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Gujarat Elections 2022: 70 सीटों पर  निर्णायक है पाटीदार समुदाय, इनके हाथ है सत्ता की चाबी

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Gujarat Elections 2022: 70 सीटों पर  निर्णायक है पाटीदार समुदाय, इनके हाथ है सत्ता की चाबी

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पीएम मोदी

पीएम मोदी
– फोटो : सोशल मीडिया

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गुजरात में सत्ता के लिए पाटीदारों का जुड़ना बेहद अहम है। प्रदेश की कुल जनसंख्या में 18 फीसदी की हिस्सेदारी वाला यह समुदाय विधानसभा की 182 सीटों में करीब 70 पर निर्णायक मतदाता समूह है। खासतौर पर सौराष्ट्र और कच्छ इलाके की 52 सीटों के कुल मतदाताओं में इनकी हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी है। 2017 में कुल 44 विधायक इस समुदाय से चुने गए थे। इससे यह साफ हो जाता है कि गुजरात में सत्ता की चाबी पाटीदार समुदाय के हाथों में है।

गुजरात की करीब 150 जातियों के साथ 52 फीसदी जनसंख्या ओबीसी श्रेणी में आती है। इनमें से पाटीदार समुदाय राजनीतिक तौर पर सबसे चैतन्य और एकजुट रहा है। 2017 में पाटीदार समुदाय की नाराजगी के चलते भाजपा बेहद कम मार्जिन से जीत पाई थी। परंपरागत रूप से भाजपा का साथ देना वाला पाटीदार समुदाय इस चुनाव में हार्दिक पटेल के नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद भाजपा से खासा नाराज था, नतीजतन सौराष्ट्र और कच्छ की कुल 54 सीटों में से भाजपा को 23 पर ही जीत मिली थी।

पाटीदार आंदोलन खड़ा करने वाले हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल हो चुके हैं और वीरमगाम से भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं। पाटीदार मतदाताओं की एकजुटता को भुनाने के लिए भाजपा ने इस बार 41 पाटीदार नेताओं को टिकट दिया है। भाजपा ने समुदाय को खुश करने के लिए मुख्यमंत्री भी बदला है। विश्लेषकों का मानना है कि पाटीदार मतदाता 2017  की नाराजगी भुला चुके हैं और ज्यादातर सीटों पर भाजपा को लाभ मिलेगा।

भुला दिया गुस्सा
दो सबसे बड़े पाटीदार संगठन-कड़वा पाटीदारों का सिदसर उमिया धाम और लेउवा पटेलों का खोडलधाम खुलकर भाजपा का समर्थन कर चुका है। खोडलधाम के ट्रस्टी रमेश तिलाला दक्षिण राजकोट से भाजपा प्रत्याशी हैं। वहीं, उमिया धाम के ट्रस्ट के अध्यक्ष जयराम पटेल का कहना है कि पाटीदार हमेशा से भाजपा को वोट देते आए हैं।

…तीन वजहें
तीन वजहों से भाजपा के साथ हैं- पहली, अन्य दल गैरपाटीदार समुदायों का ध्रुवीकरण चाहते हैं। दूसरी, पाटीदार समुदाय भाजपा का पुराना समर्थक है। वहीं, तीसरा बड़ा कारण भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री पद के लिए भूपेंद्र पटेल के नाम की घोषणा है।

एक्स फैक्टर: पाटीदार आंदोलन से जुड़े अल्पेश कठीरिया, गोपाल इटालिया और धार्मिक मालाविया आप से मैदान में हैं। आंदोलन समिति के समन्वयक रहे दिनेश बंभानिया का दावा है कि इस बार युवा मतदाता आप को भी वोट दे सकते हैं। आप इस बार एक्स फैक्टर है।

कांग्रेस की उम्मीदें जिंदा
2017 में पाटीदारों का कांग्रेस को समर्थन मिला था। कांग्रेस को अब भी समुदाय से उम्मीद है। गुजरात कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोषी कहते हैं, बेरोजगारी और महंगाई से त्रस्त जनता को कांग्रेस से उम्मीदें हैं।

