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अर्जुन तेंदुलकर नहीं जानते अपने पिता का सबसे खास रिकॉर्ड, यहीं से दुनिया ने जानी उनकी ताकत

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अर्जुन तेंदुलकर नहीं जानते अपने पिता का सबसे खास रिकॉर्ड, यहीं से दुनिया ने जानी उनकी ताकत

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BY Sahil Malhotra

नई दिल्ली. अर्जुन तेंदुलकर ने अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए रणजी ट्रॉफी के अपने पहले मैच में ही शतक जड़ दिया है. अर्जुन ने 23 साल की उम्र में गोवा के लिए अपना रणजी डेब्यू किया और राजस्थान के खिलाफ के शानदार 120 रन की पारी खेली. सचिन तेंदुलकर ने 34 साल पहले 15 साल की उम्र में वानखेड़े स्टेडियम में गुजरात के खिलाफ नाबाद 100 रन बनाकर महान क्रिकेटर बनने का सफर शुरू किया था, लेकिन अर्जुन तेंदुलकर अपने पिता के इस सबसे खास रिकॉर्ड के बारे में नहीं जानते हैं.

अपने डेब्यू मैच में शतक जड़ने के बाद अर्जुन तेंदुलकर ने पत्रकारों से बात की. इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें पता था कि उनके पिता भी फर्स्ट क्लास डेब्यू पर शतक लगा चुके हैं? इस पर अर्जुन ने तुरंत जवाब दिया, ”नहीं, मुझे पता नहीं था.” मुश्किल हालात में बल्लेबाजी के लिए उतरे अर्जुन के लिए शतक बनाना आसान नहीं था, लेकिन बाएं हाथ के बल्लेबाज ने नाइट वॉचमैन की भूमिका को अच्छे से निभाया और स्टम्प्स तक टिके रहे.

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अर्जुन ने कहा, ”जब मैं पहली बार बल्लेबाजी के लिए आया तो मुझे ज्यादातर गेंदों का सामना करना पड़ा, क्योंकि सुयश उस वक्त 80 रन पर बल्लेबाजी कर रहा था इसलिए मेरा काम था कि मैं उसे बचाऊं और ज्यादातर गेंदें खेलूं.” इसके बाद मैच के दूसरे दिन का शुरुआती सत्र “गेंदबाजों को पहला घंटा देने” के बारे में था.

अर्जुन ने कहा, ”दूसरे दिन के खेल के मुताबिक था कि बस पहला घंटा गेंदबाजों को दीजिए. प्रारंभिक चरण समाप्त करने के बाद यह अब हावी होने का समय है और और रन बनाने का समय. जैसा कि मैंने कहा कि वह नई गेंद थी और नई गेंद कुछ करेगी. ईमानदारी से कहूं तो मैं परवाह नहीं करता कि मैं कैसा दिखता हूं, मैंने पहले कठिन चरण को पार किया और इसके बाद फायदा उठाया.”

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अर्जुन तेंदुलकर ने हमेशा एक गेंदबाज के रूप में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं और बल्ले से उनके कौशल पर किसी का ध्यान नहीं गया है. लेकिन बाएं हाथ के बल्लेबाज के लिए उन्हें हमेशा अपनी बल्लेबाजी क्षमताओं पर विश्वास था. उन्होंने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के लिए बहुत सारे ट्रायल मैचों में शतक बनाए थे. अर्जुन ने कहा, ”मुझे हमेशा अपनी क्षमता पर विश्वास था और मैं बस सेट होना चाहता था, और एक बार जब मैं सेट हो जाता हूं तो यह फायदा उठाने और बड़े रन बनाने के बारे में है. जैसा कि मैंने कहा कि केवल पहला घंटा खेलिए और लाभ उठाइए.”

फर्स्ट क्लास सर्किट में अर्जुन की शुरुआत अच्छी रही है, लेकिन युवा खिलाड़ी बहुत आगे देखने के लिए उत्सुक नहीं हैं. वह वर्तमान में रहने और राजस्थान के खिलाफ चल रहे मैच को जीतने पर ध्यान देना चाहते हैं. अर्जुन ने कहा, ”बस हर खेल और हर गेंद को योग्यता के आधार पर खेलें. अभी के लिए, बस इस गेम को जीतने का प्रयास है.”

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बता दें कि खेलने के ज्यादा मौकों की वजह से जूनियर तेंदुलकर ने इस सत्र के शुरू में मुंबई छोड़कर गोवा से खेलने का फैसला किया था. सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए अर्जुन ने छठे विकेट के लिए 221 रन की साझेदारी निभाकर टीम को स्टंप तक आठ विकेट पर 493 रन के स्कोर तक पहुंचाया. अर्जुन ने 177 गेंद में शतक जड़कर अपने पिता का अनुकरण किया. अर्जुन ने लिस्ट ए के आठ मैचों में आठ विकेट झटके हैं. सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उन्होंने गोवा के लिए तीन टी20 मैचों में चार विकेट झटके थे.अर्जुन ने भारतीय अंडर-19 टीम में भी जगह बनाई थी और उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग फ्रेंचाइजी मुंबई इंडियंस ने खरीदा था, लेकिन वह टीम के लिए एक भी आईपीएल मैच नहीं खेले हैं.

Tags: Arjun tendulkar, Ranji cricket, Ranji Trophy, Sachin tendulkar

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