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Aditya Thackeray bharat jodo Yatra
– फोटो : Agency (File Photo)
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राहुल गांधी ने जब कन्याकुमारी से भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) की शुरुआत की थी, तब पहले ही दिन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके पार्टी के अध्यक्ष एमके स्टालिन उनके साथ नजर आए। उन्होंने राहुल गांधी को यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं और तिरंगा सौंपकर उनकी यात्रा के बड़े उद्देश्य को प्रतिबिंबित भी किया। इसके बाद से अब तक शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे और प्रियंका चतुर्वेदी, एनसीपी नेता सुप्रिया सुले, डीएमके नेता कनीमोझी और नेशनल कांफ्रेंस नेता फारुक अब्दुल्ला भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी के साथ खड़े दिखाई पड़े हैं।
लेकिन उत्तर भारत के राजनीतिक दलों ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से अब तक दूरी बनाए रखी है। समाजवादी पार्टी, बसपा, आरएलडी, आम आदमी पार्टी (AAP) और बिहार में बेहद प्रभावशाली जदयू ने यात्रा को नैतिक समर्थन तो दिया है, लेकिन उनके किसी नेता को अब तक यात्रा में राहुल गांधी के साथ खड़े नहीं देखा गया। इसका कारण क्या है? क्या केवल राहुल के साथ खड़े होने से इन राजनीतिक दलों को अपनी राजनीतिक जमीन कांग्रेस के हाथों गंवाने का डर है?
राहुल को नेता स्वीकार करने से बचना चाह रहे राजनीतिक दल
राजनीतिक विश्लेषक संजय कुमार ने अमर उजाला से कहा कि कांग्रेस आज की तारीख में उत्तर प्रदेश या बिहार में इतनी मजबूत नहीं है कि वह एक झटके में समाजवादी पार्टी या बहुजन समाज पार्टी का आधार छीन सके। लिहाजा यह नहीं कहा जा सकता कि इन राजनीतिक दलों ने केवल वोट बैंक खिसकने के डर से यात्रा से दूरी बनाए रखी है।
इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा का असली उद्देश्य 2024 में पार्टी की बेहतर पोजिशनिंग के लिए है। इसके जरिए कांग्रेस राहुल गांधी की छवि मजबूत करना चाहती है। लेकिन विपक्ष के कई नेता स्वयं विपक्षी खेमे का नेतृत्व करना चाहते हैं, वे राहुल के साथ खड़े होकर अभी से उन्हें विपक्ष के सर्वमान्य नेता के तौर पर अपनी स्वीकृति नहीं देना चाहते। यही कारण है कि इन नेताओं ने भारत जोड़ो यात्रा को अपना नैतिक समर्थन तो दिया है, लेकिन वे राहुल के साथ खड़े होने से बच रहे हैं।
शिवसेना, एनसीपी, नेशनल कांफ्रेंस और डीएमके जैसी पार्टियां और इसके नेता स्वयं विपक्ष के नेतृत्वकर्ता की भूमिका में अपने आपको नहीं देख रही हैं, यही कारण है कि वे खुलकर राहुल गांधी के साथ खड़ी हो रही हैं। इनमें से कई दल पहले ही कांग्रेस के साथ गठबंधन सरकार चला चुके हैं, लिहाजा उनके कांग्रेस के साथ आने में कोई परेशानी भी नहीं है।
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