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इमरान खान
– फोटो : पीटीआई
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इन दिनों तोशखाना (सरकारी खजाने) मामले में घिरे इमरान खान को लेकर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि इमरान ने क्रिकेट खेलने के दौरान भारत से मिले स्वर्ण पदक को बेच दिया। उनको पदक पाकिस्तान टीम में अच्छा प्रदर्शन करने पर मिला था। इमरान खान पर सरकारी खजाने से तोहफों को बेचे जाने का आरोप लगा है जिसको लेकर मौजूदा सरकार और उसके मंत्री लगातार उनपर हमलावर हैं।
सोमवार को एक टेलीविजन कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने यह खुलासा किया। हालांकि ख्वाजा आसिफ ने इमरान खान द्वारा कथित रूप से बेचे गए स्वर्ण पदक के बारे में कोई विवरण नहीं दिया। दरअसल, इमरान खान पर तोहफे में मिली एक बेशकीमती कलाई घड़ी बेचे जाने के भी आरोप लगा है। विवाद तब काफी बढ़ गया जब एक कारोबारी ने दावा किया कि उसने इमरान खान की पत्नी की दोस्त से बेहद सस्ती कीमत में घड़ी खरीदी। यह खड़ी इमरान खान को सऊदी क्राउन प्रिंस ने दी थी।
कॉइन कलेक्टर का दावा 3000 रुपये से कम में खरीदा था पदक
इस बीच एक सिक्का संग्रहकर्ता (कॉइन कलेक्टर) ने दावा किया कि उसने लाहौर में एक निजी सिक्का विक्रेता से भारत द्वारा इमरान खान को दिया गया पदक 3,000 रुपये से कम में खरीदा था। लाहौर के पास कसूर के रहने वाले शकील अहमद खान ने एक टेलीविजन चैनल के एक टॉक शो में हिस्सा लेते हुए यह दावा किया। शकील ने कहा कि मैंने 2014 में 3,000 रुपये में छह या सात पदक खरीदे थे।
उन्होंने दावा किया कि इमरान खान को यह पदक 1987 में मुंबई में क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया द्वारा इमरान खान को दिया गया था। उन्होंने कहा कि मैंने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को मुफ्त में पदक दान कर दिया था और पीसीबी ने दान स्वीकार किया और मुझे एक प्रमाण पत्र भी दिया।
इमरान बोले- मेरी पार्टी को सत्ता में वापसी के लिए प्रचार करने की जरूरत नहीं
पीटीआई प्रमुख इमरान खान ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ को सत्ता में वापसी के लिए प्रचार करने की जरूरत नहीं है। लाहौर में अपने आवास से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पाकिस्तान के पूर्व प्रधान मंत्री ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव देश को चल रही आर्थिक उथल-पुथल से बाहर निकालने के लिए जरूरी हैं। इससे जनता के बीच स्थिरता और विश्वास पैदा होगा। एक स्थानीय अखबार ने उनके हवाले से कहा कि सरकार चुनाव में जितनी देरी करेगी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के लिए उतना ही फायदेमंद होगा और हमें देश की मौजूदा स्थिति के कारण प्रचार करने की भी जरूरत नहीं होगी।
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