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Explained: कितनी पुरानी है सेना के रेजिमेंट की कहानी, क्यों होती है कभी बुंदेलखंड, कभी अहीर रेजिमेंट की मांग?

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Explained: कितनी पुरानी है सेना के रेजिमेंट की कहानी, क्यों होती है कभी बुंदेलखंड, कभी अहीर रेजिमेंट की मांग?

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भारतीय सेना में रेजिमेंट प्रणाली

भारतीय सेना में रेजिमेंट प्रणाली
– फोटो : अमर उजाला

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उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ ने सेना में अहीर रेजिमेंट के स्थापना की मांग की है। उन्होंने संसद में तवांग में चीनी सैनिकों की घुसपैठ के मुद्दे पर चर्चा के दौरान ये मांग उठाई। यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की जातिगत रेजिमेंट के गठन की मांग किसी नेता ने की है। यहां तक की अहीर रेजिमेंट के गठन की मांग भी पहले कई नेता कर चुके हैं।  
आखिर ये रेजिमेंट होती क्या है? सेना में जाति के नाम पर रेजिमेंट बनाने की मांग क्यों होती रही है? मौजूदा समय में जाति आधारित कितनी रेजिमेंट हैं? जाति से अलग और किस-किस आधार पर रेजिमेंट बनीं हैं? आजादी के बाद रेजिमेंट गठन में क्या बदलाव हुआ? पिछले कुछ साल में किन रेजिमेंट को बनाने की मांग हुई है? आइये जानते हैं…
 
रेजिमेंट होती क्या है?
आसान शब्दों में कहें तो रेजिमेंट सैनिकों के एक ऐसे समूह को कहते हैं, जो एक नियम और व्यवस्था के क्रम से बंधा होता है। हर रेजीमेंट का अपना विशिष्ट रंग, वर्दी और प्रतीक चिन्ह और युद्ध क्षेत्र में उपलब्धियां होती हैं। एक रेजिमेंट सैन्य बलों के संगठन का एक हिस्सा होती हैं जिसमें बटालियन शामिल हो सकते हैं, जो छोटी लड़ाकू इकाइयां हैं। गार्ड्स ऑफ ब्रिगेड, राजपूताना राइफल्स, गोरखा राइफल्स, पंजाब रेजिमेंट आदि भारतीय सेना की कुछ ऐसी रेजिमेंट हैं जिनसे मिलकर भारतीय सेना की इन्फैंट्री रजिमेंट बनती है।
 

भारतीय सेना में कितनी रेजिमेंट हैं?
भारतीय सेना में 27 इन्फैंट्री रेजिमेंट हैं। इन रेजिमेंटों में कई ऐसी भी हैं जो किसी जाति के नाम पर बनाई गईं तो कुछ क्षेत्र के नाम पर बनीं। सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंट पंजाब रेजिमेंट है जिसका गठन 1705 में हुआ था। पंजाब रेजिमेंट उपमहाद्वीप की सबसे पुरानी इन्फैंट्री रेजिमेंटों में से भी एक है। इसका इतिहास भारतीय सेना के विकास को भी बताता है। 18वीं शताब्दी की शुरुआत में कर्नाटक में ईस्ट इंडिया कंपनी के पास अपने व्यापार की सुरक्षा के लिए भारतीय अधिकारियों द्वारा स्थापित सिपाहियों की स्वतंत्र कंपनियां थीं। 1757 में, इन स्वतंत्र कंपनियों को मेजर रॉबर्ट क्लाइव द्वारा तट बटालियनों में मिला दिया गया और इस प्रकार भारतीय सेना और इसकी इन्फैंट्री के इतिहास की शुरुआत हुई।   
जाति के नाम पर सेना में रेजिमेंट कैसे बनी? 
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद, ब्रिटिश हुकूमत ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश भारत और इसकी रियासतों पर सीधा नियंत्रण स्थापित कर लिया था। यहीं से ब्रिटिश शासन और ब्रिटिश भारतीय सेना की शुरुआत हुई थी।
इसी समय इन्फैंट्री सेना रेजिमेंटों को जाति, समुदाय या क्षेत्र के नाम से बुलाया जाने लगा था। इसी दौरान राजपूताना राइफल्स, जाट रेजिमेंट, एक गोरखा राइफल्स, सिख रेजिमेंट, गढ़वाल राइफल्स और महार रेजिमेंट जैसी रेजिमेंट का गठन हुआ।

इनमें से मराठा लाइट इन्फेंट्री पहली थी जो एक वर्ग के नाम पर बनाई गई थी। इसका गठन 1768 में हुआ था। इसके बाद राजपूत रेजिमेंट 1798 में, राजपूताना राइफल्स एवं जाट रेजिमेंट 1817 में, डोगरा रेजिमेंट 1858 में और महार रेजिमेंट 1941 में गठित की गई। 

 
जाति से अलग और किस आधार पर बनी हैं रेजिमेंट? 
ऐसा नहीं है कि ब्रिटिश राज में सिर्फ जाति के नाम पर सेना की रेजिमेंट बनीं। जाति के साथ ही धर्म और स्थान विशेष के नाम पर भी रेजिमेंटों की स्थापना की गई थी। जैसे- सिख रेजिमेंट 1846 में बनाई गई, पंजाब रेजिमेंट का गठन 1705 में हुआ। इसके अलावा मद्रास, गढ़वाल राइफल्स, कुमाऊं (नागा सहित), असम, बिहार जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स (लद्दाख स्काउट्स सहित) भी ऐसी ही रेजिमेंट हैं। 
 
