Home Breaking News Pakistan: जनरल कमर जावेद बाजवा ने माना- राजनीति में सेना का दखल, जानिए अंतिम भाषण में और क्या-क्या कहा?

Pakistan: जनरल कमर जावेद बाजवा ने माना- राजनीति में सेना का दखल, जानिए अंतिम भाषण में और क्या-क्या कहा?

0
Pakistan: जनरल कमर जावेद बाजवा ने माना- राजनीति में सेना का दखल, जानिए अंतिम भाषण में और क्या-क्या कहा?

[ad_1]

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा
– फोटो : फाइल फोटो

ख़बर सुनें

पाकिस्तान के निवर्तमान सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने स्वीकार किया कि सैन्य प्रतिष्ठान राजनीति में शामिल रहा है। उन्होंने कहा कि सेना ने राजनीति में हस्तक्षेप बंद करने का फैसला किया है। 

शहीद दिवस समारोह को संबोधित करते हुए जनरल बाजवा ने कहा, दुनियाभार में सेनाओं की शायद ही कभी आलोचना की जाती है, लेकिन हमारी सेना की अक्सर आलोचना की जाती है। मुझे लगता है कि इसका कारण सेना की राजनीति में भागीदारी है। इसलिए फरवरी में सेना ने राजनीति में हस्तक्षेप न करने का फैसला किया। 

सेना प्रमुख के तौर पर अपने अंतिम संबोधन के रूप में बाजवा ने कहा, कई क्षेत्रों में सेना की आलोचना की और अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया। सेना की आलोचना करना राजनीतिक दलों और लोगों का अधिकार है, लेकिन इस्तेमाल की जाने वाली भाषा में सावधानी बरतनी चाहिए। 

देश के एक प्रमुख अखबार ने सेना प्रमुख के हवाले से कहा, मैं जल्द ही सेवानिवृत्त हो रहा हूं। इस बार यह समारोह कुछ देरी के बाद आयोजित किया जा रहा है। बाजवा 27 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। शहीद दिवस 1965 के युद्ध में मारे के सैनिकों के बलिदान के याद में प्रतिवर्ष 6 सितंबर को रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (जीएचक्यू) में आयोजित किया जाता है। हालांकि, इस साल बाढ़ पीड़ितों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए इसे स्थगित कर दिया गया था। 

विस्तार

पाकिस्तान के निवर्तमान सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने स्वीकार किया कि सैन्य प्रतिष्ठान राजनीति में शामिल रहा है। उन्होंने कहा कि सेना ने राजनीति में हस्तक्षेप बंद करने का फैसला किया है। 

शहीद दिवस समारोह को संबोधित करते हुए जनरल बाजवा ने कहा, दुनियाभार में सेनाओं की शायद ही कभी आलोचना की जाती है, लेकिन हमारी सेना की अक्सर आलोचना की जाती है। मुझे लगता है कि इसका कारण सेना की राजनीति में भागीदारी है। इसलिए फरवरी में सेना ने राजनीति में हस्तक्षेप न करने का फैसला किया। 

सेना प्रमुख के तौर पर अपने अंतिम संबोधन के रूप में बाजवा ने कहा, कई क्षेत्रों में सेना की आलोचना की और अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया। सेना की आलोचना करना राजनीतिक दलों और लोगों का अधिकार है, लेकिन इस्तेमाल की जाने वाली भाषा में सावधानी बरतनी चाहिए। 

देश के एक प्रमुख अखबार ने सेना प्रमुख के हवाले से कहा, मैं जल्द ही सेवानिवृत्त हो रहा हूं। इस बार यह समारोह कुछ देरी के बाद आयोजित किया जा रहा है। बाजवा 27 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। शहीद दिवस 1965 के युद्ध में मारे के सैनिकों के बलिदान के याद में प्रतिवर्ष 6 सितंबर को रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (जीएचक्यू) में आयोजित किया जाता है। हालांकि, इस साल बाढ़ पीड़ितों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए इसे स्थगित कर दिया गया था। 



[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here