Home Breaking News Joshimath: तबाही की दरारें देख दंग रह गई विशेषज्ञों की टीम, डरा रहीं फर्श के नीचे से आ रही पानी बहने की आवाजें

Joshimath: तबाही की दरारें देख दंग रह गई विशेषज्ञों की टीम, डरा रहीं फर्श के नीचे से आ रही पानी बहने की आवाजें

0
Joshimath: तबाही की दरारें देख दंग रह गई विशेषज्ञों की टीम, डरा रहीं फर्श के नीचे से आ रही पानी बहने की आवाजें

[ad_1]

जोशीमठ में तबाही का मंजर देख विशेषज्ञों की टीम भी हैरान रह गई। शहर के बेतरह धंसने और दर्जनों घरों और इमारतों की दीवारों, दरवाजों, फर्श, सड़कों पर आईं दरारों का कारण पता लगाने में पहले दिन टीम को नाकामी हासिल हुई।

Joshimath Sinking: वैज्ञानिकों ने बताई जोशीमठ में भू-धंसाव की वजह…2006 में ही कर दिया था अलर्ट

टीम ने देखा कि जोशीमठ के तमाम हिस्सों से सतह के नीचे पानी का बेतरतीब ढंग से रिसाव हो रहा है। इसका कोई एक सिरा नहीं है। जोशीमठवासियों को रात में घरों के फर्श के नीचे पानी बहने की आवाजें आ रही हैं। वे बुरी तरह डरे हुए हैं। टीम के सदस्य दिनभर शहर में हो रहे सुराखों की पड़ताल करते रहे, लेकिन उन्हें कोई सुराग नहीं मिला कि आखिर जमीन के नीचे ये पानी आ कहां से रहा है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि इस भू-धंसाव के लिए एनटीपीसी की टनल जिम्मेदार है। टीम ने एनटीपीसी के तपोवन-विष्णुगाड़ बिजली प्रोजेक्ट की टनल का भी मुआयना किया, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। देर शाम टीम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को दिन भर का ब्योरा दिया।

हाल यह है कि शहर में कहीं होटलों के पुश्ते टूटने से वह हवा में लटक रहे हैं तो कहीं मकानों को कभी भी जमींदोज करने वालीं दरारें आ गई हैं। कई जगह मटमैले पानी का सोता सड़क पर लगातार बह रहा है। जेपी कालोनी का बैडमिंटन कोर्ट तो पूरी तरह से तबाह हो गया। यही से जमीन के भीतर एक पानी का सोता लगातार तेज रफ्तार से बह रहा है। यानी जोशीमठ में पहाड़ी जमीन के अंदर कई जगहों पर रिसाव है। विशेषज्ञ हर जगह लोगों से बातचीत कर हालात समझने की कोशिश करते नजर आए।

शुक्रवार को सुबह से ही सचिव आपदा प्रबंधन डॉ.रंजीत सिन्हा और गढ़वाल मंडलायुक्त सुशील कुमार की अगुवाई में विशेषज्ञों की टीम ने जोशीमठ की तबाही का निरीक्षण शुरू किया। शुरुआत जोशीमठ के ऊपरी हिस्से मनोहरबाग से की गई। यहां भू-धंसाव का सर्वाधिक असर दिखा। टीम जैसे ही लोगों के घरों में पहुंची तो फर्श में पड़ीं बड़ी-बड़ी दरारें देखकर हैरान रह गई। दर्जनों लोग टीम को अपने घर की दरकी दीवारें दिखाना चाहते थे। सब गुस्से में थे। टीम इसी दिशा में नीचे की तरफ उतरी तो जेपी कॉलोनी स्थित होटल अलकनंदा का पुश्ता ढहने से उसका आगे का हिस्सा हवा में लटका हुआ मिला।

टीम में आईआईटी रुड़की, वाडिया इंस्टीट्यूट, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी के साथ ही सरकार के नुमाइंदे भी शामिल हैं। सभी ने अपने-अपने एंगल से जोशीमठ भू-धंसाव को देखा और कई जगह से सैंपल भी लिए। गढ़वाल आयुक्त सुशील कुमार ने अमर उजाला से कहा कि पूरी टीम मिलकर इस समस्या पर अध्ययन कर रही है। इस टीम में भूस्खलन, हाइड्रोलॉजी, हिमालयन जियोलॉजी, आपदा प्रबंधन, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के जाने माने विशेषज्ञ शामिल हैं। इसलिए निष्कर्ष पर एकदम पहुंचना बहुत कठिन है। यह एक साइंटिफिक स्टडी है, जिस पर हम काम कर रहे हैं। इस रिसाव का कारण क्या हैं, यह तत्काल कहना कठिन होगा।

विशेषज्ञों की टीम ने देर शाम एनटीपीसी की तपोवन-विष्णुगाड़ परियोजना की टनल का भी निरीक्षण किया। इसके अलावा जेपी की आवासीय कॉलोनी में भी टीम पहुंची। यहां लोगों से बातचीत के साथ ही दरारों का अध्ययन किया गया।



[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here