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Himachal: विशेष बातचीत में सुखविंद्र सिंह सुक्खू बोले- मैं भी कांगड़ा से हूं, अभी एक मंत्री मिला और भी मिलेंगे

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Himachal: विशेष बातचीत में सुखविंद्र सिंह सुक्खू बोले- मैं भी कांगड़ा से हूं, अभी एक मंत्री मिला और भी मिलेंगे

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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंत्रिमंडल विस्तार में कांगड़ा जिले की अनदेखी का मुद्दा गरमाने पर स्थिति स्पष्ट की है कि वह खुद कांगड़ा से हैं। अभी कांगड़ा को एक ही मंत्री मिला है, आगे और भी मिलेंगे। सुक्खू ने कहा कि नादौन पहले कांगड़ा का ही हिस्सा रहा है। असल बात यह है कि विकास होना चाहिए। पिछली सरकार में नौ मंत्री चुनाव हार गए थे, क्या भाजपा ने कांगड़ा को तरजीह दी थी। मंत्रिमंडल में सबको उचित स्थान मिला है। अमर उजाला ने नई सरकार का एक महीने का कार्यकाल पूरा होने पर मुख्यमंत्री से विशेष बातचीत की। मुख्यमंत्री सुक्खू और उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने 11 दिसंबर को शपथ ली थी। सुक्खू ने कहा कि कांगड़ा से दो सीपीएस बने हैं, एक मंत्री भी बना है। आने वाले समय में कांगड़ा को और भी मंत्री मिलेंगे। कांगड़ा का विकास जब नजर आएगा तो लोग कहेंगे कि ठीक है। जो लोग इस मुद्दे को उठा रहे हैं, वे राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं।  

 सीएम से जब पूछा गया कि ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) के लिए राजस्थान का मॉडल लागू कर रहे हैं कि छत्तीसगढ़ का या फिर कोई और प्लान है? इस पर उन्होेंने बताया कि शुक्रवार को होने जा रही कैबिनेट बैठक में ही स्पष्ट करेंगे। ओपीएस में अधिकारी कई अड़चनों की बात कर रहे थे। यह सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा और स्वाभिमान का मामला है। मॉडल पर चर्चा होगी, जो बेहतर होगा, उसे लागू करेंगे। ओपीएस के लिए पैसा कहां से आ रहा है? इस पर सुक्खू बोले कि भाजपा ने चुनावी लाभ लेने के लिए जो वैट सात रुपये कम किया था, उसमें से तीन रुपये बढ़ाया है और इससे फंड आएगा। कर्मचारियों के एनपीएस के तहत जमा आठ हजार करोड़ रुपये केंद्र से वापस लाने की भी लड़ाई लड़ेंगे। 

हमने एक माह में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए : सुक्खू 

अपने एक महीने के कार्यकाल को कैसे देखते हैं? इस पर सुक्खू बोल, हमने एक माह में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। जो लोग हिमाचल सदन और हिमाचल भवन जाते हैं, तो वे वहां ठहरने के 1000 रुपये देते थे और विधायक 300 रुपये देते थे, इसे आम आदमी के बराबर किया। असहाय बच्चों और लोगों के लिए सुखाश्रय योजना शुरू की। पुलिस भर्ती की तरह पेपर लीक हो रहे थे। अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड को निलंबित किया गया। इसे सस्पेंड करने के कई दबाव थे। फिर भी युवाओं के हित में निर्णय लिए गए हैं। चुनावी लाभ लेने के लिए पिछली सरकार ने 900 शिक्षण संस्थान खोले। कई डिनोटिफाई किए और इनकी समीक्षा हो रही है।

आप बताइए कि क्या वाटर कैरियर के सहारे कोई स्कूल चल सकता है। चपरासी के सहारे कोई कॉलेज चल सकता है। वार्ड बॉय के सहारे कोई सीएचसी चल सकता है। कोई बजट नहीं, वित्त विभाग से कोई मंजूरी नहीं। अगर एक्सईएन कार्यालय हमीरपुर है तो वहां से दो अधिकारी उठाकर दूसरे एक्सईएन कार्यालय भेज दिए। इससे जो खोला, वह भी कमजोर हो गया। इसके लिए 5000 करोड़ चाहिए थे। यह फैसला विधायक दल से चर्चा के बाद लिया। उनके साथ उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री शपथ ले चुके थे। अभी तो कैबिनेट विस्तार हुआ है। विपक्ष का यह कहना गलत है कि कैबिनेट से मंजूरी नहीं ली। 

सुक्खू ने धर्माणी को मंत्री बनाने के संकेत दिए  

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि वह तो चाहेंगे कि बिलासपुर जिला को जल्दी से जल्दी मंत्रिमंडल में जगह मिले। पीटरहॉफ में घुमारवीं के एक प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राजेश धर्माणी सालों से उनके साथ हैं। जब अन्य वरिष्ठ लोग मंत्री बने हैं तो वह भी क्यों नहीं बनेंगे। इस बारे में कई तरह के शक-शुबहे हो रहे हैं। उन्होंने खुद संज्ञान लिया है। यह मालूम रहे कि धर्माणी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के जिले से ताल्लुक रखते हैं।



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