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पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर
– फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में सरकार बदलने का रिवाज न बदल पाने पर पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का कहना है कि जनादेश स्वीकार है। सत्ता में आई कांग्रेस सरकार को अब जनता से किए वादे पूरे करने होंगे। भाजपा विपक्ष की भूमिका को भी दमदार तरीके से निभाने को तैयार है। शुक्रवार को ओकओवर शिमला में पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से अमर उजाला के राज्य ब्यूरो प्रमुख सुरेश शांडिल्य ने विभिन्न बिंदुओं पर विशेष बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश…
प्रश्न : नई सरकार बन गई है। क्या कहना है आपका?
उत्तर : हम नई सरकार के शुरुआती दौर से ही बदले की भावना से काम करने से आहत हैं। कांग्रेस सरकार एक अप्रैल 2022 के बाद खुले संस्थानों की समीक्षा करेगी। मुझसे पहले जो सरकारें बनीं, वे क्या ऐसा करती थीं। हमने ऐसा नहीं किया। मंत्रिमंडल बनाए बगैर ही ऐसे फैसले हो रहे हैं।
प्रश्न : मंत्रिमंडल न बनने की सरकार की दुविधा पर क्या कहते हैं?
उत्तर : हमने पांच साल पहले 27 दिसंबर को पूरे मंत्रिमंडल के साथ शपथ ली थी। कांग्रेस की नई सरकार में पहले मुख्यमंत्री बनने की बात होल्ड हुई। इनकी धक्का मुक्की, नारेबाजी पूरे देश में देखी गई। यहां जो भी जीते सारे सीएम ही बनना चाह रहे थे। छोटे से प्रदेश में सीएम और डिप्टी सीएम बनाए गए। जो मुख्यमंत्री बन गए हैं। उन्हें सबसे ज्यादा दावेदारी जताने वाले सहजता से नहीं लेंगे। जनमानस और नेताओं में अनिश्चितता के माहौल से यह सरकार बनी है। कांग्रेस को शंका है कि कैबिनेट बनाने से बहुत सारे लोग निराश और नाराज होंगे। इससे संकट पैदा होगा। मगर हम लोग संकट पैदा नहीं करने वाले हैं। संकट तो कांग्रेस के लोग पैदा कर रहे हैं। इस सरकार ने तो यह भी कहा था कि दस दिन के भीतर ओपीएस को लागू करेंगे, पर यह नहीं हो पाया है। एक हफ्ता हो गया है पर कैबिनेट के ही दर्शन नहीं हो पाए।
प्रश्न : नेता प्रतिपक्ष कब तय होगा, संभवतया क्या आप ही होंगे?
उत्तर : सत्र बुलाया है। इससे पहले एक प्रक्रिया होगी। उसमें भाजपा विधायक दल के नेता और नेता प्रतिपक्ष का चयन होगा। कौन होगा, यह तो भाजपा विधायक दल तय करेगा। यह जरूरी नहीं है कि मैं ही बनूंगा। सरकार यह न समझे कि विपक्ष को नजर अंदाज करेगी। केंद्र के सहयोग के बगैर हिमाचल सरकार को चलाना संभव नहीं होगा। प्रधानमंत्री को जो लोग लगातार गालियां दे रहे हैं, उनसे विकास नहीं हो पाएगा। हम विपक्ष में अपनी भूमिका दमदार तरीके से निभाएंगे।
प्रश्न : भाजपा का एक खेमा नाराज बताया जा रहा था, क्या इससे भी हारे?
उत्तर : कांग्रेस कई मुद्दों को मैनुपुलेट करने में सफल हुई। बागी खडे़ हो गए, उससे भी सफलता नहीं मिली। गुटबाजी का विषय तो बहुत ज्यादा नहीं था, पर हमारे बागी किसके कहने पर खड़े हुए, यह सोचने का विषय है।
प्रश्न : क्या वीरभद्र की सहानुभूति लहर ने भी नुकसान किया?
उत्तर : मंडी संसदीय क्षेत्र में हम 17 में से 12 सीटों में जीते। रामपुर में बहुत कम मतों से बैलेट में हारे, ईवीएम से तो हम आगे थे। यह लहर नहीं थी।
प्रश्न : आपके आठ मंत्री हार गए, नौवें मंत्री का बेटा भी। क्या इनका काम संतोषजनक नहीं था?
उत्तर : मंत्रियों की हार पर सोचना पडे़गा। जहां पावर ज्यादा होती है, वहां एंटी इनकंबेंसी होती है।
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