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Sri Lanka: कर्ज का दंश झेल रहे श्रीलंका में सांसदों को पढ़ाया जाएगा आर्थिक प्रबंधन, बनेगा अलग संस्थान

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Sri Lanka: कर्ज का दंश झेल रहे श्रीलंका में सांसदों को पढ़ाया जाएगा आर्थिक प्रबंधन, बनेगा अलग संस्थान

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राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे

राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे

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बीते दिनों इतिहास का सबसे खराब आर्थिक संकट झेल चुका श्रीलंका अब फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। कर्ज का दंश झेल रहा यह देश अब आर्थिक और व्यापारिक निर्णयों के लिए सांसदों को शिक्षित करेगा। इसके लिए श्रीलंका में एक संस्थान की भी स्थापना की जाएगी। 

श्रीलंका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया की कैबिनेट ने आर्थिक एवं व्यापार संस्थान स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस संस्थान का उद्देश्य सांसदों और अधिकारियों को आर्थिक और व्यापार मामलों पर सही निर्णय लेने में मदद करने के लिए शिक्षित करना है। 

राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने रखा था प्रस्ताव 
श्रीलंकाई मंत्रिमंडल के प्रवक्ता बंडुला गुणवर्धने ने बताया कि संस्थान स्थापित करने का प्रस्ताव राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की ओर से लाया गया था, जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया, कानूनी मसौदाकार एक मसौदा विधेयक को संकलित करने का काम शुरू करेगा।

गलत निर्णयों की वजह से कर्ज में डूबा था देश 
बता दें, इस साल की शुरुआत में श्रीलंका कर्ज में डूब गया था। आलम यह हुआ कि देश ने इतिहास का सबसे खराब आर्थिक संकट देखा। यहां महंगाई चरम पर पहुंच गई और लोग भुखमरी तक का शिकार होने पड़े। विद्रोह के कारण सरकार को सत्ता परिवर्तन का भी शिकार होना पड़ा । विश्लेषकों का कहना है कि कई तिमाहियों की चेतावनी के बाद भी सांसदों को उभरते संकट की पर्याप्त जानकारी नहीं थी। अगर,  2020 के आसपास सही निर्णय लिए गए होते तो संकट को टाला जा सकता था।

विस्तार

बीते दिनों इतिहास का सबसे खराब आर्थिक संकट झेल चुका श्रीलंका अब फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। कर्ज का दंश झेल रहा यह देश अब आर्थिक और व्यापारिक निर्णयों के लिए सांसदों को शिक्षित करेगा। इसके लिए श्रीलंका में एक संस्थान की भी स्थापना की जाएगी। 

श्रीलंका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया की कैबिनेट ने आर्थिक एवं व्यापार संस्थान स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस संस्थान का उद्देश्य सांसदों और अधिकारियों को आर्थिक और व्यापार मामलों पर सही निर्णय लेने में मदद करने के लिए शिक्षित करना है। 

राष्ट्रपति विक्रमसिंघे ने रखा था प्रस्ताव 

श्रीलंकाई मंत्रिमंडल के प्रवक्ता बंडुला गुणवर्धने ने बताया कि संस्थान स्थापित करने का प्रस्ताव राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की ओर से लाया गया था, जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया, कानूनी मसौदाकार एक मसौदा विधेयक को संकलित करने का काम शुरू करेगा।

गलत निर्णयों की वजह से कर्ज में डूबा था देश 

बता दें, इस साल की शुरुआत में श्रीलंका कर्ज में डूब गया था। आलम यह हुआ कि देश ने इतिहास का सबसे खराब आर्थिक संकट देखा। यहां महंगाई चरम पर पहुंच गई और लोग भुखमरी तक का शिकार होने पड़े। विद्रोह के कारण सरकार को सत्ता परिवर्तन का भी शिकार होना पड़ा । विश्लेषकों का कहना है कि कई तिमाहियों की चेतावनी के बाद भी सांसदों को उभरते संकट की पर्याप्त जानकारी नहीं थी। अगर,  2020 के आसपास सही निर्णय लिए गए होते तो संकट को टाला जा सकता था।



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