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ईदी अमीन भारतीयों के निष्कासन से नफरत करते हैं युगांडा: युगांडा में 50 से 60 के दशक में हिंदुस्तानी कारोबारियों का जलवा था. युगांडा का पूरा अर्थव्यस्था ही इन अमीर हिंदुस्तानियों के दम पर चलती थी। शुरुआत में तो सब कुछ सही कर रहा हूँ। फिर एक दिन ऐसा सनकी तानाशाह आया जिसके सिर पर हमेशा खून सवार रहता था। उस क्रूर शासक का नाम था ईदी अमीन जिसे ये कतई पसंद नहीं था उसके देश में बाहरी हिंदुस्तानी लोग परोक्ष रूप से सत्ता के समानांतर ताकतवर और रसूखदार हो।
अमीन ने मचाया कटलेआम
ब्लड बाथ देखने के शौकीन अमीन ने न सिर्फ हिंदुस्तानियों को अपने देश से बाहर खदेड़ा, बल्कि उन्होंने हिंदुस्तानियों की मदद करने वाले का सब्ल खात्मा करवा दिया। अमीन का राज छिनने के बाद देश में सैकड़ों जगह सामूहिक कब्रें मिलीं। उनमें से कई शवों को देखकर लोगों की रूह कांप गई।
दो जोड़े कपड़े और 5000 रुपए लेकर भागे करोड़पति हिंदुस्तानी
युगांडा के इस तानाशाह ईदी अमीन ने अपने राज के दौरान भारतीय मूल के करीब 80 हजार लोगों को देश लौटने की फरमान सुनाया था। ये कुछ वैसा ही था जैसे कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के साथ हुआ था। युगांडा की हर फैमिली चाहे वो कितना ही रसूखदार क्यों न हो, उसे सिर्फ एक पोर्टमांट और पांच हजार रुपये ले जाने की इजाजत थी। ये सभी वो परिवार थे, जिनके पास करोड़ों-अरबों की संपत्ति थी, लेकिन जानबचाने के लिए उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा।
भारतीयों के युगांडा में बसने की कहानी
मशहूर किताब ‘स्टेट ऑफ ब्लड- द इनसाइड स्टोरी ऑफ ईदी अमीन’ के मुताबिक अमीन की सत्ता छिनने के बाद वहां सामूहिक कब्रें मिलीं। उनमें मौजूश शवों में ज्यादातर के संगठन गायब थे। ऐसा क्यों था, ये नहीं जान पाया। लेकिन शक की सनकी तानाशाह अमीन की ओर रुखी कि उसी के आदेश पर उसके कमांडरों ने इस हरबता को अंजाम दिया होगा।
उस दौर में युगांडा में ब्रिटेन का राज था। मैक्सिकन गोरे, काले अफ्रीकी लोगों से अनुपालन पसंद नहीं करते थे, इसलिए उन्होंने एशियाई मूल के लोगों को बसाया, जितने भारतीय भी थे, उनके काम अंग्रेजों और अफ्रीका के लोगों के बीच बातचीत स्थापित करना था, आगे बात रूपरेखा से बिगड़ गई। युगांडा को आजादी मिली तब हिंदुस्तानियों का बुरा वक्त शुरू हुआ।
कैसे बदला खेल?
युगांडा के मूल निवासी और हिंदुस्तानियों की कड़वाहट चरम पर इसलिए पहुंच गए क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी सगाई मिलने के बाद भी उनकी हैसियत दासियां बन रही हैं। डिक्टेटर ईदी अमीन ने इसी बात का फायदा उठाया। उन्होंने अपने लोगों के मन में असंतोष फैलाया और कुंठा को अपना हथियार बनाने के बाद भारतीयों को मुल्क से बेदखल कर दिया।
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