Home Breaking News Turkiye: जहां मशीनें धराशायी, वहां भारत के डॉग्स ने बचाईं जिंदगियां; बहुत काम आए रोमियो, जूली, रैंबो और रॉक्सी

Turkiye: जहां मशीनें धराशायी, वहां भारत के डॉग्स ने बचाईं जिंदगियां; बहुत काम आए रोमियो, जूली, रैंबो और रॉक्सी

0
Turkiye: जहां मशीनें धराशायी, वहां भारत के डॉग्स ने बचाईं जिंदगियां; बहुत काम आए रोमियो, जूली, रैंबो और रॉक्सी

[ad_1]

तुर्किये में एनडीआरएफ के जवान और स्निफर डॉग्स

तुर्किये में एनडीआरएफ के जवान और स्निफर डॉग्स
– फोटो : ANI

विस्तार

तुर्किये और सीरिया ने बीते दिनों तबाही को जो मंजर देखा, उससे दुनिया कांप गई। यहां आए भूकंप ने दोनों देशों को न जाने कितने साल पीछे धकेल दिया है। देखते ही देखते हजारों घर मलबे में तब्दील हो गए, शहर के शहर तबाह हो गए और अब तक 35 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है।

 

इस भूकंप के बीच लोगों की मदद और मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए भारत से भेजे गए स्निफर डॉग्स मशीनों को भी मात दे रहे हैं। बता दें, भूकंप के तुरंत बाद भारत ने बचाव व राहत कार्य के लिए तुर्किए में मानवीय सहायता के साथ एनडीआरएफ की टीमें और स्निफर डॉग्स को भी भेजा था। अब तक इन डॉग्स की मदद से मलबे के नीचे से 63 शवों को बरामद किया जा चुका है। इसके अलावा इन डॉग्स ने सात व आठ साल की दो बच्चियों को भी बचाने में बहुत मदद की है। 

भारत ने भेजे थे छह लैब्राडोर 

भारत ने एनडीआरएफ टीमों के साथ तुर्किये में लैब्राडोर रोमियो, जूली, रेम्बो, हनी, बॉब और रॉक्सी को भेजा था। एनडीआरएफ के कमांडिंग ऑफिसर गुरमिंदर सिंह ने बताया कि तुर्किये ऑपरेशन के दौरान हमारे स्निफर डॉग्स बहुत प्रभावी साबित हुए हैं। इन्हें संभालना बहुत आसान है, क्योंकि ये आक्रामक नहीं हैं। उन्होंने बताया, किसी ढही हुई इमारत से लोगों को बचाने के तीन तरीके हैं- भौतिक या मानवीय साधनों के माध्यम से, तकनीकि के माध्यम से या फिर और स्निफर डॉग्स के माध्यम से। उन्होंने बताया, हमने पाया कि तकनीकी उपकरण, भारी मशीनरी, लाइफ डिटेक्टर और भूकंपीय सेंसर इस स्थिति के दौरान अच्छे नहीं रहे हैं। ऐसे में हमारे डॉग्स ने बहुत मदद की है। 

रोमियो और जूली ने ऐसे बचाई थी बच्ची की जान 

एनडीआरएफ की एक टीम तुर्किये के नुरदागी इलाके में राहत और बचाव कार्यों में जुटी है। इसी दौरान एनडीआरएफ के स्निफर डॉग जूली ने मलबे में एक जगह भौंकना शुरू कर दिया। एनडीआरएफ के जवान समझ गए कि जूली को मलबे में किसी जिंदा व्यक्ति के संकेत मिले हैं। इसके बाद दूसरे डॉग रोमियो को भी उसी जगह भेजा गया तो उसने भी भौंकना शुरू कर दिया। इसके बाद एनडीआरएफ के जवानों को पता चल गया कि यहां कोई जिंदा व्यक्ति मलबे में फंसा हुआ है। 

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here