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Lok Sabha Election 2024: अमेठी में कैसे बंटते हैं वोट, स्मृति ईरानी ने राहुल को क्यों कहा- डरेंगे तो नहीं?

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Lok Sabha Election 2024: अमेठी में कैसे बंटते हैं वोट, स्मृति ईरानी ने राहुल को क्यों कहा- डरेंगे तो नहीं?

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स्मृति ईरानी एवं राहुल गांधी

स्मृति ईरानी एवं राहुल गांधी
– फोटो : Amar Ujala

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राहुल गांधी 2024 का लोकसभा चुनाव अमेठी सीट से लड़ सकते हैं। इसे लेकर कांग्रेस नेता अजय राय का एक बयान आने के बाद से सियासी पारा चढ़ा हुआ है। अजय राय के बयान के बाद केंद्रीय मंत्री और अमेठी से सांसद स्मृति ईरानी ने ट्वीट करके राहुल से पूछा कि क्या आपका अमेठी से लड़ना पक्का समझूं। स्मृति ने लिखा ‘सुना है राहुल गांधी जी आपने अपने किसी प्रांतीय नेता से अभद्र तरीके से 2024 में अमेठी से लड़ने की घोषणा करवाई है। तो क्या आपका अमेठी से लड़ना पक्का समझूं? दूसरी सीट पर तो नहीं भागेंगे? डरेंगे तो नहीं?’

 

ऐसे में सवाल ये है कि अमेठी सीट का सियासी गणित क्या है? राहुल गांधी स्मृति ईरानी की अदावत कितनी पुरानी है? 2019 के लोकसभा चुनाव में क्या हुआ था? अमेठी का चुनावी इतिहास क्या कहता है? 2022 के विधानसभा चुनाव में इस लोकसभा क्षेत्र की सीटों के क्या नतीजे रहे? क्या सच में राहुल 2024 में अमेठी से चुनाव लड़ेंगे? आइये इन सभी सवाल के जवाब जानते हैं…

अमेठी सीट का सियासी गणित क्या है? 

अमेठी लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से एक है। ऐतिहासिक तौर पर यह सीट गांधी-नेहरू परिवार का गढ़ रही है। 1977 में इस सीट से संजय गांधी ने चुनाव लड़ा था तब उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद 1980 में संजय गांधी यहां से जीते। तब से 2019 तक जब भी नेहरू-गांधी परिवार का कोई सदस्य यहां से लड़ा उसे जीत मिली। 2019 में पहली बार इस परिवार का कोई सदस्य इस सीट से हारा। 

 राहुल गांधी स्मृति ईरानी की अदावत कितनी पुरानी है?

2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 80 में से 73 सीटों पर भाजपा और उसके सहयोगी अपना दल को जीत मिली थी। महज सात सीटें ऐसी जहां भाजपा को जीत नहीं मिली थी। इन सात में से दो सीटें कांग्रेस और पांच सीटें सपा ने जीती थीं। इनमें अमेठी सीट भी शामिल थी। इस सीट पर राहुल गांधी ने भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी को हराया था। हार के बाद भी स्मृति नरेंद्र मोदी कैबिनेट में शामिल की गई थीं। 2014 के चुनाव से ही स्मृति ईरानी नेहरू गांधी परिवार पर हमलावर रही हैं। राहुल गांधी अक्सर उनके निशाने पर होते हैं। स्मृति ने 2014 की हार का बदला 2019 के चुनाव में ले लिया। इस चुनाव में एक बार फिर स्मृति और राहुल आमने-सामने थे। हालांकि, जीत स्मृति को मिली।  

2019 के लोकसभा चुनाव में क्या हुआ था? 

2019 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी ने कांग्रेस के राहुल गांधी को 55 हजार से अधिक वोट से हराया। स्मृति को कुल 4,68,514 वोट मिले। वहीं, राहुल गांधी को 4,13,394 वोट मिले। दिलचस्प ये है कि 2014 में राहुल गांधी इससे कम वोट पाकर भी जीत दर्ज करने में सफल रहे थे। तब उन्हें 4,08,651 वोट मिले थे। जबकि, स्मृति ईरानी को 3,00,748 वोट से संतोष करना पड़ा था। ये आंकड़ें बताते हैं कि पांच साल में अमेठी में कांग्रेस वोटर बढ़े, लेकिन उससे कहीं ज्यादा भाजपा ने मतदाताओं को अपने साथ जोड़ा। 

अमेठी का चुनावी इतिहास क्या कहता है? 

