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Gujarat Election: गुजरात में किसका साथ देंगे मुसलमान, 2017 और 2012 में मुस्लिम बहुल सीटों पर कैसे थे नतीजे?

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Gujarat Election: गुजरात में किसका साथ देंगे मुसलमान, 2017 और 2012 में मुस्लिम बहुल सीटों पर कैसे थे नतीजे?

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गुजरात विधानसभा चुनाव में गुरुवार को नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख थी। इसके साथ ही सभी सीटों के उम्मीदवार तय हो गए। 21 नवंबर तक दूसरे चरण के उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद चुनावी रण की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी। 

गुजरात में इस बार आम आदमी पार्टी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में लगी है। वहीं, असदुद्दीन ओवैसी भी कई सीटों पर सेंधमारी की कोशिश में हैं। सूबे में करीब 9 से 10 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स हैं। 30 से अधिक विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम वोटरों की संख्या 15 फीसदी से ज्यादा है। इनमें से 20 में ये संख्या 20 फीसदी से भी ज्यादा है।  ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर मुसलमान इस बार गुजरात में किसका साथ देंगे? पिछले चुनावों में इन सीटों पर क्या नतीजे रहे थे। आप और एआईएमआईएम इन मतदाताओं में कितना सेंध लगा पाएंगी? आइए समझते हैं…

अब तक कैसा रहा है गुजरात में मुस्लिम विधायकों का प्रतिनिधित्व? 

गुजरात में करीब 10 फीसदी मुस्लिम है। इस लिहाज से देखें तो राज्य विधानसभा में आबादी के लिहाज से करीब 18 विधायक हो सकते हैं। हालांकि, गुजरात की किसी भी विधानसभा में मुस्लिम विधायकों की संख्या कभी सात से ज्यादा नहीं रही। 2017 में तीन मुस्लिम उम्मीदवार जीतकर विधायक बने थे। तीनों कांग्रेस के टिकट पर जीते थे। वहीं, 2012 विधानसभा चुनाव में महज दो मुस्लिम उम्मीदवार जीतने में सफल रहे थे।  

 

किस पार्टी ने कितने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं? 

कांग्रेस ने मौजूदा चुनाव में छह मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं। इनमें सूरत पूर्व से असलम साइकिलवाला, वांकानेर से मोहम्मद जावेद पीरजादा, अबडास सीट से ममदभाई जुंग जत, वागरा से सुलेमान पटेल, दरियापुर सीट से ग्यासुद्दीन शेख, जमालपुर खड़िया से  इमरान खेड़ावाला को टिकट दिया है।  आम आदमी पार्टी ने तीन मुस्लिम चेहरों को अपना उम्मीदवार बनाया है। दरियापुर से ताज कुरैशी, जंबसुर से साजिद रेहान और जमालपुर खेड़िया से हारुन नागोरी को टिकट दिया है। 30 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान करने वाली एआईएमआईएम ने 16 नवबंर तक 14 सीटों पर उम्मीदवारों उतारे हैं। इनमें से 12 मुस्लिम हैं।   

किधर जा सकते हैं मुसलमान मतदाता? 

पत्रकार वीरांग भट्ट बताते हैं, ‘पिछले चुनावों में मुस्लिम वोटर्स का झुकाव कांग्रेस की ओर ज्यादा रहा है। इस बार आप के आने से लड़ाई रोचक हो गई है। जिन सीटों पर एआईएमआईएम ने उम्मीदवार उतारे हैं वहां मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। मुस्लिम वोटों में अगर बंटवारा होता है तो इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है।’

किन सीटों पर है मुस्लिम मतदाताओं का असर? 

2011 की जनगणना के मुताबिक गुजरात में कुल मुस्लिम आबादी करीब 10 फीसदी है। भुज और भरूच जिलों में मुस्लिमों की संख्या 20 फीसदी से ज्यादा है। वहीं, अहमदाबाद में वेजलपुर, दरियापुर, जमालपुर खाड़िया और दानीलिमड़ा जैसी सीटों पर मुस्लिम निर्णायक भूमिका में हैं। कुल बीस सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाताओं की आबादी 20 फीसदी से ज्यादा है। इनमें से चार अहमदाबाद, तीन-तीन सीटें भुज और भरूच जिले की हैं।

   

जमालपुर खड़िया गुजरात की इकलौती सीट है जहां मुस्लिम मतदाता 50 फीसदी से भी ज्यादा हैं। यहां कुल मतदाताओं में 61 फीसदी आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है। इसके अलावा दाणिलिमड़ा में 48%, दरियापुर में 46%, वागरा में 44%, भरूच में 38%, वेजलपुर में 35%, भुज में 35%, जंबुसर में 31%  बापूनगर में 28% और लिंबायत में 26 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। 2017 में इन दस सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाली सीटों में से पांच सीटें भाजपा और पांच सीटें कांग्रेस को मिलीं थीं। 2012 की बात करें तो इन दस में से आठ सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। वहीं, कांग्रेस को महज दो सीटों से संतोष करना पड़ा था। 



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