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गोल्डी बराड़ और सिद्धू मूसेवाला।
– फोटो : फाइल
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सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के प्रत्यर्पण के लिए केंद्र और राज्य सरकार सक्रिय हो गई हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विदेश मामलों के तकनीकी जानकारों से प्रत्यर्पण के बारे में जानकारी लेनी शुरू कर दी है, जबकि पंजाब सरकार इस मामले में नया डोजियर बना रही है। गोल्डी बराड़ को अमेरिका से लाने में कोई तकनीकी अड़चन न आए, इसके लिए एक मजबूत डोजियर बना कर केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा।
एनआईए की जांच में पहले यह साबित हो चुका है कि जेलों में गैगस्टरों का नेटवर्क बाहर बैठे अपराधी ही चला रहे हैं। एनआईए की जांच को भी डोजियर में आधार बनाया जाएगा। चूंकि एनआईए राष्ट्रीय सुरक्षा जेंसी है और विदेश में बैठे अपराधियों के प्रत्यर्पण की अच्छी जानकार है, इसलिए एनआईए के जांच बिंदुओं को शामिल करने का फायदा पंजाब सरकार को मिलेगा।
अमेरिका से लाना आसान, कनाडा से नहीं
राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक यूएस से भारत लाना थोड़ा आसान है, जबकि कनाडा में नियम सख्त हैं। दूसरा भारतीय एजेंसियों को सबसे पहले यह साबित करना होगा कि वहां पर पकड़ा गया आरोपी गोल्डी बराड़ ही है। यह भी देखना होगा कि उसके पास कनाडा की पीआर तो नहीं है।
स्टडी वीजा पर कनाडा गया था गोल्डी
2017 में गोल्डी बराड़ स्टडी वीजा पर कनाडा गया था। हो सकता है कि उसके पास वहां की पीआर (स्थायी निवास) हो। अगर ऐसा है तो वह यहां का नागरिक नहीं है। अगर वह फर्जी पासपोर्ट पर भारत से कनाडा गया होगा तो उसे यहां लाना आसान होगा लेकिन पासपोर्ट असली हुआ तो प्रत्यर्पण में देरी होगी।
मैने अपने कार्यकाल के दौरान कनाडा में छिपे कुछ नशा तस्करों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया चलाई थी। इसमें लंबा समय लगा। पंजाब सरकार को भी इस मामले में पूरी तैयारी के साथ उतरना होगा। शशिकांत, पूर्व डीजीपी पंजाब।
प्रत्यर्पण की प्रक्रिया लंबी चलती है। यह प्रक्रिया दो देशों की बीच समझौते और आपसी संबंधों पर निर्भर करती है। ऐसे में प्रत्यर्पण के तहत गोल्डी बराड़ को भारत लाने में अभी समय लग सकता है। सतपाल जैन, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल आफ इंडिया।
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