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पद्म विभूषण।
– फोटो : Amar Ujala
विस्तार
गणतंत्र दिवस से एक रोज पहले बुधवार की शाम को पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई। देश के नामचीन और समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वालों के नाम इस सूची में शामिल है। पद्म पुरस्कारों की सूची में कर्नाटक और तेलंगाना समेत देश के अधिकांश राज्यों में महत्वपूर्ण काम करने वालों को इस पुरस्कार के लिए चुना गया है।
पद्म विभूषण के लिए समाजवादी पार्टी के संरक्षक रहे दिवंगत मुलायम सिंह यादव को मरणोपरांत या सम्मान मिलेगा जबकि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वोक्कलिंगा समुदाय के बड़े नेता एसएम कृष्णा को भी पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुलायम सिंह यादव से उत्तर प्रदेश में जहां यादव समुदाय के जुड़ने की संभावना है। वही दक्षिण में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा से वोक्कलिंगा समुदाय भी भारतीय जनता पार्टी से जुड़ सकेगा।
राजनीतिक विश्लेषक ओपी मिश्रा कहते हैं कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और मनमोहन सिंह की सरकार में विदेश मंत्री रहे एसएम कृष्णा को उनके सार्वजनिक जीवन में दिए गए बेहतर योगदान के लिए ही पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है। लेकिन दूसरी ओर वह यह भी कहते हैं कि अगर एसएम कृष्णा को सियासत के नजर से देखें तो वह कर्नाटक के उस समुदाय से आते हैं जिसका कर्नाटक की राजनीति में बड़ा हस्तक्षेप है। मिश्रा कहते हैं की कर्नाटक की राजनीति में लिंगायत समुदाय और वह वोक्कलिंगा समुदाय अच्छा खासा अधिपत्य है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगड़ा वोक्कलिंगा समुदाय से ही ताल्लुक रखते हैं। कहा जाता है कि कर्नाटक में वोक्कलिंगा समुदाय का बड़ा वोट बैंक जेडीएस के साथ में ही है। जबकि इसी समुदाय का एक बड़ा वर्ग कांग्रेस के साथ भी जुड़ा हुआ है। कांग्रेस के बड़े नेता डीके शिवकुमार इसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। ओपी मिश्रा कहते हैं कि एसएम कृष्णा को पद्म विभूषण से सम्मानित कर वोक्कलिंगा समुदाय में भारतीय जनता पार्टी की अच्छी पैठ बन सकती है। और इसका फायदा इस साल होने वाले विधानसभा के चुनावों में भी मिल सकता है।
इसी तरह उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के संरक्षक रहे दिवंगत मुलायम सिंह यादव को भी पद्म विभूषण सम्मान से नवाजा गया है। मुलायम सिंह यादव को यह सम्मान उनके सार्वजनिक जीवन में समाज और लोगों की बेहतरी के लिए किए गए कार्यो के लिए दिया गया है। लेकिन सियासत को करीब से समझने वाले इस बात को कहने से नहीं चूकते हैं कि मुलायम सिंह यादव को पद्म विभूषण सम्मान से नवाजने के साथ भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के पिछड़े वोट बैंक में भी बड़ी नजर लगाए हुए हैं। उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी का फोकस पिछड़े और पिछड़ों पर बहुत ज्यादा बना हुआ है। वह कहते हैं कि संभव है आने वाले लोकसभा के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को इसका कुछ सियासी फायदा भी मिले।
दरअसल इस साल कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव हैं। इसमें भारतीय जनता पार्टी लगातार दक्षिण के क्षेत्रों में अपना विस्तार कर रही है। कर्नाटक और तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पूरी से ऐसी ताकत भी लगा रखी है। बुधवार को आए पद्म पुरस्कारों की सूची में कर्नाटक और तेलंगाना कि 13 शख्सियतों को यह पुरस्कार देने की घोषणा हुई। इसमें कर्नाटक से आठ और तेलंगाना से पांच लोग शामिल हैं। जबकि छत्तीसगढ़, जम्मू कश्मीर, नागालैंड, त्रिपुरा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उड़ीसा समेत अरुणाचल प्रदेश की शख्सियतों को भी पद्म पुरस्कारों से नवाजा गया है।
समाजशास्त्री प्रोफेसर हर्षवर्धन कहते हैं कि जितने भी लोगों को पद्म पुरस्कार मिले हैं वह सभी लोग अपने-अपने क्षेत्र में एक बहुत बड़ा नाम हैं और लोगों को प्रेरणा देने वाले हैं। यही वजह है कि उनको देश के सर्वोच्च पुरस्कारों में शामिल पद्म सम्मानों से नवाजा जा रहा है।। वह कहते हैं कि पुरस्कार पाने वालों को आप सियासत से नहीं जोड़ सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बात अलग है कि ऐसे नामों के साथ अगर किसी राजनैतिक दल को सियासी फायदा होता है तो वह दूसरी बात हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण के राज्यों में मिलने वाले पद्म पुरस्कारों का परोक्ष या अपरोक्ष रूप से भारतीय जनता पार्टी को फायदा मिल सकता है।
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