आजादी के बाद क्या बदला?
आजादी के बाद देश में कभी भी वर्ग, पंथ, क्षेत्र या धर्म के आधार पर सेना में रेजिमेंटों का गठन नहीं किया गया है। इसके पीछे लगभग सरकारों का रुख स्पष्ट रहा है कि उसकी नीति के अनुसार सभी नागरिक, चाहे वे किसी भी वर्ग, पंथ, क्षेत्र या धर्म के हों, भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए पात्र हैं। आजादी के बाद भारत सरकार की यह नीति रही है कि किसी वर्ग/समुदाय/धर्म या क्षेत्र विशेष के लिए कोई नई रेजीमेंट न बनाई जाए।
सरकार ने संसद में ये कहा है कि वर्ग/क्षेत्र/ऐतिहासिक और राष्ट्रीय नायकों के नाम आदि के आधार पर नई रेजीमेंटों की स्थापना के लिए कई याचिकाएं, वीआईपी संदर्भ, संसद प्रश्न, गैर-सदस्य विधेयक आदि समय-समय पर प्राप्त हुए हैं। हालांकि, सरकारी नीति के अनुसार, ऐसी कोई नई रेजिमेंट नहीं बनाई गई है।

 
अहीर रेजिमेंट के अलावा इस तरह और कितनी रेजिमेंट बनाने की मांग हो चुकी है?
भाजपा सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ से पहले सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव भी अहीर रेजिमेंट बनाने मांग कर चुके हैं। उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव के लिए जारी किए पार्टी के घोषणापत्र में भी इसका जिक्र किया था। वहीं, हरियाणा से राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा राज्यसभा में भारतीय सेना में अहीर रेजिमेंट का गठन करने का मुद्दा इसी साल बजट सत्र के दौरान उठाया था।  
पिछले साल शीतकालीन सत्र में असम से निर्दलीय लोकसभा सदस्य नव कुमार सरनीया ने जनजतीय रेजिमेंट बनाने की मांग की थी। इसके अलावा सांसद ने कूच नारायणी रेजिमेंट बनाने की भी मांग की थी।
 
बिरसा मुंडा से बुंदेलखंड रेजिमेंट तक की मांग
स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा के नाम पर नई रेजिमेंट बनाने की मांग भी देश में नई नहीं है।  इसी तरह साल मानसून सत्र के दौरान उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से भाजपा सांसद पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल ने बुंदेलखंड रेजिमेंट बनाने की मांग को लेकर प्राइवेट मेंबर बिल लेकर आए थे। केंद्रपाड़ा से बीजद सांसद अनुभव मोहंती ने कलिंग रेजिमेंट बनाने की मांग 2019 में शीतकालीन सत्र के दौरान की थी। यहां तक कि एक सांसद ने असम रेजिमेंट बनाने की भी मांग सदन में की थी। हालांकि, इसके जवाब में सरकार ने जानकारी दी थी कि असम रेजिमेंट (15 जून, 1941 को गठित) आजादी के पहले से ही भारतीय सेना का भाग रहा है। 
 
इस तरह की मांग किस आधार पर होती है? 
सेना की मौजूदा रेजिमेंट प्रणाली में जाति और क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग रेजिमेंट हैं। यही मौजूदा राजनीति में नए जातिगत या क्षेत्रीय रेजिमेंट के गठन की मांग का आधार बनता है। एक्सपर्ट कहते हैं कि राजनेता अपने क्षेत्र या समुदाय के मतदाताओं के लुभाने के लिए इस तरह की मांगे करते हैं। हालांकि, आजादी के बाद से ही सरकार किसी भी दल की रही हो उसका रुख इसे लेकर एक सा रहा है। आजाद भारत में एक भी रेजिमेंट इस तरह के आधार पर नहीं बनी।
इन मांगों पर सरकार का क्या रुख है?
आजादी के बाद भारत सरकार की नीति रही है कि किसी वर्ग/समुदाय/धर्म या क्षेत्र विशेष के लिए कोई नई रेजीमेंट न बनाई जाएगी। इस तरह की मांगों पर सरकार ने संसद में ये भी कहा है कि वर्ग/क्षेत्र/ऐतिहासिक और राष्ट्रीय नायकों के नाम आदि के आधार पर नई रेजीमेंटों की स्थापना के लिए कई याचिकाएं, वीआईपी संदर्भ, संसद प्रश्न, गैर-सदस्य विधेयक आदि समय-समय पर प्राप्त हुए हैं। हालांकि, सरकारी नीति के अनुसार, कोई नई रेजिमेंट नहीं बनाई गई है।

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उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से सांसद दिनेश लाल यादव निरहुआ ने सेना में अहीर रेजिमेंट के स्थापना की मांग की है। उन्होंने संसद में तवांग में चीनी सैनिकों की घुसपैठ के मुद्दे पर चर्चा के दौरान ये मांग उठाई। यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की जातिगत रेजिमेंट के गठन की मांग किसी नेता ने की है। यहां तक की अहीर रेजिमेंट के गठन की मांग भी पहले कई नेता कर चुके हैं।  

आखिर ये रेजिमेंट होती क्या है? सेना में जाति के नाम पर रेजिमेंट बनाने की मांग क्यों होती रही है? मौजूदा समय में जाति आधारित कितनी रेजिमेंट हैं? जाति से अलग और किस-किस आधार पर रेजिमेंट बनीं हैं? आजादी के बाद रेजिमेंट गठन में क्या बदलाव हुआ? पिछले कुछ साल में किन रेजिमेंट को बनाने की मांग हुई है? आइये जानते हैं…

 



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