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सांकेतिक तस्वीर।
– फोटो : ANI
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी ‘एनआईए’ ने वर्ष 2022 में जिहादी आतंकवाद पर करारी चोट की है। पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार एनआईए ने आतंक से जुड़े सर्वाधिक मामलों की जांच की है। 2022 में एनआईए ने 73 केस दर्ज किए हैं। इससे पहले के वर्षों में यह आंकड़ा 61 से कम रहा है। खास बात है कि इस बार जो 73 केस दर्ज किए गए हैं, उनके अंतर्गत जांच एजेंसी ने जिहादी टेरर से जुड़े मामलों में अपना दमखम दिखाया है। इस वर्ष विभिन्न मामलों में 368 आरोपियों के खिलाफ 59 चार्जशीट दायर की गई हैं। इन केसों में दोषसिद्धि की दर 94.39 फीसदी रही है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पिछले साल 61 केस दर्ज किए थे। इस साल मामले दर्ज करने में 19.67 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। एनआईए द्वारा दर्ज किए गए 73 केसों में से 35 मामले जिहादी टेरर को लेकर दर्ज हुए हैं। जिन राज्यों में जिहादी टेरर के केस दर्ज हुए हैं, उनमें जम्मू कश्मीर, असम, बिहार, दिल्ली, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
जम्मू कश्मीर में 11 केस दर्ज हुए हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 10 केस, उत्तर पूर्व में पांच केस, पीएफआई से जुड़े मामलों में 7 केस दर्ज किए गए हैं। पंजाब में चार केस दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा गैंगस्टर, टेरर व स्मगलर नेक्सस को लेकर तीन केस दर्ज हुए हैं। एक केस टेटर फंडिंग और दो मामले नकली भारतीय मुद्रा नोट ‘एफआईसीएन’ के दर्ज किए गए हैं।
एनआईए ने इस वर्ष 456 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें 19 भगौड़े भी शामिल हैं। दो आरोपियों को डिपोर्ट किया गया है। एक आरोपी का प्रत्यर्पण कराया गया है। इस साल 38 मामलों में अदालत का फैसला आया है। सभी में दोषसिद्धि हुई है। 109 लोगों को कठोर सजा सुनाई गई है। इन पर जुर्माना भी लगा है। छह लोगों को आजीवन कारावास की सजा मिली है। आठ लोगों को यूएपीए के तहत व्यक्ति तौर पर आतंकवादी घोषित किया गया है।
एनआईए ने नवंबर में सफलतापूर्वक ‘नो मनी फॉर टेरर’ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (काउंटर-टेररिज्म फाइनेंसिंग) आयोजित किया है। इसमें 78 देशों और 16 बहुराष्ट्रीय संगठनों ने हिस्सा लिया था। आने वाले समय में भारत, वैश्विक स्तर आतंकवाद को खत्म करने में अहम भूमिका निभाएगा।
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