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जासूसी कहानियों पर दुनिया भर में फिल्में बनती रही हैं। ऐसी कहानियों को लेकर सिनेमा में शुरू से ही एक अलग क्रेज रहा रहा है। फिल्मी पर्दे के जासूस पहले देश के अंदर दुश्मनों के नापाक इरादों का पर्दाफाश करते आए हैं। अब हमारे जासूस पड़ोसी देशों के नापाक इरादों का पर्दाफाश कर रहे हैं। इस महीने रिलीज होने जा रही सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म ‘मिशन मजनू’ और शाहरुख खान की फिल्म ‘पठान’ ऐसे ही जासूसों की कहानियां हैं जो भारत के खिलाफ पनपने वाले नापाक इरादों को नेस्तनाबूद करते हैं। हिंदी सिनेमा के सितारों में भी जासूस बनने का क्रेज शुरू से रहा है तो चलिए बताते हैं आपको इन जासूसी कहानियों के बारे में बिल्कुल शुरू से..
देव आनंद: सीआईडी (1956)
बतौर अभिनेता गुरु दत्त ने कई फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाई हैं तो उन्होंने दूसरे कलाकारों को भी लेकर फिल्मों का निर्माण किया है। गुरु दत्त ने फिल्म ‘सीआईडी’ का निर्माण देव आनंद को लेकर किया था और इस फिल्म के निर्देशक राज खोसला थे। इस फिल्म में देव आनंद ने सीआईडी ऑफिसर शेखर का किरदार निभाया था, जो एक हत्या के मामले की जांच करता है। इस फिल्म में देव आनंद के अलावा शकीला और वहीदा रहमान की मुख्य भूमिका थी। यह फिल्म 2 नवंबर 1956 को रिलीज हुई थी।
धर्मेंद्र: आंखे (1968)
रामानंद सागर की फिल्म ‘आंखे’ में धर्मेंद्र ने एक देशभक्त जासूस की भूमिका निभाई थी। यह फिल्म देश के खिलाफ साजिश रचने वाले आतंकी-अपराधी गिरोह का पर्दाफाश करती है। इस फिल्म में धर्मेंद्र के अलावा माला सिन्हा, महमूद, कुमकुम और सुजीत कुमार की मुख्य भूमिकाएं थी। गीत साहिर लुधियानवी ने लिखे थे और संगीत रवि ने दिया था। इस फिल्म के सभी गाने हिट थे, खास करके ‘मिलती है जिंदगी में …।’ इस फिल्म के लिए रामानंद सागर को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। यह फिल्म 1 जनवरी 1968 को रिलीज हुई थी।
जितेंद्र: फर्ज (1967)
रविकांत नगाइच के निर्देशन में बनी फिल्म ‘फर्ज’ में जितेंद्र ने सीक्रेट एजेंट का किरदार निभाया था, जो अपने एक एजेंट मित्र की हत्या के राज से पर्दा उठाता है। इस फिल्म में जितेंद्र के अलावा बबीता और अरुणा ईरानी की मुख्य भूमिकाएं थी। फिल्म के हिट होने के बाद से ही जितेंद्र अपनी डांस स्टाइल के चलते जंपिंग जैक के नाम से मशहूर हो गए। 6 अक्तूबर 1967 को रिलीज हुई इसी फिल्म ने उनके कदम सुपरस्टारडम की तरफ भी बढ़ाए।
देव आनंद: ज्वैलथीफ (1967)
एक डायमंड रिंग की चोरी के इर्द गिर्द घूमती 27 अक्तूबर 1967 को रिलीज हुई फिल्म ‘ज्वैलथीफ’ का निर्माण खुद देव आनंद ने अपने प्रोडक्शन हाउस नवकेतन फिल्म्स के बैनर तले किया था और फिल्म के निर्देशक विजय आनंद थे। देव आनंद के अलावा फिल्म में अशोक कुमार, वैजयंती माला और तनूजा की मुख्य भूमिकाएं थीं। वैजयंती माला की भूमिका के लिए फिल्म बनाने वालों ने पहले सायरा बानो से संपर्क किया, लेकिन दिलीप कुमार से शादी की वजह से सायरा बानो ने इस फिल्म में काम करने से इंकार कर दिया था। यह फिल्म थी।
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