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वीडियोकॉन
– फोटो : Amar Ujala
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आइए जानते हैं कौन हैं वेणुगोपाल धूत ? वीडियोकॉन की कहानी क्या है? वीडियोकॉन किन क्षेत्रों में अपना व्यापार करता है? इस कंपनी के फर्श से अर्श तक सफर कैसा रहा? वेणुगोपाल धूत की इस सफर में क्या भूमिका रही? समूह और धूत के विवादों की लिस्ट कितनी लंबी है?
कौन हैं वेनुगोपाल धूत
71 वर्षीय वेणुगोपाल धूत का जन्म 30 सितंबर 1951 में हुआ था। धूत ने पुणे की कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से अपनी उच्च शिक्षा हासिल की। वह इलेक्ट्रॉनिक्स और उपकरण निर्माता बहुराष्ट्रीय कम्पनी वीडियोकॉन के वह संस्थापक अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं।
कैसे शुरू हुआ वीडयोकान का सफर?
वीडियोकॉन समूह की स्थापना 1984 में वेणुगोपाल धूत के पिता नंदलाल माधवलाल धूत ने अपने बेटों वेणुगोपाल, राजकुमार और प्रदीपकुमार धूत के साथ मिलकर की थी। इसका मुख्यालय चित्तेगांव, महाराष्ट्र में स्थित है। आज इसका कारोबार विभिन्न क्षेत्रों जैसे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज, ऑयल एंड गैस, रियल एस्टेट और रिटेल में फैला हुआ है।
1955 में ही शुरू हो गया सफर?
वीडियोकॉन की स्थापना भले 80 के दशक में हुई। लेकिन, व्यापार जगत में धूत परिवार ने 1955 में ही दस्तक दे दी थी। जब नंदलाल धूत ने गंगापुर शकर कारखाना के नाम से शुगर मिल की स्थापना की थी। इसके लिए यूरोप से मशीने भी लाई गईं थीं। हालांकि, उस दौर में देश में बिजली की पर्याप्त उपलब्धता का अभाव था। इसके चलते ये मिल सफल नहीं हो सकी।
1984 में धूत परिवार ने नए सिरे से कंपनी की शुरुआत की। समूह की आज चित्तेगाँव, भरूच और वरोरा में कई विनिर्माण इकाइयां हैं। वीडियोकॉन समूह उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों और तेल और गैस के कारोबार में सीधे और सहायक कंपनियों और संयुक्त उद्यमों के माध्यम से भी कारोबार करता है।
1985 में समूह टीवी सेट, टेप रिकॉर्डर, इलेक्ट्रॉनिक ट्यूनर, ईएचटी ट्रांसफार्मर, ऑडियो टेप डेक सिस्टम आदि का निर्माण शुरू किया। 1986 में, धूत ने वीडियोकॉन इंटरनेशनल की स्थापना की, जिसका उद्देश्य एक वर्ष में 1,00,000 टीवी सेट बनाना था। इसने जापानी ब्रांड तोशिबा के साथ तकनीकी सहयोग में प्रवेश किया और यहां से सफलता का एक बड़ा मुकाम खड़ा किया। कंपनी ने धीरे-धीरे दूसरे क्षेत्रों में भी अपना विस्तार किया और वाशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर आदि सहित अन्य उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के निर्माण के क्षेत्र में आए। 2005 में, वीडियोकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड का वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड में विलय कर दिया गया था। विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से, देशभर में कई स्थानों पर इसकी इकाइयां लगाई गईं।
जुलाई 2005 में, समूह ने इलेक्ट्रोलक्स केल्विनेटर लिमिटेड (ईकेएल), एक स्वीडिश कंपनी एबी इलेक्ट्रोलक्स की घरेलू सहायक कंपनी में नियंत्रण हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया। ईकेएल की महाराष्ट्र में वरोरा और बुटीबोरी में क्रमशः मध्य प्रदेश में उत्पादन इकाइयां थीं। विलय के बाद, वीडियोकॉन ने ईकेएल की विनिर्माण इकाइयों का अधिग्रहण किया और भारत में अपने ब्रांडों का उपयोग करने का लाइसेंस भी प्राप्त किया।
ईकेएल को बाद में जुलाई 2006 में वीआईएल में विलय कर दिया गया। इसके अलावा, वीडियोकॉन ने सितंबर 2005 में थॉमसन एसए, फ्रांस के विश्वव्यापी रंगीन पिक्चर ट्यूब (सीपीटी) व्यवसाय को अपनी विदेशी सहायक कंपनी / इकाई के माध्यम से अधिग्रहण करके एक प्रमुख विदेशी अधिग्रहण किया। इस प्रकार अधिग्रहण से वीडियोकॉन ने इटली, चीन (2), पोलैंड और मैक्सिको में स्थित पांच अंतरराष्ट्रीय विनिर्माण इकाइयों और चीन और इटली में थॉमसन एसए के अनुसंधान एवं विकास केंद्रों के साथ विदेशों में अपना करोबार स्थापित कर लिया। वर्तमान में वीडियोकॉन की अपनी सहायक कंपनियों के माध्यम से 8 विदेशी तेल और गैस ब्लॉकों में हिस्सेदारी है, जिनमें से 7 ब्राजील में और एक इंडोनेशिया में है।
टेलीकॉम सेक्टर से शुरू हुई असफलता की नई कहानी
