Home Sports दो विस्‍फोटक भारतीय बल्‍लेबाज, दोनों को बिलकुल पसंद नहीं था क्रिकेट, जब खेले तो गेंदबाजों के छुड़ा दिए छक्‍के

दो विस्‍फोटक भारतीय बल्‍लेबाज, दोनों को बिलकुल पसंद नहीं था क्रिकेट, जब खेले तो गेंदबाजों के छुड़ा दिए छक्‍के

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दो विस्‍फोटक भारतीय बल्‍लेबाज, दोनों को बिलकुल पसंद नहीं था क्रिकेट, जब खेले तो गेंदबाजों के छुड़ा दिए छक्‍के

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Cricket in History: अक्‍सर सलाह दी जाती है कि बच्‍चों को खेल या पढ़ाई में वही करने देना चाहिए, जो उनका मन हो. मनमुताबिक पढ़ाई या खेल चुनने पर बच्‍चों का प्रदर्शन शानदार रहता है. लेकिन, भारतीय क्रिकेट के इतिहास में दो बल्‍लेबाजों ने इस कहावत को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया. दोनों ही बल्‍लेबाज कभी क्रिकेट नहीं खेलना चाहते थे. यहां तक कि शुरुआत में दोनों कोई दूसरा ही गेम पसंद ही नहीं करते थे, बल्कि खेलते भी थे. लेकिन, जब दोनों ने क्रिकेट खेलना शुरू किया तो दोनों बल्‍लेबाजों ने मैदान में गेंदबाजों के छक्‍के छुड़ा दिए. दोनों को ही क्रिकेट के इतिहास में सिक्‍सर किंग कहा जाता है.

हम बात कर रहे हैं भारतीय क्रिकेट में पहले टेस्‍ट कप्‍तान सीके नायडू और विस्‍फोटक बल्‍लेबाज युवराज सिंह की. पहले बात करते हैं सिक्‍सर किंग युवराज सिंह की. युवराज सिंह ने खुद एक साक्षात्‍कार के दौरान बताया था कि उन्‍हें क्रिकेट खेलना कतई पसंद नहीं था. गेम्‍स के मामले में वह बचपन से स्‍केटिंग करना चाहते थे. लेकिन, उनके पिता योगराज सिंह उन्‍हें क्रिकेटर बनाना चाहते थे. युवी ने बताया कि उनके पिता उन्‍हें सुबह-सुबह पानी डालकर जगा देते थे और दौड़ाते थे. इससे उन्‍हें बड़ी चिढ़ होती थी.

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विस्‍फोटक बल्‍लेबाज युवराज सिंह अपने पिता योगराज सिंह की जिद के कारण क्रिकेटर बने.

सिद्धू ने कहा था, इसके बस की बात नहीं है
एक कार्यक्रम के दौरान टीम इंडिया के पूर्व ओपनर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू ने भी बताया कि जब योगराज सिंह युवराज सिंह को उनके पास लेकर आए और उन्‍होंने उन्‍हें बल्‍लेबाजी करते देखा तो कहा कि इसे ले जाओ, इसके बस की बात नहीं है. हालांकि, बाद में उन्‍होंने ऐसा क्रिकेट खेला कि नई पीढ़ी के लिए रोल मॉडल बने. उन्‍होंने टी20 वर्ल्‍ड कप 2007 में इंग्‍लैंड के खिलाफ एक ओवर में 6 छक्‍के मारकर वर्ल्‍ड रिकॉर्ड अपने नाम किया. इसके अलावा सिर्फ 12 गेंदों में अर्धशतक बनाने का वर्ल्‍ड रिकॉर्ड भी उनके ही नाम है. उन्‍होंने 10 जून 2019 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर अपने फैंस को उदास कर दिया.

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कई वर्ल्‍ड रिकॉर्ड युवराज ने किए अपने नाम
युवराज सिंह 2011 क्रिकेट वर्ल्‍ड में अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर मैन ऑफ द टूर्नामेंट बने. वह इंडियन प्रीमियर लीग में किंग्स इलेवन पंजाब, पुणे वॉरियर्स इंडिया, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, दिल्ली डेयरडेविल्स और सनराइजर्स हैदराबाद से खेल चुके हैं. युवराज सिंह ने 40 टेस्‍ट में 33.92 की औसत से बल्‍लेबाजी करते हुए कुल 1900 रन बनाए. इस दौरान उन्‍होंने 3 सेंचुरी और 11 हाफ सेंचुरी बनाईं. वहीं, वह बायें हाथ के शानदार स्पिनर भी थे. उन्‍होंने टेस्‍ट क्रिकेट में 10 विकेट भी लिए.

