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Ghulam Nabi Azad
– फोटो : ANI
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डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) के अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को अतिक्रमण विरोधी अभियान के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि अगर घरों और छोटी दुकानों को ध्वस्त किया गया तो जम्मू कश्मीर में हड़ताल और पथराव की संस्कृति लौटने की आशंका है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बेदखली अभियान के परिणामस्वरूप भ्रष्टाचार हो रहा है क्योंकि लोग राजस्व अधिकारियों को रिश्वत दे रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य भूमि पर अतिक्रमण करने वालों में उनका नाम शामिल न हो।
उन्होंने गरीब आबादी को नुकसान नहीं पहुंचाने के आश्वासन के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का आभार जताया। लेकिन जोर दिया कि संकटग्रस्त लोगों को राहत देने के लिए एक आधिकारिक आदेश जारी किया जाना चाहिए। सरकार ने हड़ताल और पत्थरबाजी (कश्मीर में) की संस्कृति को समाप्त करने जैसे कुछ अच्छे काम किए हैं। यह एक सकारात्मक सोच है, लेकिन अगर वे घरों और छोटी दुकानों को तोड़ना शुरू करते हैं तो हड़ताल और पत्थरबाजी की दोबारा आशंका होगी और इन परिस्थितियों के लिए सरकार जिम्मेदार होगी।
अभियान को बंद करने का सुझाव दिया
गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सरकार को ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए जिससे नकारात्मकता फैले क्योंकि लाखों लोगों को नोटिस दिया गया है कि वे अपना घर खाली कर दें और अपना कारोबार बंद कर दें। आजाद ने कहा पहले लोग हड़ताल और पथराव के लिए जिम्मेदार थे, लेकिन अब अगर फिर से वही होता है तो सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार होगी। सरकार को सकारात्मकता की ओर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को इस अभियान को बंद कर देना चाहिए।
डीपीएपी अध्यक्ष ने कहा, ‘मैं बड़े भूमि मालिकों, व्यापारियों, राजनेताओं या चोरों (भूमि हड़पने वालों) के लिए नहीं बोल रहा हूं। अगर इस अभियान को रोक दिया जाता है, तो 98 प्रतिशत (गरीब) लाभान्वित होंगे। मेरा एकमात्र उद्देश्य है कि गरीबों के घर और उनके छोटे व्यवसाय बरकरार रहें, ताकि वे शांतिपूर्ण माहौल में अपनी आजीविका कमा सकें। सरकार को शांति के हित में तत्काल निर्णय लेना चाहिए और गरीबों के खिलाफ बेदखली अभियान को समाप्त करने का आदेश जारी करना चाहिए।’
आमजन को नहीं किया जाए परेशान
उन्होंने कहा कि आरोप है कि यह अभियान भेदभावपूर्ण है और भाजपा से जुड़े लोगों को छुआ नहीं गया। जिस किसी ने भी गलत किया है, चाहे वे किसी भी दल से जुड़ा है उसे कानून का सामना करना चाहिए। लेकिन आमजन को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। जम्मू कश्मीर में लंबे समय से विधानसभा चुनाव नहीं करवाए गए हैं। बेरोजगारी और महंगाई आसमान छू रही है। हमें ऐसा माहौल प्रदान करने की जरूरत है, जहां लोग चैन की सांस ले सकें, लेकिन अपने ही देश में उनकी रातों की नींद उड़ी हुई है।
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