भाजपा तोड़ेगी सारे रिकॉर्ड
गुजरात भाजपा के प्रवक्ता किशोर मकवाना का दावा है कि भाजपा इसबार रिकॉर्ड तोड़ जीत हासिल करेगी। 2017 के चुनाव से उलट पाटीदार खुलकर भाजपा के साथ हैं।

विस्तार

गुजरात में सत्ता के लिए पाटीदारों का जुड़ना बेहद अहम है। प्रदेश की कुल जनसंख्या में 18 फीसदी की हिस्सेदारी वाला यह समुदाय विधानसभा की 182 सीटों में करीब 70 पर निर्णायक मतदाता समूह है। खासतौर पर सौराष्ट्र और कच्छ इलाके की 52 सीटों के कुल मतदाताओं में इनकी हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी है। 2017 में कुल 44 विधायक इस समुदाय से चुने गए थे। इससे यह साफ हो जाता है कि गुजरात में सत्ता की चाबी पाटीदार समुदाय के हाथों में है।

गुजरात की करीब 150 जातियों के साथ 52 फीसदी जनसंख्या ओबीसी श्रेणी में आती है। इनमें से पाटीदार समुदाय राजनीतिक तौर पर सबसे चैतन्य और एकजुट रहा है। 2017 में पाटीदार समुदाय की नाराजगी के चलते भाजपा बेहद कम मार्जिन से जीत पाई थी। परंपरागत रूप से भाजपा का साथ देना वाला पाटीदार समुदाय इस चुनाव में हार्दिक पटेल के नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद भाजपा से खासा नाराज था, नतीजतन सौराष्ट्र और कच्छ की कुल 54 सीटों में से भाजपा को 23 पर ही जीत मिली थी।

पाटीदार आंदोलन खड़ा करने वाले हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल हो चुके हैं और वीरमगाम से भाजपा के टिकट पर मैदान में हैं। पाटीदार मतदाताओं की एकजुटता को भुनाने के लिए भाजपा ने इस बार 41 पाटीदार नेताओं को टिकट दिया है। भाजपा ने समुदाय को खुश करने के लिए मुख्यमंत्री भी बदला है। विश्लेषकों का मानना है कि पाटीदार मतदाता 2017  की नाराजगी भुला चुके हैं और ज्यादातर सीटों पर भाजपा को लाभ मिलेगा।

भुला दिया गुस्सा

दो सबसे बड़े पाटीदार संगठन-कड़वा पाटीदारों का सिदसर उमिया धाम और लेउवा पटेलों का खोडलधाम खुलकर भाजपा का समर्थन कर चुका है। खोडलधाम के ट्रस्टी रमेश तिलाला दक्षिण राजकोट से भाजपा प्रत्याशी हैं। वहीं, उमिया धाम के ट्रस्ट के अध्यक्ष जयराम पटेल का कहना है कि पाटीदार हमेशा से भाजपा को वोट देते आए हैं।

…तीन वजहें

तीन वजहों से भाजपा के साथ हैं- पहली, अन्य दल गैरपाटीदार समुदायों का ध्रुवीकरण चाहते हैं। दूसरी, पाटीदार समुदाय भाजपा का पुराना समर्थक है। वहीं, तीसरा बड़ा कारण भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री पद के लिए भूपेंद्र पटेल के नाम की घोषणा है।

एक्स फैक्टर: पाटीदार आंदोलन से जुड़े अल्पेश कठीरिया, गोपाल इटालिया और धार्मिक मालाविया आप से मैदान में हैं। आंदोलन समिति के समन्वयक रहे दिनेश बंभानिया का दावा है कि इस बार युवा मतदाता आप को भी वोट दे सकते हैं। आप इस बार एक्स फैक्टर है।

कांग्रेस की उम्मीदें जिंदा

2017 में पाटीदारों का कांग्रेस को समर्थन मिला था। कांग्रेस को अब भी समुदाय से उम्मीद है। गुजरात कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोषी कहते हैं, बेरोजगारी और महंगाई से त्रस्त जनता को कांग्रेस से उम्मीदें हैं।

भाजपा तोड़ेगी सारे रिकॉर्ड

गुजरात भाजपा के प्रवक्ता किशोर मकवाना का दावा है कि भाजपा इसबार रिकॉर्ड तोड़ जीत हासिल करेगी। 2017 के चुनाव से उलट पाटीदार खुलकर भाजपा के साथ हैं।



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