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युवराज सिंह ने 304 वनडे में 36.55 के औसत से 8,701 रन बनाए.

युवराज सिंह का क्रिकेट में शानदार सफर
युवराज वनडे क्रिकेट के स्‍पेशलिस्‍ट बल्‍लेबाज थे. उन्‍होंने 304 वनडे में 36.55 के औसत से 8,701 रन बनाए. इस दौरान उन्‍होंने 14 शतक और 52 अर्धशतक जड़े. वनडे में उनका उच्‍चतम स्‍कोर 150 रन था. वनडे मैचों में उन्‍होंने 120 विकेट भी लिए. गेंदबाजी में उनका सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन 31 रन देकर 5 विकेट रहा. वहीं, बायें हाथ के इस आक्रामक बल्‍लेबाज ने अपने करियर में 58 टी20 मैचेज भी खेले. इनमें उन्‍होंने कुल 1,177 रन बनाए. इस दौरान उनका बल्‍लेबाजी औसत 28.02 रहा. इनमें 17 देकर 3 के सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन के साथ उन्‍होंने कुल 29 विकेट अपने नाम किए. फर्स्‍ट क्‍लास क्रिकेट में भी उन्‍होंने 8,965 रन बनाए.

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क्रिकेटर नहीं तो क्‍या बनना चाहते थे सीके नायडू
अब बात करते हैं उस क्रिकेटर की, जिसने भारत की गुलामी के दौर से खेलना शुरू किया और आजाद भारत में भी अपने नाम का डंका बजाया. वह भारतीय क्रिकेट के इतिहास में पहले टेस्‍ट कप्‍तान के तौर पर भी जाने जाते थे. हम बात कर रहे हैं, महान भारतीय क्रिकेटर और मैदान पर अपने बल्‍ले से छक्‍कों की बरसात करने वाले कोट्टेरी कनकैया नायडू यानी सीके नायडू की. वह कभी भी क्रिकेटर नहीं बनना चाहते थे. सीके नायडू की बेटी चंद्रा नायडू ने एक इंटरव्‍यू के दौरान बताया कि वह तो अपने बाप-दादा की तरह हमेशा से वकील बनने की ख्‍वाहिश रखते थे. गेम्‍स में वह हॉकी और बिलियर्ड्स खेलना पसंद करते थे. हालांकि, बाद में जब क्रिकेट खेलना शुरू किया तो उसी के होकर रह गए और कर्नल सीके नायडू के नाम से पहचाने गए.

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नायडू ने 1915 से फर्स्‍ट क्‍लास क्रिकेट खेलना शुरू किया और 1963 तक धुंआधार क्रिकेट खेला.

शानदार प्रदर्शन पर एमसीसी ने दिया चांदी का बैट
नायडू ने 1915 से फर्स्‍ट क्‍लास क्रिकेट खेलना शुरू किया और 1963 तक धुंआधार क्रिकेट खेला. साल 1926 में मेरिलेबोन क्रिकेट क्‍लब (एमसीसी) की टीम भारत आई थी. इंग्‍लैंड के पूर्व ऐशेज कप्‍तान आर्थर गिलिकेन की लीडरशिप में आई इस टीम को भारत में 26 फर्स्‍ट क्‍लास मैच खेलने थे. इनमें से एक मैच बॉम्‍बे जिमखाना में हिंदूज के खिलाफ खेला गया. उस दिन सीके नायडू ने सबसे ज्‍यादा छक्‍कों का वर्ल्‍ड रिकॉर्ड अपने नाम किया. उन्‍होंने 116 मिनट की बल्‍लेबाजी में 11 छक्‍कों और 13 चौकों की मदद से 153 रन बनाए. उनके शानदार प्रदर्शन के लिए इंग्‍लैंड के इस क्‍लब ने उन्‍हें चांदी का बैट पुरस्‍कार में दिया था. बता दें कि उस दौर में 90 से 95 मीटर का मैदान होता था. उस दौर में हिंदूज, पारसीज, क्रिश्चियंस जैसी काफी फेमस टीम्‍स थीं. तब रणजी टूर्नामेंट नहीं होते थे.

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नायडू के प्रदर्शन के बाद ही बीसीसीआई बनाई गई
बॉम्‍बे जिमखाना क्‍लब के मैदान पर नायडू की शानदार बल्‍लेबाजी देखने के बाद आर्थर गिलिकेन ने कहा कि अब भारतीय क्रिकेट इंटरनेशनल स्‍तर पर उतरने के लिए तैयार है. उन्‍होंने पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह से दिल्ली के रोशनआरा क्‍लब में मुलाकात कर भारतीय क्रिकेट के भविष्‍य पर चर्चा की. इसके बाद 1928 में बीसीसीआई की स्‍थापना हुई. उस दौर में कोई राजा-महाराजा या नबाव ही भारतीय टीम का कप्‍तान बनता था. राजा महाराजाओं के बीच में कप्‍तानी को लेकर खींचतान चलती रहती थी. दरअसल, उस समय क्रिकेट बोर्ड के पास पैसा नहीं था. इसलिए राजा-महाराजा और नबाव ही खर्चा उठाते थे. जो ज्‍यादा पैसा दे देता था, वही कप्‍तान बन जाता था.