धूत का पतन तब शुरू हुआ जब उन्होंने वीडियोकॉन टेलीकॉम के साथ सेलुलर सेवा क्षेत्र में प्रवेश किया। कंपनी अपने पास मौजूद 18 सर्किल में से केवल 11 में ही व्यावसायिक सेवाएं शुरू कर सकी। 2012 में 2जी स्पेक्ट्रम मामले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2008 में केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए 122 लाइसेंस रद्द कर दिए जिसमें से 21 लाइसेंस वीडियोकॉन के थे।
2012 की स्पेक्ट्रम नीलामी में, वीडियोकॉन ने 6 सर्किल में लाइसेंस वापस हासिल किए, लेकिन एयरटेल को बेच दिया और काम करना बंद कर दिया। फोर्ब्स पत्रिका के अनुसार, 2015 में उनकी संपत्ति 1.19 बिलियन डॉलर थी, और वह भारत के 61वें सबसे अमीर शख्स थे। हालांकि, इसी समय वीडियोकॉन उपभोक्ता वस्तुओं की मांग में कमी से प्रभावित हुआ। जनवरी 2015 में धूत ने वीडियोकॉन डी2एच का एक तिहाई, एक डायरेक्ट-टू-होम टीवी सेवा, यू.एस. स्थित सिल्वर ईगल एक्विजिशन कॉर्प को बेच दिया।
कर्ज और असफलता की कहानी
एक वक्त सफलता की सीढ़ी चढ़े वीडियोकॉन का विवादों से भी कम नाता नहीं रहा है। जैसे ही इसका सोनी, एलजी और सैमसंग जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से सामना करना पड़ा, इसका राजस्व स्थिर हो गया और धीरे-धीरे यह कर्ज में दबने लगा। स्थिति यहां तक आ पहुंची की धूत ने अपनी कुछ संपत्तियों को बेचकर कर्ज चुकाने की कोशिश की। कंपनी ने अपने डीटीएच कारोबार का विलय डिश टीवी के साथ कर दिया। उन्होंने अपने कुछ गैस फील्ड और टेलीकॉम बिजनेस में मालिकाना हक बेच दिया, लेकिन यह काम नहीं आया। 2018 में, इसे इसके लेनदार द्वारा नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में घसीटा गया। इस पर बैंकों का ब्याज सहित करीब 31,000 करोड़ रुपये बकाया है।
जून 2021 में, अरबपति अनिल अग्रवाल की ट्विन स्टार टेक्नोलॉजीज से वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज को लेने के लिए मात्र 2,692 करोड़ रुपये की बोली को एनसीएलटी द्वारा अनुमोदित किया गया था। बाद में यह भी विवाद में आ गया।
इस साल की शुरुआत में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने ट्विन स्टार की 2,692 करोड़ रुपये की बोली को रद्द कर दिया था और नई बोली आमंत्रित करने का निर्देश दिया था। हालांकि इसे ट्विन स्टार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के लेनदार अभी भी खरीदार की तलाश कर रहे हैं।
कहानी धूत की गिरफ्तारी की
जिस मामले में शुक्रवार को समूह के संस्थापक की गिरफ्तारी हुई है वो मामला इसको मिले ऋण से जुड़ा है। आरोपों के मुताबिक ICICI बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर ने बैंक के नियमों का उल्लंघन करते हुए वीडियोकॉन समूह को 3,250 करोड़ रुपये ऋण दिया था। धूत ने 2012 में आईसीआईसीआई बैंक से वीडियोकॉन समूह को ऋण मिलने के बाद कथित तौर पर न्यूपॉवर रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड (NRPL) में करोड़ों रुपये का निवेश किया। इस फर्म को धूत ने ICICI से ऋण मिलने के छह माह बाद चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और दो रिश्तेदारों के साथ मिलकर शुरू किया था। एक गुमनाम मुखबिर की एक शिकायत के बाद मामले का खुलासा हुआ। जनवरी 2019 को केंद्रीय जांच ब्यूरो सीबीआई ने वेणुगोपाल धूत, चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर पर आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया। फरवरी 2019 में ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था। अंततः धूत को सोमवार सुबह एजेंसी द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।
विस्तार
सीबीआई ने आईसीआईसीआई बैंक लोन केस में वीडियोकॉन के संस्थापक वेणुगोपाल धूत को गिरफ्तार किया है। धूत, आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ और एमडी चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर 28 दिसंबर तक सीबीआई हिरासत में भेजे गए हैं। वेणुगोपाल धूत की गिरफ्तारी के बाद वीडियोकॉन समूह फिर से चर्चा में है।
आइए जानते हैं कौन हैं वेणुगोपाल धूत ? वीडियोकॉन की कहानी क्या है? वीडियोकॉन किन क्षेत्रों में अपना व्यापार करता है? इस कंपनी के फर्श से अर्श तक सफर कैसा रहा? वेणुगोपाल धूत की इस सफर में क्या भूमिका रही? समूह और धूत के विवादों की लिस्ट कितनी लंबी है?
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