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EAM S Jaishankar
– फोटो : ANI
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विदेश मंत्री एस जयशंकर गुरुवार को ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद बैठक: आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक रूख: चुनौतियां और आगे का रास्ता’ की अध्यक्षता करने के बाद ट्रस्टीशिप काउंसिल की बैठक में शामिल हुए। भारत के साथ, बांग्लादेश, मिस्र, फ्रांस, मोरक्को और नेपाल जैसे योगदान देने वाले देशों ने इसके सह-अध्यक्षों के रूप में भाग लिया। एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के लिए लगातार बढ़ती चुनौतियों के बीच इस बात पर चिंता जताई कि कैसे सशस्त्र समूहों और आतंकवादियों की भागीदारी ने विश्व स्तर पर शांति अभियानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।
जयशंकर ने ट्रस्टीशिप काउंसिल में शांति सैनिकों के खिलाफ अपराधों के लिए जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए एक फ्रेंड्स समूह को लॉन्च किया। फ्रेंड्स समूह के लॉन्च पर विदेश मंत्री एस जयंशकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है। यह अस्पष्ट स्थितियों और शत्रुतापूर्ण क्षेत्रों में किया जाता है। सशस्त्र समूहों, आतंकवादियों और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के शामिल होने से शांति स्थापना अभियान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
उन्होंने कहा कि सशस्त्र समूहों, आतंकवादियों और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध की भागीदारी ने शांति सैनिकों के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। विदेश मंत्री ने शांति सैनिकों के खिलाफ अपराधों में हालिया वृद्धि पर भी गौर किया।
तीन साल में 20 देशों के 68 शांति रक्षकों ने जान गंवाईं
विदेश मंत्री ने आगे कहा कि आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले तीन साल में 20 देशों के 68 शांति रक्षकों ने शांति के लिए अपनी जान गंवाईं। अब तक 177 भारतीय शांति सैनिकों ने अपने जीवन का बलिदान किया है। जयशंकर ने कहा कि शांति सैनिकों के खिलाफ अपराधों को रोकना संयुक्त राष्ट्र का एक बहु-हितधारक कार्य है। उन्होंने कहा कि यह भी एक सच्चाई है कि जब शांति सैनिकों के खिलाफ अपराध किए जाते हैं तो मेजबान देशों के पास ऐसी जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति या आवश्यक क्षमता नहीं होती है।
उन्होंने कहा कि भारत ने एक डाटाबेस लॉन्च करने की सुविधा प्रदान की है जो संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के खिलाफ सभी अपराधों को रिकॉर्ड करेगा। यह जल्द ही लॉन्च के लिए भी तैयार होगा। उन्होंने कहा कि भारत विश्व स्तर पर सबसे अधिक संख्या में शांति सैनिकों का योगदान देता है। गौरतलब है कि अगस्त 2021 में भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता के दौरान संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के खिलाफ अपराधों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने पर सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव अपनाया गया था।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 1948 से दुर्भावनापूर्ण कृत्यों के कारण 1,000 से अधिक शांति सैनिक मारे गए हैं और 3,000 से अधिक घायल हुए हैं। अपराधियों को न्याय दिलाने में गंभीर चुनौतियों के कारण ऐसे अपराधों के लिए अभियोजन की दर बहुत कम रही है। अभियोजन की कम दर ने दंडमुक्ति के वातावरण में योगदान दिया है, जो ऐसे अपराध करने वाले अपराधियों को प्रोत्साहित करता है।
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