Home Breaking News कौन है शाहरुख खान?: पठान फिल्म विवाद पर जब हिमंत बिस्व सरमा ने पत्रकारों से पूछ ली यह बात, जानें पूरा वाकया

कौन है शाहरुख खान?: पठान फिल्म विवाद पर जब हिमंत बिस्व सरमा ने पत्रकारों से पूछ ली यह बात, जानें पूरा वाकया

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कौन है शाहरुख खान?: पठान फिल्म विवाद पर जब हिमंत बिस्व सरमा ने पत्रकारों से पूछ ली यह बात, जानें पूरा वाकया

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शाहरुख खान- सीएम हिमंता बिस्वा

शाहरुख खान- सीएम हिमंता बिस्वा
– फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान की आगामी फिल्म ‘पठान’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। उनकी फिल्म के गाने बेशर्म रंग को लेकर हिंदूवादी संगठन फिल्म का बहिष्कार कर रहे हैं। इस बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा ने शाहरुख खान को लेकर जवाब दिया है, जो चर्चा का विषय बन गया है। 

पठान फिल्म और शाहरुख खान के बारे में पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में सीएम बिस्वा ने कहा है कि शाहरुख खान कौन हैं? मैं उनके या उनकी फिल्म के बारे में कुछ भी नहीं जानता। दरअसल, मीडियाकर्मी फिल्म को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा एक थिएटर में हिंसक प्रदर्शन को लेकर बिस्वा से सवाल कर रहे थे। 

थिएटर पर बोला धावा, पोस्टर फाड़े 

बता दें, असम में शुक्रवार को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पठान फिल्म की स्क्रीनिंग के विरोध में नरेंगी में एक थिएटर में धावा बोल दिया और पोस्टर तक फाड़ डाले। असम सीएम ने कहा है कि अगर कानून व्यवस्था का उल्लंघन किया गया है और मामला दर्ज किया गया है तो ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। दरअसल, विश्व हिंदू परिषद सहित कई संगठनों ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

असमिया हितों के बारे में चिंतित होना चाहिए

असम सीएम ने कहा, राज्य के लोगों को शाहरुख खान की फिल्म पठान से ज्यादा असमिया लोगों के बारे में चिंतित होना चाहिए। उन्होंने कहा, लोगों को निपोन गोस्वामी के निर्देशन में बनी असमिया फिल्म ‘डॉ. बेजबरुआ-पार्ट 2’ देखनी चाहिए। यह फिल्म जल्द ही रिलीज होने वाली है। वहीं सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में बनी पठान 25 जनवरी को सिनेमा घरों में रिलीज होगी। 

प्रधानमंत्री मोदी ने दी थी नसीहत

दरअसल, पीएम मोदी ने पिछले दिनों दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में दूसरे दिन बिना किसी का नाम लिए पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को नसीहत दी थी कि फिल्मों पर गैरजरूरी टिप्पणी से बचना चाहिए। ऐसे मुद्दों से जितना बचा जाए, उतना ठीक होता है। फिल्मों पर ऐसी टिप्पणियां विकास के एजेंडे को ठंडे बस्ते में डाल देती हैं।

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