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Solicitor General Tushar Mehta (file photo)
– फोटो : सोशल मीडिया
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भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में शीर्ष न्यायपालिका और न्यायाधीशों को बदनाम करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक मामले में मुकदमेबाजी करने वाली पार्टी को फैसला पसंद नहीं आता है तो न्यायपालिका और जजों को बदनाम किया जाता है। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ के समक्ष तुषार मेहता द्वारा ये टिप्पणी की गई, जब छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने तीन-न्यायाधीशों की एक अन्य पीठ के समक्ष प्रवर्तन निदेशालय की याचिका को सूचीबद्ध करने की मांग की। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से पेश सिब्बल ने मेहता की टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा कि यह अनुचित है। उधर, एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी यही बात दोहराई। अदालत ने दो अधिवक्ताओं को अवमानना नोटिस भी जारी किया।
छत्तीसगढ़ पीडीएस घोटाले में याचिका पर सुनवाई
ईडी ने नागरिक पूर्ति निगम (एनएएन) या सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) घोटाले से संबंधित पीएमएलए मामले को राज्य के बाहर स्थानांतरित करने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था। राज्य के कुछ वरिष्ठ नौकरशाह भी मामले में आरोपी हैं। जब सिब्बल एक उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के लिए मामले का उल्लेख कर रहे थे, तो सॉलिसिटर जनरल ने यह कहते हुए हस्तक्षेप किया कि बेंच का चयन नहीं किया जा सकता। या मैं बेंच से बच नहीं सकता। मैं इसे कुछ गंभीरता के साथ कह रहा हूं।
ईडी की याचिका को तत्कालीन सीजेआई यू यू ललित (अब सेवानिवृत्त) और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और एस रवींद्र भट की पीठ ने तत्कालीन सीजेआई के साथ समय की कमी के कारण वाद सूची से हटा दिया था। इसके बाद मामले को न्यायमूर्ति एम आर शाह और हिमा कोहली की पीठ के समक्ष रखा गया। छत्तीसगढ़ सरकार ने न्यायमूर्ति शाह की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा था कि वह इस मामले को आगे न बढ़ाए क्योंकि इसे तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा सुना जाना आवश्यक है और तब सिब्बल द्वारा सीजेआई की खंडपीठ के समक्ष इसका उल्लेख किया गया।
तुषार मेहता बोले, फैसला पसंद नहीं आने पर पूरी संस्था को बदनाम किया जाता है
तुषार मेहता ने कहा, मेरे पास केवल यह मंच है। मेरे पास कोई अन्य मंच नहीं है। भले ही यह कोर्ट संख्या 5 (न्यायमूर्ति शाह की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष) में सूचीबद्ध नहीं है। मुझे कोई दिक्कत नहीं है। मेरी चिंता बड़ी है। यह बहुत बार हो रहा है। अगर एक आदेश राजनीतिक मामले में पसंद नहीं है, आप एनजीओ इकट्ठा करते हैं। पूरे संस्थान को यह कहते हुए बदनाम करने के लिए भाषण दिए जाते हैं कि मुझे संस्थान पर भरोसा नहीं है।
शुरुआत में सीजेआई ने सिब्बल से कहा कि वह गुरुवार को जस्टिस रस्तोगी की अध्यक्षता वाली बेंच को मामले को सौंपने के आदेश पारित कर चुके हैं। सीजेआई ने कहा, अगले वरिष्ठतम न्यायाधीश को (मामला) सौंपने के लिए मैंने सिर्फ एक मानदंड का पालन किया है। मामला न्यायमूर्ति रस्तोगी की अध्यक्षता वाली पीठ को सौंपा जाएगा। पीठ ने कहा कि अगर मामले को सीजेआई, न्यायमूर्ति रस्तोगी और न्यायमूर्ति भट सहित किसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा तो तीन पीठों की बैठक बाधित होगी क्योंकि वे अलग-अलग पीठों का हिस्सा हैं।
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