जारी संक्रमण में लोगों में सांस की तकलीफें भी कम ही हो रही है।
ओमिक्रॉन और इसके अन्य सब-वैरिएंट्स के कारण होने वाले संक्रमण के बारे में किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि फिलहाल संक्रमण की स्थिति में लोगों को गले में खराश, नाक बहने, नाक बंद होने, लगातार खांसी और सिरदर्द जैसे हल्के लक्षणों का ही अनुभव हो रहा है। अध्ययन में पाया गया कि पहले के लक्षणों जैसे लगातार खांसी, गंध की कमी, बुखार और सांस की तकलीफ जैसी दिक्कतें अब कम देखी जा रही हैं।
ओमिक्रॉन से संक्रमित अधिकतर लोग बिना लक्षणों वाले भी पाए जा रहे हैं जो आसानी से ठीक हो जा रहे हैं। गंभीर लक्षणों का जोखिम सिर्फ उन्हीं लोगों में अधिक है जो पहले से ही कोमोरबिडिटी के शिकार हैं या जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है।
किंग्स कॉलेज लंदन, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा हाल ही में किए गए अध्ययन में पाया गया है कि भले ही कोरोना के नए वैरिएंट्स ज्यादा गंभीर नहीं हैं फिर भी सभी लोगों को इससे बचाव करते रहना जरूरी है। कई देशों में म्यूटेटड वैरिएंट्स के कारण स्थिति बिगड़ती देखी गई है। अधिक संक्रामकता के साथ वैरिएंट्स के म्यूटेट होने का खतरा भी बढ़ जाता है, ऐसे में संक्रमण के प्रसार को कम करने के लिए कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन हमेशा करते रहें।
कोरोना महामारी अभी भी जारी है ऐसे में इसके खतरे से बचाव करते रहना आवश्यक है।
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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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