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हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस में कई ऐसे म्यूटेशन देखे हैं जो इसकी प्रकृति को काफी संक्रामक बनाती है। नए XBB.1.5 वैरिएंट से संक्रमितों में गंभीर रोग का भी खतरा देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस तरह के जोखिमों से सीख लेते हुए अन्य देशों को विशेष सावधानी और सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता है।
भारत में कोरोना संक्रमण के मामले
आइए इन वैरिएंट्स की प्रकृति और संक्रामकता के बारे में आगे समझते हैं।
अमेरिका में इन दिनों बढ़े संक्रमण के लगभग 80 फीसदी मामलों के लिए ओमिक्रॉन के नए सब-वैरिएंट XBB.1.5 को प्रमुख माना जा रहा है। भारत में भी इसके संक्रमितों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। इंडियन सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (आईएनएसएसीओजी) के अनुसार भारत में अब इस वैरिएंट से संक्रमितों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। दिसंबर में पहली बार गुजरात में इसके संक्रमित की पुष्टि हुई थी।
जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में वायरोलॉजिस्ट एंड्रयू पेकोज बताते हैं XBB.1.5 अपने फैमिली के अन्य के सदस्यों से अलग है क्योंकि इसमें एक अतिरिक्त म्यूटेशन देखा जा रहा है जो इसे कोशिकाओं से बेहतर ढंग से बाइंड करने में मददगार बनाता है। इसकी संक्रामकता दर काफी अधिक देखी जा रही है।
चीन में मची कोरोना की तबाही के लिए विशेषज्ञ ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट BF.7 को प्रमुख कारक मान रहे हैं। भारत में भी इसके मामले बढ़ते देखे गए हैं। हाल ही में पश्चिम बंगाल में ओमिक्रॉन के इस सब-वैरिएंट के चार नए मामले सामने आए हैं। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि BF.7, ओमिक्रॉन के BA.5.2.1.7 सब-वैरिएंट का ही एक म्यूटेटेड रूप है, हालांकि इसके कुछ म्यूटेशन संक्रामकता और गंभीरता को बढ़ाने वाले देखे जा रहे हैं।
BF.7 के रिप्रोडेक्शन रेट (R0) को लेकर विशेषज्ञ चिंता जताते रहे हैं। डेल्टा वैरिएंट के मामले में रिप्रोडेक्शन रेट जहां 5-6 के बीच देखा जा रहा था, वहीं BF.7 के मामले में यह बढ़कर 10-18 के करीब हो गया है। यानी एक संक्रमित व्यक्ति औसतन 10 से 18 अन्य लोगों को वायरस प्रसारित कर सकता है।
ओमिक्रॉन के XBB वैरिएंट को सबसे पहले भारत में देखा गया था, इन दिनों में भी देश के कुछ राज्यों में इससे संक्रमितों के मामले दर्ज किए जा रहे हैं। अध्यनकर्ताओं ने इसे अति-संक्रामक वैरिएंट के रूप में बताया है। यह BA.2.75 और BA.2.10.1 के पुनः संयोजन से उत्पन्न वैरिएंट है। इसकी संक्रामकता दर और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में गंभीर रोग के जोखिमों को लेकर विशेषज्ञ अलर्ट करते हैं।
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