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नई दिल्ली. क्रिकेट में अक्सर देखा जाता है कि अगर कोई क्रिकेटर इंटरनेशनल क्रिकेट खेलता है तब उसकी खूब चर्चा होती है. मुंबई के सरफराज खान इनसे इतर हैं. सरफराज उन खिलाड़ियों में शुमार है जिन्होंने भले ही अभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू नहीं किया है, फिर भी चर्चा में बने रहते हैं. रणजी ट्रॉफी में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे सरफराज खान को लेकर इन दिनों एक ही बात हो रही है कि उन्हे टीम इंडिया में मौका क्यों नहीं मिल रहा है. न्यूज18 हिंदी ने सरफराज खान से दिल्ली में ख़ास बातचीत की. सरफराज खान से बातचीत के अंश.
कई बार होता है कि क्रिकेटर का नाम टीम इंडिया में आने के बाद होता है. लेकिन आप इसके बिना ही चर्चा में रहते हैं. इस बारे में आप क्या सोचते हैं?
मैं बस मेहनत करने पर ध्यान देता हूं. जितना हो सके मेहनत करूं, जिन बातों का पालन करते आ रहा हूं उसका पालन करूं. जैसा मेरी पिछले 3 साल से फॉर्म चल रही है. मैं उसी को जारी रखने की कोशिश कर रहा हूं. मैं ग्राउंड से काफी जुड़ा हुआ हूं. अभ्यास बहुत करता हूं. इसलिए मेरी फॉर्म अच्छा चल रही है.
आप मुंबई की टीम से आते हैं. आपके साथी खिलाड़ी सूर्यकुमार यादव को टीम इंडिया में आने के लिए काफी इंतजार करना पड़ा. आप सूर्यकुमार से क्या प्रेरणा लेते हैं.
बिल्कुल, सूर्या मेरे काफी अच्छे दोस्त हैं. हम जब भी एक साथ टीम में होते हैं तो काफी समय साथ में बिताते हैं. सूर्या से काफी चीजें सीखने को मिलती हैं. वह फिलहाल काफी अच्छा कर रहे हैं. उनसे यह सब सीखने को मिलता है. सूर्या को जितना इंतजार करना पड़ा वह अनुभव लेकर टीम में गए, जिससे उनके लिए आसान हो गया.
जब आपके बारे में चर्चा होती है. आप रन बना रहे हो. लगातार कई सीजन से रन बना रहे हो. आजकल जो भी मिलता है वह बोलता है कि सरफराज को मौका मिलना चाहिए. यह बातें आपको आत्मविश्वास देती हैं या फिर निराशा होती है. आपका नजरिया क्या होता है?
मैं सीजन के समय यही सोचता हूं कि मैं जो भी मैच खेल रहा हूं उसमें रन बनाऊं. चाहे वह रणजी ट्रॉफी हो, विजय हज़ारे ट्रॉफी हो या सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी हो. मैं हमेशा रन बनाना चाहता हूं. जो फिलहाल मेरे हाथ में है उस पर ज्यादा ध्यान दे रहा हूं. जो मेरे हाथ में नहीं है उसके बारे में सोचने में कोई फायदा नहीं है.
आपके कोच अमोल मजूमदार भी घरेलू क्रिकेट के बहुत बड़े खिलाड़ी रहे हैं. वह ऐसी स्थति से गुजर चुके हैं जिस स्थिति में आप हो. आपकी उनसे क्या बातचीत होती है, क्या इस बारे में उन्होंने कुछ बताया?
मैं इन सब चीजों के बारे में उनसे बात नहीं करता. मैं क्रिकेट के बारे में बात करता हूं, वह एक लेजेंड है. उनको देखता हूं तो आत्मविश्वास बढ़ जाता है. उन्होंने इतने अधिक रन बनाए हैं. उनके खेल की कहानिया भी सुनी हैं मैंने कि वह अच्छी पिच, खराब पिच, चुनौतीपूर्ण विकेट पर कितना बेहतरीन खेलते थे. काफी अच्छा लगता है कि उनके साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने का मौका मिलता है. हमारे पास इतने बेस्ट कोच हैं. उनके साथ काफी सारी क्रिकेट की चीजें भी सीखने को मिलती हैं. इसके वजह से मैं काफी उत्साहित होता हूं.