अमेठी लोकसभा सीट परंपरागत तौर पर कांग्रेस का गढ़ रही है। 2019 से पहले केवल दो मौके ऐसे थे जब यहां से कांग्रेस को हार मिली। 1977 की जनता लहर में यहां से भारतीय लोक दल ने रवींद्र प्रताप सिंह जीते थे। उन्होंने संजय गांधी को हराया था। इसके बाद 1998 में भाजपा के संजय सिंह यहां से जीते थे। संजय सिंह ने कांग्रेस के कैप्टन सतीष शर्मा को हराया था। 

वोटों के लिहाज से बात करें तो अब तक सिर्फ चार मौके ऐसे रहे जब जीतने वाले उम्मीदवार को चार लाख से ज्यादा वोट मिले। 1999 में सोनिया गांधी इस सीट से जीतीं थीं। तब उन्हें कुल 4,18,960 वोट मिले थे। 2009 में यहां से राहुल गांधी जीते, तब उन्हें कुल 4,64,195 वोट मिले थे। 2014 में राहुल को कुल 4,08,651 वोट मिले। 2019 के चुनाव में पहली बार जीतने और हारने वाले दोनों उम्मीदवारों को चार लाख से ज्यादा वोट मिले। पहली बार राहुल चार लाख से ज्यादा वोट पाकर भी हार गए। विशेषज्ञ कहते हैं कि कांग्रेस नए मतदाताओं में अपनी पैठ नहीं बना सकी। 

2022 के विधानसभा चुनाव में इस लोकसभा क्षेत्र की सीटों के क्या नतीजे रहे? 

अमेठी लोकसभा क्षेत्र में राज्य की पांच विधानसभा सीटें आती हैं। तिलोई, अमेठी, गौरीगंज, सलोन और जगदीशपुर। 2022 के विधानसभा चुनाव में इन पांच में से तीन सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। वहीं, दो पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार जीतने में सफल रहे। पांच में से चार सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई थी। 

 

क्या सच में राहुल 2024 में अमेठी से चुनाव लड़ेंगे? 

राहुल गांधी इस वक्त केरल के वायनाड से सांसद हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी के साथ ही वायनाड सीट से राहुल ने चुनाव लड़ा था। अमेठी में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसी वजह से जब अजय राय ने राहुल के फिर से अमेठी से चुनाव लड़ने की बात कही तो स्मृति ईरानी ने उन पर तंज किया। स्मृति का दूसरी सीट पर तो नहीं भागेंगे? डरेंगे तो नहीं? कहना इसी से जुड़ा था। जहां तक 2024 में राहुल के अमेठी से चुनाव लड़ने की है तो इसे लेकर राहुल की ओर से अभी तक कुछ नहीं कहा गया है। 

इतिहास की बात करें तो 1977 से अब तक नेहरू गांधी परिवार का अगर एक भी सदस्य सक्रिय राजनीति में रहा है तो इसी परिवार से ही किसी ने अमेठी से चुनाव लड़ा है। 

विस्तार

राहुल गांधी 2024 का लोकसभा चुनाव अमेठी सीट से लड़ सकते हैं। इसे लेकर कांग्रेस नेता अजय राय का एक बयान आने के बाद से सियासी पारा चढ़ा हुआ है। अजय राय के बयान के बाद केंद्रीय मंत्री और अमेठी से सांसद स्मृति ईरानी ने ट्वीट करके राहुल से पूछा कि क्या आपका अमेठी से लड़ना पक्का समझूं। स्मृति ने लिखा ‘सुना है राहुल गांधी जी आपने अपने किसी प्रांतीय नेता से अभद्र तरीके से 2024 में अमेठी से लड़ने की घोषणा करवाई है। तो क्या आपका अमेठी से लड़ना पक्का समझूं? दूसरी सीट पर तो नहीं भागेंगे? डरेंगे तो नहीं?’

 

ऐसे में सवाल ये है कि अमेठी सीट का सियासी गणित क्या है? राहुल गांधी स्मृति ईरानी की अदावत कितनी पुरानी है? 2019 के लोकसभा चुनाव में क्या हुआ था? अमेठी का चुनावी इतिहास क्या कहता है? 2022 के विधानसभा चुनाव में इस लोकसभा क्षेत्र की सीटों के क्या नतीजे रहे? क्या सच में राहुल 2024 में अमेठी से चुनाव लड़ेंगे? आइये इन सभी सवाल के जवाब जानते हैं…



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