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सीके नायडू की कप्‍तानी में 1932 में इंग्‍लैंड में खेली भारतीय क्रिकेट टीम.

नायडू 1932 में बने भारत के पहले टेस्‍ट कप्‍तान
साल 1932 में भारत की पहली आधिकारिक टेस्‍ट क्रिकेट टीम बनी. टीम में 7 हिंदू, 5 मुस्लिम, 4 पारसी और 2 सिख खिलाड़ी थे. इसके बाद भारतीय टीम 2 अप्रैल 1932 को बॉम्‍बे से इंग्‍लैंड के लिए रवाना हुई. उस समय भारतीय टीम के कप्‍तान पोरबंदर के महाराज थे. इंग्‍लैंड पहुंचने पर खेले गए प्रैक्टिस मैचों में ही पोरबंदर के महाराज को अहसास हो गया कि ये बहुत ही ऐतिहासिक महत्‍व वाला दौरा साबित होगा. इसके बाद उन्‍होंने कर्नल सीके नायडू को भारतीय क्रिकेट टीम का कप्‍तान बना दिया. हालांकि, बाकी प्‍लेयर्स को ये फैसला पसंद नहीं आया. कुछ खिलाड़ी चाहते थे कि कप्‍तान सिर्फ राजा या महाराजा ही बने.

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नायडू को कप्‍तान बनाने के खिलाफ थी टीम इंडिया
देश की पहली आधिकारिक टेस्‍ट टीम के बागी प्‍लेयर्स ने इंग्‍लैंड के साथ मैच के ठीक पहले वाली रात को पटियाला के महाराज भूपिंदर सिंह को फोन किया. इस पर महाराज भूपिंदर सिंह ने सख्‍ती से आदेश दिया कि कप्‍तान सीके नायडू ही रहेंगे. जो भी खिलाड़ी इसका विरोध करेगा, वो भविष्‍य में कभी भारत के लिए क्रिकेट नहीं खेलेगा. इसके बाद वह देश के पहले टेस्‍ट कप्‍तान बने. इस दौरे में भारत को 26 फर्स्‍ट क्‍लास मैच में एक टेस्‍ट मैच भी खेलना था. लॉर्ड्स में 25 जून 1932 को भारत ने अपना पहला टेस्‍ट मैच खेला और शानदार शुरुआत की. भारत ने शुरुआत में ही मेजबान टीम के 3 विकेट चटका दिए और पूरी टीम 259 रन पर पवेलियन पहुंचा दिया. हालांकि, बाद में मैच इंग्‍लैंड ही जीता, लेकिन पहले टेस्‍ट मैच के लिए ये प्रदर्शन अच्‍छा था.

आखिरी मैच में भी नायडू ने की शानदार बल्‍लेबाजी
सीके नायडू ने 1915 में फर्स्‍ट क्‍लास क्रिकेट खेलना शुरू किया और अगले करीब 50 साल तक क्रिकेट खेला. ज्‍यादातर समय वह होल्‍कर की टीम के कप्‍तान और मेंटर रहे. जब वह करीब 58 साल के थे, तब होल्‍कर की टीम रणजी ट्रॉफी जीती थी. साल 1958 तक वह फर्स्‍ट क्‍लास खेलते रहे. इस दौरान वह यूनाइटेड प्रोविंसेस और आंध्र के लिए भी खेले. 1963 में खेले अपने आखिरी रणजी ट्रॉफी मैच में भी उन्‍होंने आक्रामक 52 रन बनाए, तब वह 68 साल के थे. नायडू ने करियर में 7 टेस्ट खेले, जिसकी 14 पारियों में 350 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने 2 अर्धशतक जड़े. नायडू ने 11825 फर्स्ट क्लास रन बनाए. इस दौरान उन्‍होंने 26 शतक, 58 अर्धशतक जड़े. उन्‍होंने बतौर गेंदबाज 411 विकेट भी झटके. कर्नल नायडू को आजाद भारत की सरकार ने 1956 में देश के दूसरे सर्वोच्‍च पुरस्‍कार पद्म भूषण से सम्मानित किया.

Tags: Cricket news, India Vs England, India Vs Sri lanka, Indian Cricket Team, Yuvraj singh

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