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Bharat Jodo Yatra: राहुल गांधी-भारत जोड़ो यात्रा
– फोटो : अमर उजाला
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राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) मंगलवार को उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर चुकी है। यात्रा के तीन दिन (3-5 जनवरी) पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रखने की योजना बनाई गई है। इससे साफ हो गया है कि पार्टी यूपी में अपनी दोबारा मजबूती का रास्ता पश्चिमी द्वार से ही तय करना चाहती है। राहुल गांधी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चार समीकरणों पर एक साथ काम करते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। इसमें किसान, जाट, दलित और मुसलमान शामिल हैं। राहुल ने जिस तरह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों से मुलाकात की है, और उन्हें जिस तरह समाज के विभिन्न वर्गों से साथ मिल रहा है, पार्टी का यह तरीका कारगर भी साबित हो सकता है।
किसान सबसे बड़ा वोटर
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान सबसे बड़ा मतदाता वर्ग है। यहां हर जाति-धर्म के लोग किसानी के पेशे से जुड़े हुए हैं। गन्ना और गेहूं को यहां के किसानों की रीढ़ माना जाता है। यही उनकी आय का प्रमुख जरिया है। लेकिन तमाम वादों के बाद भी अब तक गन्ना किसानों की फसल का मूल्य समय पर नहीं मिल पाता। इसके लिए उन्हें आठ से दस महीने तक का इंतजार करना पड़ता है। किसानी की लागत में लगातार वृद्धि हो रही है, जबकि किसानों की आय बढ़ाने का कोई रास्ता अब तक कारगर नहीं हुआ है।
यही कारण है कि इस क्षेत्र में किसानों से जुड़ा मुद्दा लोगों को आकर्षित करता है। राहुल गांधी को प्रमुख किसान नेता राकेश टिकैत का भी समर्थन हासिल हो गया है। संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में हुए सफल किसान आंदोलन के बाद राकेश टिकैत बहुत ताकतवर हो चुके हैं। उनके समर्थन से कांग्रेस इस क्षेत्र में मजबूत हो सकती है।
हार-जीत में प्रमुख भूमिका निभाते हैं जाट
पश्चिमी यूपी में जाट काफी प्रभावशाली राजनीतिक ताकत हैं। वे इस क्षेत्र में किसी भी राजनीतिक दल की हार-जीत में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। यह मतदाता वर्ग भी पहले कांग्रेस के साथ जुड़ा रहता था, लेकिन चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक ताकत बढ़ने के बाद जाट अस्मिता के नाम पर यह वर्ग पूरी तरह आरएलडी के साथ आ गया। इस बेल्ट में हुए सांप्रदायिक दंगों ने जाटों को आरएलडी से तोड़कर भाजपा की झोली में डाल दिया। लेकिन यूपी विधानसभा चुनाव 2022 से ही जाटों में एक बदलाव की सुगबुगाहट देखी जा रही है।
आरएलडी नेता जयंत चौधरी ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का स्वागत किया है और बुधवार को यात्रा में आरएलडी कार्यकर्ता अपनी पार्टी का झंडा-बैनर-पोस्टर लहराते हुए राहुल गांधी का समर्थन करते देखे गए। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी राहुल गांधी की यात्रा को अपनी शुभकामनाएं दी हैं। ये इस क्षेत्र की एक नई राजनीतिक तस्वीर है जो कई सियासी समीकरणों में उलटफेर कर सकती है।
दलित और मुसलमान
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित और मुसलमान मतदाता अपने दम पर किसी पार्टी की जीत-हार तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। आगरा से लेकर सहारनपुर, बिजनौर, शामली, बागपत, बड़ौत, गाजियाबाद और नोएडा के एरिया में ये वर्ग काफी प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं। राहुल गांधी की यात्रा में मुसलमानों की भागीदारी बड़े स्तर पर देखी जा रही है। पार्टी ने रणनीतिक चतुराई दिखाते हुए सलमान खुर्शीद जैसे अपने मुस्लिम चेहरों को यात्रा में आगे रखा है। इससे पार्टी को मुसलमान मतदाताओं के बीच लोकप्रिय बनाने में मदद मिलेगी।
इसी तरह भारत जोड़ो यात्रा में जगह-जगह पर दलित समुदाय के युवा काफी अधिक संख्या में भागीदारी करते हुए देखे जा रहे हैं। गाजियाबाद के लोनी में दलित समुदाय के युवाओं ने अपने हाथों में बाबा साहब आंबेडकर और कांशीराम के बैनर-पोस्टर लहराए और यात्रा के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। इससे साफ होता है कि दलित युवाओं में भी कांग्रेस के लिए आकर्षण बढ़ रहा है।
पश्चिमी यूपी में भी अग्निवीर योजना पर आक्रोश
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानी के बाद सेना, अर्धसैनिक बलों और पुलिस सेवा में नौकरी को रोजगार के बड़े माध्यम के रूप में देखा जाता है। लेकिन अग्निवीर योजना के जरिए जिस तरह सेना की नौकरी को केवल चार सालों तक के लिए सीमित कर दिया गया है, इससे इस क्षेत्र के युवाओं के सपनों को करारा झटका लगा है। राहुल गांधी से युवाओं ने मिलकर अग्निवीर योजना पर अपनी आपत्तियों को साझा किया है। यदि कांग्रेस इस मुद्दे को मजबूती से उठा सकी तो उसे हिमाचल प्रदेश की तरह इसका लाभ यहां भी मिल सकता है।
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