Home Breaking News LG vs AAP: क्यों आमने-सामने हैं दिल्ली के एलजी और आप, केजरीवाल की पार्टी से 97 करोड़ वसूली का क्या है मामला?

LG vs AAP: क्यों आमने-सामने हैं दिल्ली के एलजी और आप, केजरीवाल की पार्टी से 97 करोड़ वसूली का क्या है मामला?

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LG vs AAP: क्यों आमने-सामने हैं दिल्ली के एलजी और आप, केजरीवाल की पार्टी से 97 करोड़ वसूली का क्या है मामला?

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दिल्ली के उपराज्यपाल एवं आप

दिल्ली के उपराज्यपाल एवं आप
– फोटो : Amar Ujala

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दिल्ली के उपराज्यपाल ने एक नया आदेश जारी किया है। इसके बाद एक बार फिर उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार आमने-सामने हैं। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी नरेश कुमार को 2016 की एक कमेटी के आदेश को लागू करने के लिए कहा है। यह आदेश सरकारी विज्ञापनों की सामाग्री से जुड़ा हुआ  है। 
इसी का हवाला देकर उपराज्यपाल ने आम आदमी पार्टी से 97.14 करोड़ रुपये और ब्याज वसूलने के लिए कहा है। आदेश में 15 दिनों के अंदर सरकारी खजाने में यह राशि जमा करवाने को कहा है। मामला सार्वजनिक होने पर भाजपा और कांग्रेस आप पर हमलावर है। जबकि आप ने उपराज्याल ने आदेश को गैर-कानूनी करार दिया है।

आखिर 2016 का आदेश क्या कहता है? वसूली की रकम का आधार क्या है? उपराज्यपाल के आदेश पर भाजपा का क्या कहना है? उपराज्यपाल के आदेश पर आम आदमी पार्टी का क्या कहना है? आइये जानते हैं…   
आखिर 2016 का आदेश क्या कहता है? 
उपराज्यपाल सक्सेना का ये निर्देश सरकारी विज्ञापनों में सामग्री के नियमन से संबंधित समिति (सीसीआरजीए) के 2016 के एक आदेश के तहत आया है। दरअसल, उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर भारत सरकार ने 6 अप्रैल, 2016 को तीन सदस्यीय पैनल सीसीआरजीए का गठन किया था। इस समिति में सभी मीडिया प्लेटफॉर्म्स में सरकार द्वारा वित्तपोषित विज्ञापनों की सामग्री के नियमन को देखने के लिए ऐसे लोग शामिल किए गए थे जो “स्पष्ट रूप से तटस्थ और निष्पक्ष हों और अपने संबंधित क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया हो।”
समिति को उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन पर आम जनता से मिली शिकायतों के निस्तारण और उपयुक्त सिफारिशें करने का अधिकार है। समिति दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का स्वतः संज्ञान भी ले सकती है और अपने सुझाव दे सकती है। आसान शब्दों में कहें तो यह समिति ये देखती है कि सरकार की ओर जारी होने वाले विज्ञापन में सिर्फ सरकार और उसकी योजनाओं का ही प्रचार-प्रसार हो।  
सीसीआरजीए के बाद क्या हुआ?
समिति के अस्तित्व में आने के बाद इसे 10 मई, 2016 को कांग्रेस नेता अजय माकन से दिल्ली सरकार के खिलाफ एक शिकायत आई। समिति ने 26 मई, 2016 को सरकार के जवाब के लिए इसे एक नोटिस जारी किया। जांच में समिति ने पाया कि दिल्ली सरकार ने शिकायतकर्ता द्वारा सूचीबद्ध नौ क्षेत्रों में से छह में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया है। इनमें 1. बाहरी विज्ञापन, 2. झूठे/भ्रामक विज्ञापन, 3. स्व-गौरव गान और राजनीतिक विरोधियों को लक्षित करने के लिए विज्ञापन, 4. मीडिया के खिलाफ विज्ञापन, 5. नाम से सत्ताधारी पार्टी का उल्लेख करने वाले विज्ञापन, और 6. अन्य राज्यों में हो रही घटनाओं पर जारी किए गए विज्ञापन शामिल थे।

