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COP27: संयुक्त राष्ट्र जलवायु आपदा कोष के गठन पर बनी सहमति, गरीब देशों को मुआवजे पर समझौते की उम्मीद बढ़ी

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COP27: संयुक्त राष्ट्र जलवायु आपदा कोष के गठन पर बनी सहमति, गरीब देशों को मुआवजे पर समझौते की उम्मीद बढ़ी

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कॉप27 (सांकेतिक तस्वीर)।
कॉप27 (सांकेतिक तस्वीर)।
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मिस्र में चल रहे संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन कॉप27 में सबसे विवादास्पद मुद्दे गरीब देशों को मुआवजा देने के लिए आपदा कोष के गठन पर समझौते की उम्मीद बढ़ गई है। वार्ताकारों ने शनिवार को कहा कि उन्हें इस दिशा में संभावित सफलता मिल गई है।

मालदीव की पर्यावरण मंत्री अमिनाथ शौना ने कहा कि नुकसान और क्षति पर एक समझौता हुआ है, जिसे वार्ताकार अवधारणा बता रहे हैं। इस पर सभी देशों की मुहर लगनी है। यह समझौता होने का मतलब है कि हमारे जैसे देशों के ऐसे समधान होंगे जिनकी हम वकालत करते रहे हैं। नॉर्वे के जलवायु और पर्यावरण मंत्री एस्पेन बर्थ एइडे ने कहा कि हमारी तरफ से इस संबंध में प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है।

न्यूजीलैंड के जलवायु मंत्री जेम्स शॉन ने कहा कि गरीब देश जिन्हें पैसा मिलेगा और अमीर देश जो पैसा देंगे दोनों इस प्रस्तावित समझौते के साथ हैं। थिंक टैंक ई3जी में जलवायु कूटनीति विशेषज्ञ एलेक्स स्कॉट कहते हैं, अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो यह गरीब देशों के लिए बड़ी जीत होगी जो दशकों से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। पृथ्वी के तापमान को बढ़ाने में नगण्य भूमिका होने के बावजूद इन गरीब देशों को जलवायु परिवर्तन के चलते सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कमजोर देशों पर ज्यादा ध्यान
जलवायु आपदा से प्रभावित देशों की मदद के लिए वित्त पोषण की व्यवस्था पर शनिवार को एक नए प्रस्ताव का मसौदा प्रकाशित हुआ है। इसमें उन गरीब देशों को विशेष रूप से मदद करने की बात कही गई है जो जलवायु परिवर्तन के चलते सबसे बुरी तरह से प्रभावित हैं।

विस्तार

मिस्र में चल रहे संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन कॉप27 में सबसे विवादास्पद मुद्दे गरीब देशों को मुआवजा देने के लिए आपदा कोष के गठन पर समझौते की उम्मीद बढ़ गई है। वार्ताकारों ने शनिवार को कहा कि उन्हें इस दिशा में संभावित सफलता मिल गई है।

मालदीव की पर्यावरण मंत्री अमिनाथ शौना ने कहा कि नुकसान और क्षति पर एक समझौता हुआ है, जिसे वार्ताकार अवधारणा बता रहे हैं। इस पर सभी देशों की मुहर लगनी है। यह समझौता होने का मतलब है कि हमारे जैसे देशों के ऐसे समधान होंगे जिनकी हम वकालत करते रहे हैं। नॉर्वे के जलवायु और पर्यावरण मंत्री एस्पेन बर्थ एइडे ने कहा कि हमारी तरफ से इस संबंध में प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है।

न्यूजीलैंड के जलवायु मंत्री जेम्स शॉन ने कहा कि गरीब देश जिन्हें पैसा मिलेगा और अमीर देश जो पैसा देंगे दोनों इस प्रस्तावित समझौते के साथ हैं। थिंक टैंक ई3जी में जलवायु कूटनीति विशेषज्ञ एलेक्स स्कॉट कहते हैं, अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो यह गरीब देशों के लिए बड़ी जीत होगी जो दशकों से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। पृथ्वी के तापमान को बढ़ाने में नगण्य भूमिका होने के बावजूद इन गरीब देशों को जलवायु परिवर्तन के चलते सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कमजोर देशों पर ज्यादा ध्यान

जलवायु आपदा से प्रभावित देशों की मदद के लिए वित्त पोषण की व्यवस्था पर शनिवार को एक नए प्रस्ताव का मसौदा प्रकाशित हुआ है। इसमें उन गरीब देशों को विशेष रूप से मदद करने की बात कही गई है जो जलवायु परिवर्तन के चलते सबसे बुरी तरह से प्रभावित हैं।



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