सबसे ज्यादा प्रेरणादायक इस दौर में कौन है. जब आप देखते हैं कि आप हर फॉर्मेट में रन बना रहे हैं, फिर भी इंतजार करना है. कोई ऐसा खिलाड़ी जिसको देखकर आपको आत्मविश्वास आता है कि उसके साथ ऐसा हुआ था, मैं भी ऐसा करूंगा.
मेरा एक ही सपना है मेरे पिताजी ने मुझ पर काफी मेहनत की है तो मैं एक दिन टीम इंडिया में डेब्यू करूंगा तो उनका सपना पूरा हो जाएगा. मुझे उनको देखकर काफी प्रेरणा मिलती है.
आपके पिताजी का खुद का सपना था कि टीम इंडिया में खेलेंगे. कई ऐसी कहानियां हैं जहां पर खिलाड़ी भटक जाते हैं, लेकिन आपके पिताजी ने इसको लेकर आपकी मदद की तो आपकी पिताजी से किस तरह की बातचीत है?
मेरे पिता मुझे हमेशा यही बोलते हैं कि जितना हो सके क्रिकेट पर ध्यान दो. 24 घंटे से ज़्यादा बल्लेबाजी में ब्रेक नहीं होना चाहिए. अगर आप ब्रेक करोगे तो ध्यान हटेगा. क्रिकेट के जोन में रहने के लिए ज्यादा बोलते हैं. वह हमें रेस्ट डे नहीं देते हैं. हमारा काम है दिन में 600 गेंद खेलना. हम दोनों भाई करते हैं. मुसीर भी काफी अच्छा कर रहा है. हम दोनों का यही सपना है कि हम पिताजी का सपना पूरा करें.
मुंबई के 2 खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट टीम के लेजेंड रहे हैं एक आपके टीम के कप्तान अजिंक्य रहाणे और एक रोहित शर्मा. इनके साथ आपके रिश्ते कैसे रहे हैं. जब रोहित शर्मा आते हैं तो उनसे क्या बातचीत होती है?
रोहित भी अब कभी-कभी अभ्यास करने आते हैं तो उनको देखते हैं कि कैसी बल्लेबाजी कर रहे हैं. अगर कुछ चीजें रहती है तो पूछते भी हैं कि क्या कर सकते हैं. वह काफी मदद करते हैं. अजिंक्य भाई के साथ पिछले 2 साल से खेल रहा हूं. उनके साथ काफी मज़ा आता है. काफी कुछ सीखने को मिलता है. काफी सारी चीजें जो हमने नहीं देखी है, जो वह मैदान पर करते हैं. वह अपने खेल में कितना अनुशासन रखते हैं. यह सभी सीखने को मिलता है.
भारतीय क्रिकेट में काफी प्रतिस्पर्धा है. दोहरा शतक बनाने वाले ईशान किशन तक की प्लेइंग इलेवन में जगह तय नहीं है. क्या आपको लगता है कि अगर आप किसी दूसरे देश के लिए खेल रहे होते तो आराम से टेस्ट क्रिकेट खेल लेते. भारत में प्रतिभाशाली खिलाड़ी अधिक हैं, इसलिए शायद इंतजार लंबा है?
मैंने आपको बताया कि जो भी मेरे हाथ में है, मैं उसके बारे में सोचूंगा, बजाय इसके कि बाकी जगह क्या चल रहा है. मैं दूसरे पर ध्यान दूंगा तो मेरा खुद पर ध्यान कम हो जाएगा. मेरा बस यह ध्यान है कि अच्छा अभ्यास करूं और रन बनाऊं.
दिल्ली कैपिटल्स के लिए आप आईपीएल खेलते हैं, तो अभी आपकी किसी तरह से बातचीत है. क्या साथ में उसकी भी तैयारी हो रही है?
सीमित ओवर क्रिकेट भी मेरा अच्छा जा रहा है. विजय हज़ारे और सैयद मुश्ताक में भी अच्छा प्रदर्शन रहा. सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में हम फाइनल जीते, उसमें बल्लेबाजी अच्छी रही. दिल्ली की टीम भी अच्छा मौका दे रही है. पिछले साल उन्होंने मुझे अलग-अलग क्रम में बल्लेबाजी का मौका दिया. वह मौका दे रहे हैं. मैं काफी खुश हूं. उम्मीद करता हूं कि यहां आऊ तो दिल्ली को मैच जिताऊं.
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FIRST PUBLISHED : January 23, 2023, 12:00 IST
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