इस तरह से अगस्त 2016 में डीआईपी की ओर से प्रकाशित विज्ञापनों की जांच में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशा निर्देशों का आप सरकार पर घोर उल्लंघन करने की बात सामने आई। इसके बाद समिति ने इस तरह के विज्ञापनों पर खर्च की गई राशि को आम आदमी पार्टी से वसूलने का निर्देश दिया था।

डीआईपी ने 30 मार्च 2017 को पत्र लिखकर आम आदमी पार्टी के संयोजक को 42,26,81,265 रुपये राज्य के खजाने में तुरंत भुगतान करने का निर्देश दिया। इसके अलावा 54,87,87,872 रुपये का भी विज्ञापन एजेंसियों को 30 दिनों के अंदर भुगतान करने का निर्देश दिया था। कहा जा रहा है कि पांच साल आठ महीने बीत जाने के बाद भी आप ने डीआईपी के इस आदेश का पालन नहीं किया है।   
मौजूदा मामले में भी आम आदमी पार्टी सरकार पर आरोप है कि राजनीतिक फायदे के लिए सरकार की आड़ में राजनैतिक विज्ञापन प्रकाशित किए गए। इसे सरकारी धन की हेराफेरी होने के साथ साथ सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना का मामला बताया गया है।
 
उपराज्यपाल के आदेश पर भाजपा का क्या कहना है?
एलजी के आदेश के बाद दिल्ली भाजपा ने अरविंद केजरीवाल को ‘जनता के पैसे से अपना प्रचार’ करने वाला नेता बताया है। पार्टी ने कहा है कि जनता के पैसे से अपनी छवि चमकाने के कारण ही केजरीवाल अब तक दिल्ली की जनता को साफ पानी तक नहीं उपलब्ध करा सके। दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल जनता के पैसे से अपना चेहरा चमकाने की कोशिश कर रहे थे। इस मामले में बार-बार सरकार से प्रश्न किया गया, लेकिन वह इस पर कोई जवाब देने से बचती रही है। उन्होंने कहा कि इसी से समझ आता है कि सत्ता में आने के सात साल बाद भी सरकार लोगों को साफ पानी तक क्यों उपलब्ध नहीं करा पाई।
 
उपराज्यपाल के आदेश पर आप का क्या कहना है?
एलजी वी के सक्सेना के निर्देश के बाद आप ने उनकी तुलना औरंगजेब से की। पार्टी ने  उनके आदेश को ‘एक और प्रेम पत्र’ बताते हुए तंज कसा। आप के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि भाजपा शासित राज्य सरकारों ने विज्ञापनों पर 22,000 करोड़ रुपये खर्च किए और पार्टी प्रमुख जेपी नड्डा को बताना चाहिए कि वे इसे सरकारी खजाने में कब लौटाएंगे।

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दिल्ली के उपराज्यपाल ने एक नया आदेश जारी किया है। इसके बाद एक बार फिर उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार आमने-सामने हैं। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली के चीफ सेक्रेटरी नरेश कुमार को 2016 की एक कमेटी के आदेश को लागू करने के लिए कहा है। यह आदेश सरकारी विज्ञापनों की सामाग्री से जुड़ा हुआ  है। 

इसी का हवाला देकर उपराज्यपाल ने आम आदमी पार्टी से 97.14 करोड़ रुपये और ब्याज वसूलने के लिए कहा है। आदेश में 15 दिनों के अंदर सरकारी खजाने में यह राशि जमा करवाने को कहा है। मामला सार्वजनिक होने पर भाजपा और कांग्रेस आप पर हमलावर है। जबकि आप ने उपराज्याल ने आदेश को गैर-कानूनी करार दिया है।

आखिर 2016 का आदेश क्या कहता है? वसूली की रकम का आधार क्या है? उपराज्यपाल के आदेश पर भाजपा का क्या कहना है? उपराज्यपाल के आदेश पर आम आदमी पार्टी का क्या कहना है? आइये जानते हैं…   



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