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पीयूष गोयल(फाइल)
– फोटो : Social Media
विस्तार
राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल विपक्ष पर हमलावर नजर आए। सदन में हंगामे को लेकर केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता पीयूष गोयल ने कहा कि ऐसा लगता है कि विपक्षी सदस्य राज्यसभा की कार्यवाही को रोकने के लिए ही आते हैं। वहीं, दूसरी ओर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद अदाणी मुद्दे पर शुरू हुआ विवाद थमता नहीं दिख रहा है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोमवार को इस मुद्दे पर लोकसभा में सरकार को घेरा। उन्होंने केंद्र सरकार पर अदाणी समूह को लाभ पहुंचाने के लिए पंजाब के लोगों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया।
पीयूष गोयल ने लगाया विपक्ष पर आरोप
भाजपा ने राज्यसभा में बार-बार व्यवधान को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा है। केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता पीयूष गोयल ने कहा कि ऐसा लगता है कि विपक्ष के कई सदस्य सदन की कार्यवाही को रोकने के एकमात्र उद्देश्य से सदन में आते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष ने राज्यसभा के सभापति के अनुरोध को बार-बार नजरअंदाज कर उनका अपमान किया इतना ही नहीं कई विपक्षी पार्टियों ने अपनी सीटों से टिप्पणी भी की।
गौरतलब है कि राज्यसभा के बजट सत्र का पहला भाग विपक्षी सांसदों द्वारा लगातार व्यवधान के कारण 13 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया। विपक्षी पार्टियों ने सोमवार को अदाणी समूह के खिलाफ आरोपों की संयुक्त संसदीय समिति की जांच की मांग रखी थी।
गोयल ने विपक्ष पर यह भी आरोप लगाया कि वह राज्यसभा में बार-बार इसकी कार्यवाही में बाधा डालने के लिए अन्य सदस्यों को उनके मुद्दों को उठाने के उनके विशेषाधिकार से वंचित करता है।
मनीष तिवारी केंद्र पर हुए हमलावर
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोमवार को केंद्र पर अदाणी समूह को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा ‘इसके लिए केंद्र पंजाब के लोगों के साथ भेदभाव कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि कोयले की खरीद लंबे रास्ते से की जाए जिसमें अदाणी समूह के बंदरगाह भी शामिल है।
लोकसभा में बोलते हुए पंजाब के आनंदपुर साहिब से सांसद ने कहा कि बिजली पैदा करने के लिए पंजाब महानदी कोलफील्ड्स से कोयला खरीदता है। अगर उस कोयले को रेल मार्ग के माध्यम से सीधे पंजाब में लाया जाता है, तो उसे 1,830 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि बिजली मंत्रालय ने 30 नवंबर, 2022 को पंजाब सरकार को एक पत्र लिखा और कहा कि उसे सीधे रेल के माध्यम से कोयला नहीं मिल सकता है। कोयले को सड़क मार्ग से पारादीप बंदरगाह तक ले जाना होगा, फिर श्रीलंका से गुजरने वाले जल मार्ग को लेना होगा और दहेज और मुंद्रा में अदाणी बंदरगाहों तक पहुंचना होगा। इसके बाद वहां से कोयले को 1,500 किमी रेल मार्ग से पंजाब ले जाना होगा।
उन्होंने दावा किया कि ऐसा करने से कोयला परिवहन की लागत 4,350 रुपये प्रति टन से बढ़कर 6,750 रुपये प्रति टन हो गई है।साथ ही एक किलोवाट बिजली की लागत 3.6 रुपये से बढ़कर 5 रुपये हो गई है। मनीष तिवारी ने इस दौरान सरकार से निर्देश वापस लेने और महानदी कोलफील्ड्स से सीधे रेल मार्ग से कोयले की खरीद की अनुमति देने का आग्रह किया।
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