Home Breaking News Satyadeep Mishra Interview: आईआरएस की नौकरी, अदिति राव से शादी, वकालत, पहली पसंद का कुछ नहीं भाया सत्यदीप को

Satyadeep Mishra Interview: आईआरएस की नौकरी, अदिति राव से शादी, वकालत, पहली पसंद का कुछ नहीं भाया सत्यदीप को

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Satyadeep Mishra Interview: आईआरएस की नौकरी, अदिति राव से शादी, वकालत, पहली पसंद का कुछ नहीं भाया सत्यदीप को

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अभिनेता सत्यदीप मिश्रा कमाल के कलाकार हैं। पुलिस की वर्दी उन पर खूब फबती है। लेकिन, उनका पहला पेशा भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) की नौकरी बना। इनकम टैक्स में वह असिस्टेंट कमिश्नर बने। लंबे समय तक कॉरपोरेट की दुनिया में वकील भी रहे। और,  फिर जब मन को ये सब नहीं भाया तो एक दिन गाड़ी-घोड़ा समेत पहुंच गए मुंबई। खानदानी विरासत अच्छी है। अदिति राव हैदरी से शादी की। लेकिन यहां पहली मोहब्बत रास नहीं आई। और फिर अभी बीते महीने उन्होंने पूर्व क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स और अभिनेत्री नीना गुप्ता की बेटी मसाबा से दूसरी शादी कर ली। मसाबा की पहली शादी फिल्म निर्माता मधु मंटेना से हुई थी। सत्यदीप मिश्रा से हाल में मुलाकात हुई उनकी नई वेब सीरीज ‘जहानाबाद- ऑफ लव एंड वार’ को लेकर। आइए जानते हैं उनकी इस वेब सीरीज और उनके जीवन की उन सारी पहली व दूसरी पसंदों के बारे में जो उनकी शख्सियत को काफी दिलचस्प बना देती हैं।

सत्यदीप, ये वेब सीरीज ‘जहानाबाद- लव एंड वार’ क्या 13 नवंबर 2005 के दिन हुए जहानाबाद जेल ब्रेक पर आधारित है?

नहीं, हमारी वेब सीरीज ‘जहानाबाद- लव एंड वार’ उस घटना पर आधारित नहीं हैं, लेकिन कहानी की पृष्ठभूमि वही है। जातिवाद की बातें इसमें भी हैं। मैं एसपी जहानाबाद का किरदार निभा रहा हूं। इस सीरीज की बैक स्टोरी यह है कि जहानाबाद जेल में बंद नक्सली नेता दीपक और मैं कॉलेज में साथ पढ़े हैं। दीपक अपराध की दुनिया में चला जाता है और मेरा किरदार पुलिस विभाग में। पुलिस कप्तान चाहकर भी दीपक के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पा रहा है क्योंकि उसके ऊपर राजनीतिक दबाव बहुत है।

थोड़ा पीछे चलते हैं और आपकी पहली फिल्म ‘नो वन किल्ड जेसिका‘ की बात करते हैं..

देखा जाए तो मेरी पहली फिल्म ‘चिल्लर पार्टी’ थी लेकिन रिलीज ‘नो वन किल्ड जेसिका’ पहले हुई। ‘चिल्लर पार्टी’ इसके हफ्ते भर बाद रिलीज हुई और उसी साल मेरी एक और फिल्म ‘टर्निंग 30’ भी रिलीज हुई जिसकी निर्देशक अलंकृता श्रीवास्तव हैं। तीनों फिल्में साल 2011 में  दो हफ्तों के अंदर ही रिलीज हो गईं। जहां तक कैमरे के सामने पहले ब्रेक की बात है तो इसका क्रेडिट मैं कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा को देना चाहूंगा। उन्होंने ही सबसे मुझे विज्ञापन फिल्मों में मौका दिलाया। ‘चिल्लर पार्टी’ और ‘बॉम्बे वेलवेट’ में मुकेश के जरिये ही मिलीं। ‘नो वन किल्ड जेसिका’ में मुझे कास्टिंग डायरेक्टर गौतम कृष्णनंदानी ने मौका दिलाया, अब कास्टिंग में बड़ा नाम बन चुके अभिनेता अभिषेक बनर्जी उन दिनों उनके असिस्टेंट हुआ करते थे।

तो पहले ब्रेक की कुछ यादें हैं अभी जेहन में?

मुंबई आने के बाद सबसे पहले पहने एक विज्ञापन की शूटिंग की थी। फिल्म का पहला शूट ‘चिल्लर पार्टी’ का था। लेकिन फिल्म ‘नो वन किल्ड जेसिका’ के पहले दिन की शूटिंग पर जब मैंने अभिनेत्री रानी मुखर्जी के फ्रेम शेयर किया तो लगा कि हां अब कुछ बात बन रही है। उस दिन शूटिंग खत्म होने पर लोगों ने मेरा काफी हौसला बढ़ाया और तारीफ भी की। बस उसके बाद गाड़ी चल निकली।

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एक जमा जमाया करियर छोड़कर यूं मुंबई आने में डर नहीं लगा?

मेरा मानना है कि आपको कामयाबी वही चीज दिलाती है, जिसे करने में पहले आपको डर लगता है। मैं 12-13 साल तक वकालत करने के बाद मुंबई आया। पैसे इतने थे मेरे पास कि यहां एक घर आते ही खरीद लिया। मेरे पास तीन गाड़ियां थीं, उनमें से दो को मैं मुंबई ले आया। लेकिन बचत भी कितने दिन चलती। धीरे धीरे पैसे खत्म होने लगे। दोनों गाड़ियों की ईएमआई भरना ही तब मेरी कमाई का एकमात्र लक्ष्य होता था। लगता था किसी तरह बस 35 हजार रुपये का जुगाड़ हो जाए तो काम चल जाएगा। कभी कभी महीने में 50 हजार रुपये कमा लेता तो ऐश हो जाती थी।

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