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नई दिल्ली. सूर्यकुमार यादव के फैंस ने इन दिनों सोशल मीडिया पर हल्ला बोल रखा है. अपने इस चहेते खिलाड़ी को भारतीय टीम की प्लेइंग इलेवन में जगह दिलाने के लिए फैंस हर कुछ करने को तैयार हैं. सूर्या के फैंस हर वो दलील दे रहे हैं, जो उन्हें समझ में आ रही है. इनमें से कई दलील क्रिकेट के सभी पैमानों पर फिट हैं और उन्हें काट पाना असंभव सा है. लेकिन अफसोस की बात है कि कुछ कथित फैंस इस दलील में जाति और समाज का समीकरण भी फिट करने को आमादा हैं. छोटा ही सही, पर सोशल मीडिया में एक वर्ग ऐसा भी है जो यह साबित करने में जुटा है कि सूर्या को प्लेइंग इलेवन में मौका नहीं मिलने का एक कारण उनका सरनेम भी है.
खिलाड़ियों के नाम के पीछे सरनेम ढूंढ़ने वाले इस वर्ग की अपनी दलीलें हो सकती हैं. लेकिन भारतीय क्रिकेट के शुरुआती कुछेक साल को छोड़ दें तो टीम सेलेक्शन में खेल के इतर किसी और बात को शायद ही तरजीह दी गई. हां, एक वक्त था, जब बीसीसीआई में राजे-रजवाड़ों की खूब चलती थी. वही टीम के स्पॉन्सर हुआ करते थे. तब जरूर एक-दो मौकों पर किसी डिजर्विंग खिलाड़ी को मौका नहीं मिला. लेकिन पिछले 60-70 साल में ऐसा कोई वाकया याद नहीं आता कि किसी खिलाड़ी का चयन जाति या धर्म के आधार पर हुआ हो.
सूर्या को टीम में न लेने की वजह क्या है
यह गजब का इत्तफाक है कि जब खुद को क्रिकेटफैंस मानने-बताने वाले कुछ लोग सूर्यकुमार यादव की जाति हाईलाइट कर रहे हैं, तब टीम इंडिया का पेसअटैक मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज और उमरान मलिक के हाथ में है. यह इस खेल की खूबसूरती है. इस देश की खूबसूरती है. यहां किसी नेशनल टीम का सेलेक्शन जाति और धर्म के आधार पर नहीं होता. रही बात क्रिकेटिंग समझ की तो कहती है कि किसी भी प्लेइंग इलेवन में विकेटकीपर समेत 5 स्पेशलिस्ट बैटर ही हो सकते हैं. बाकी छह जगह ऑलराउंडर और बॉलर के लिए रिजर्व होनी चाहिए.
सूर्या ठहरे स्पेशलिस्ट बैटर. यानी विकेटकीपर बैटर वाली जगह भी हाथ से गई. फिर बचते हैं बैटर्स के 4 स्पॉट. इनमें से 3 पर कप्तान रोहित शर्मा, विराट कोहली और श्रेयस अय्यर का दावा सूर्या के मुकाबले कहीं मजबूत है. यानी कुल मिलाकर एक जगह है, जिस पर सूर्य कुमार यादव फिट हो सकते हैं. तो क्या जगह होने के बावजूद कप्तान रोहित शर्मा और कोच राहुल द्रविड़ 360 डिग्री सूर्या को मौका नहीं दे रहे हैं?
पहली नजर में यह कहना कि कप्तान रोहित शर्मा और कोच राहुल द्रविड़ अपने स्टार बैटर सूर्या को मौका नहीं दे रहे हैं, सिर्फ नासमझी है. आखिर कौन कप्तान चाहेगा कि जो बैटर फॉर्म में है, वह उसकी टीम ना हो. लेकिन कहते हैं ना कि कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, यूं ही कोई बेवफा नहीं होता!
सूर्या, रैना, युवराज, मिस्बाह, हसी…, लिस्ट लंबी
दरअसल, क्रिकेट जानने वाले लोगों को यह बात बखूबी पता है कि टीम कॉम्बिनेशन वह चीज है, जो किसी टीम की कामयाबी तय करती है. और कई बार कॉम्बिनेशन में फिट नहीं होने पर खिलाड़ी को बाहर बैठना पड़ता है. वर्ल्ड कप 2011 की जीत के हमारे सबसे बड़े हीरो युवराज सिंह के करियर को जरा याद करिए. जब यह खिलाड़ी अपनी सुप्रीम फॉर्म में था, तब उन्हें टेस्ट मैच खेलने का पर्याप्त मौके ही नहीं मिले. एक बार तो उन्हें शतक बनाने के बाद भी ड्रॉप कर दिया गया. सुरेश रैना के साथ भी ऐसा हुआ. माइकल हसी, मिस्बाह उल हक जैसे बेहतरीन क्रिकेटरों की लंबी लिस्ट है, जिन्हें अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा.
सूर्य कुमार यादव का इंतजार भी लंबा हो चला है. लेकिन यकीन मानिए आम क्रिकेटप्रेमी से ज्यादा टीम मैनेजमेंट इस बात के लिए परेशान होगा कि सूर्या को प्लेइंग इलेवन में कैसे फिट किया जाए. वह कोई रास्ता जरूर निकालेगा. लेकिन तब तक सूर्या के फैंस को भी इंतजार करना चाहिए. और कम से कम टीम सेलेक्शन में जाति-धर्म घुसाकर खेल का माहौल खराब नहीं करना चाहिए.
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Tags: India Vs Sri lanka, Mohammed Shami, Mohammed siraj, Suryakumar Yadav, Team india, Umran Malik
FIRST PUBLISHED : January 12, 2023, 13:13 IST
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