Home World Turkey Earthquake: क्या तुर्की को अब आएगी अक्ल, भारत ने मुश्किल में क्यों की पाकिस्तान के दोस्त की मदद?

Turkey Earthquake: क्या तुर्की को अब आएगी अक्ल, भारत ने मुश्किल में क्यों की पाकिस्तान के दोस्त की मदद?

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Turkey Earthquake: क्या तुर्की को अब आएगी अक्ल, भारत ने मुश्किल में क्यों की पाकिस्तान के दोस्त की मदद?

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तुर्की में भूकंप: तुर्की (तुर्की) और सीरिया (सीरिया) में भूकंप (भूकंप) के कारण गिरने का पात्र 12 हजार से ज्यादा प्रभावित है। रेस्क्यू ऑपरेशन (रेस्क्यू ऑपरेशन) अभी भी जारी किया जा रहा है। भारत की टीमें भी ऑपरेशन को तुर्की में रेस्क्यू करने में मदद कर रही हैं। भारत तुर्की की मदद के लिए ऑपरेशन दोस्त (ऑपरेशन दोस्त) चला रहा है। भूकंप की वजह से हुई चट्टानों की चट्टानों से लोगों का अनुमान लगाया जा रहा है। लेकिन, यह भी जान लिया कि तुर्की ने पाकिस्तान (पाकिस्तान) के साथ कश्मीर के मुद्दों पर कई बार दिया है। 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी तुर्की ने पाकिस्तान की बहुत मदद की थी। लेकिन, इस मुश्किल नशे में भी भारत, तुर्की के साथ खड़ा है। आइए जानते हैं कि इसके पीछे की वजह क्या है?

तुर्की के लिए ऑपरेशन में मदद के लिए भारत जा रहा है

बता दें कि भारत सरकार ने तुर्की को हर संभव मदद देने का ऐलान किया है। भारत की एंडी प्रेमिका की टीम तुर्की पहुंच चुकी है और वहां रेस्क्यू ऑपरेशन कर रही है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तुर्की ने बार-बार भारत को धोखा दिया है। हाल ही में अपनी संसद में कश्मीरी समिति बनाकर तुर्की ने भारत के खिलाफ कदम उठाया था। लेकिन भारत फिर भी तुर्की का साथ दे रहा है और उसके नशे में एक दोस्त की तरह खड़ा है।

कठिन परिश्रम में आगे आया भारत

जान लें कि तुर्की की मदद करना भारत की विदेश नीति का हिस्सा है। जब भी कोई देश मुश्किल में पड़ा है, भारत ने उसकी मदद की है। हालांकि, इससे पहले भी 1970 के दशक से ही भारत ने तुर्की को स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और अन्य लक्ष्यों के लिए अनुदान, लोन और तकनीकी सहायता दी है।

भूकंप से मची भीषण तबाही

आरोपित है कि पिछले 6 फरवरी को दक्षिण-पूर्वी तुर्की में सीरिया की सीमा के पास तेज भूकंप आया था। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्कैन पर 7.9 कांची गई थी। इस भूकंप से तुर्की, सीरिया में भयंकर तबाही मची। हालांकि, एशिया में संकेत के संकेत इजरायल और यूरोप में ग्रीस तक महसूस किए गए थे। तुर्की और सीरिया में 12 हजार से ज्यादा लोगों की मौत का खतरा है।

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