Home Breaking News Amar Ujala Shabd Samman 2022: उस्ताद अमजद अली खान करेंगे शब्द साधकों का सम्मान, बोले- खुशी का अहसास हो रहा है

Amar Ujala Shabd Samman 2022: उस्ताद अमजद अली खान करेंगे शब्द साधकों का सम्मान, बोले- खुशी का अहसास हो रहा है

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Amar Ujala Shabd Samman 2022: उस्ताद अमजद अली खान करेंगे शब्द साधकों का सम्मान, बोले- खुशी का अहसास हो रहा है

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Amjad Ali Khan

Amjad Ali Khan
– फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

स्वर में ऐसा जादू है कि मियां तानसेन ने कभी-कभी कुछ ऐसा भी गाया कि दीपक प्रज्ज्वलित हो उठे, रोशनी हो गई। तो सारी जो कहानी है, वह है कि जीवन में उजाला कैसे पैदा करना है। जीवन में उजाला स्वर के जरिये ही पैदा होता है और शब्दों के जरिये भी। हमारा देश है भारत, यहां स्वर ही ईश्वर है और हमारे देश के बाहर के लोग संगीत को एक मनोरंजन के तौर पर देखते हैं। लेकिन अपने यहां संगीत उपासना का एक माध्यम है और आप देखेंगे कि जब भी संगीत से साहित्य का जुड़ाव होता है, तो संदेश दूर तक जाता है।

हमारे सारे फिल्मी गाने जो हैं, वे स्वर पर ही आधारित हैं। दुनिया में जो संगीत है, सात सुरों पर ही आधारित है- स, रे, ग, म, प, ध, नी। इनको विदेश में लोग डो, रे, मी, फा, सो, ला, टी करते हैं, लेकिन साउंड वही है। ये भगवान ने अनमोल उपहार दिया है इंसान को। संगीत भगवान का दिया हुआ तोहफा है, आशीर्वाद है। इन 7 सुरों ने पूरी दुनिया को जोड़ कर रखा है।  चाहे वह फोक म्यूजिक हो, ब्रिटिश म्यूजिक हो, अंग्रेजी संगीत हो, चाइनीज म्यूजिक हो, किसी भी किस्म का संगीत हो, आधार उसका यही 7 सुर होते हैं। कोमल और तीव्र सुर मिला कर 12 सुर होते हैं।

हमारे संगीत का जो इतिहास है, वह पांच हजार साल पहले तक इससे जुड़ा हुआ है। यानी 7 सुरों और कोमल-तीव्र सहित 12 सुरों को उसी समय अनुभव कर लिया गया था। 12 सुरों को पकड़ लिया गया था, महसूस कर लिया गया था। आज इक्कीसवीं सदी में हम लोग चल रहे हैं, लेकिन तेरहवां सुर आज तक कोई नहीं  निकाल पाया। इन 12 सुरों में ही दुनिया जुड़ी हुई है। स्वर के साथ हम छेड़छाड़ नहीं कर सकते हैं, धोखाधड़ी नहीं कर सकते हैं।

कहते हैं न, स्वर ही ईश्वर है, तो अगर अमजद अली खान का सरोद में हाथ बेसुरा हुआ तो आपको पता लग जाएगा। मैं उसको छुपा ही नहीं सकता। तो जो सुर की दुनिया है, वह बड़ी पारदर्शी है। हर मजहब में सुर के जरिये भगवान को याद किया जाता है। अजान जब होती है, वह याद दिलाती है कि समय हो गया है, इबादत करो। मंदिरों में कीर्तन-भजन होते हैं, चर्च में ऑर्गन बजते हैं, कैरल्स गाए जाते हैं और गुरुद्वारे से शबद की आवाज आती है। संगीत में जो आध्यात्मिक रुझान है, यह हमारे देश में ही है। तो इस तरह दुनिया को जोड़ा हुआ है 12 सुरों ने।

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