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Jharkhand: हेमंत सरकार को हाईकोर्ट ने दिया झटका, कर्मचारी चयन परीक्षा मानदंड में किए गए संशोधन को किया रद्द

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Jharkhand: हेमंत सरकार को हाईकोर्ट ने दिया झटका, कर्मचारी चयन परीक्षा मानदंड में किए गए संशोधन को किया रद्द

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झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट
– फोटो : Social Media

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झारखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार हेमंत सरकार को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएससीसी) के भर्ती नियमों में राज्य सरकार द्वारा किए गए संशोधन को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने रमेश हांसदा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

पीठ ने हेमंत सरकार के द्वारा नियोजन नीति में किया गया संशोधन गलत और असंवैधानिक माना है। नई नियमावली के तहत झारखंड से 10वीं और 12वीं पास अभ्यर्थी ही परीक्षा में बैठ सकते थे। वहीं इसके अलावा 14 स्थानीय भाषाओं में से हिंदी और अंग्रेजी को बाहर कर दिया गया था जबकि उर्दू, बांग्ला और उड़िया सहित 12 अन्य स्थानीय भाषाओं को शामिल किया गया था।

राज्य मंत्रिमंडल ने पिछले साल झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा ग्रेड- तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की सरकारी नौकरियों के लिए आयोजित परीक्षाओं के लिए रोजगार पात्रता मानदंड और पाठ्यक्रम में संशोधन के प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। हांसदा ने जेएसएससी के नियमों में किए गए बदलावों को चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि वे सरकारी नौकरी चाहने वाले कई उम्मीदवारों की संभावनाओं को प्रभावित कर रहे हैं।

संशोधित नियमों के अनुसार, सामान्य वर्ग के उम्मीदवार जिनके पास राज्य के बाहर के संस्थानों से मैट्रिक और इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र हैं, वे परीक्षा में बैठने के पात्र नहीं होंगे। आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को ऐसी शर्तों के तहत नहीं रखा गया था। पीठ ने सामान्य श्रेणी के लिए पात्रता मानदंड को रद्द करने के अलावा, जेएससीसी द्वारा प्रस्तावित भाषा के पेपर में अंग्रेजी और हिंदी को विषयों के रूप में शामिल नहीं करने के सरकार के फैसले को भी रद्द कर दिया।

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झारखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार हेमंत सरकार को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएससीसी) के भर्ती नियमों में राज्य सरकार द्वारा किए गए संशोधन को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने रमेश हांसदा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

पीठ ने हेमंत सरकार के द्वारा नियोजन नीति में किया गया संशोधन गलत और असंवैधानिक माना है। नई नियमावली के तहत झारखंड से 10वीं और 12वीं पास अभ्यर्थी ही परीक्षा में बैठ सकते थे। वहीं इसके अलावा 14 स्थानीय भाषाओं में से हिंदी और अंग्रेजी को बाहर कर दिया गया था जबकि उर्दू, बांग्ला और उड़िया सहित 12 अन्य स्थानीय भाषाओं को शामिल किया गया था।

राज्य मंत्रिमंडल ने पिछले साल झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा ग्रेड- तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की सरकारी नौकरियों के लिए आयोजित परीक्षाओं के लिए रोजगार पात्रता मानदंड और पाठ्यक्रम में संशोधन के प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। हांसदा ने जेएसएससी के नियमों में किए गए बदलावों को चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि वे सरकारी नौकरी चाहने वाले कई उम्मीदवारों की संभावनाओं को प्रभावित कर रहे हैं।

संशोधित नियमों के अनुसार, सामान्य वर्ग के उम्मीदवार जिनके पास राज्य के बाहर के संस्थानों से मैट्रिक और इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र हैं, वे परीक्षा में बैठने के पात्र नहीं होंगे। आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को ऐसी शर्तों के तहत नहीं रखा गया था। पीठ ने सामान्य श्रेणी के लिए पात्रता मानदंड को रद्द करने के अलावा, जेएससीसी द्वारा प्रस्तावित भाषा के पेपर में अंग्रेजी और हिंदी को विषयों के रूप में शामिल नहीं करने के सरकार के फैसले को भी रद्द कर दिया।



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