Home Breaking News Pujara 100th Test: मां के निधन से नहीं टूटे, ट्रेन में चोरी से नहीं घबराए; हमेशा मजबूत बनकर सामने आए पुजारा

Pujara 100th Test: मां के निधन से नहीं टूटे, ट्रेन में चोरी से नहीं घबराए; हमेशा मजबूत बनकर सामने आए पुजारा

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Pujara 100th Test: मां के निधन से नहीं टूटे, ट्रेन में चोरी से नहीं घबराए; हमेशा मजबूत बनकर सामने आए पुजारा

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राहुल द्रविड़ ने जब 2012 में अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था तब भारतीय क्रिकेट फैंस को एक ही चिंता सता रही थी कि उनकी जगह टेस्ट में कौन लेगा। द्रविड़ ने 164 टेस्ट 13288 रन बनाए थे। वह तीसरे स्थान पर टीम की दीवार थे। उनके जैसे किसी मजबूत खिलाड़ी की आवश्यकता तीसरे नंबर पर भारत को थी। उस समय एक युवा खिलाड़ी से सबसे ज्यादा उम्मीद थी जो द्रविड़ की जगह ले सकता था। उसका नाम चेतेश्वर पुजारा था।



25 साल के पुजारा ने अक्तूबर 2010 में टेस्ट डेब्यू किया था। उन्होंने बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में पहला ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहला टेस्ट मैच खेला था। पुजारा ने उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। द्रविड़ के संन्यास लेने के बाद उन्हें तीसरा क्रम मिल गया। उसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। बीच-बीच में खराब फॉर्म से परेशान हुए, लेकिन पुजारा का विश्वास नहीं टूटा। उन्होंने 99 टेस्ट मैच खेल लिए हैं। वह दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले दूसरे टेस्ट में उतरेंगे, तो वह उनका 100वां टेस्ट मैच होगा। वह 100 टेस्ट खेलने वाले 13वें भारतीय खिलाड़ी बन जाएंगे।


पुजारा के लिए आसान नहीं था क्रिकेट खेलना

पुजारा जब बल्लेबाजी करते हैं तो उन्हें आउट करना आसान नहीं होता। वह धैर्य के साथ टिककर खेलते हैं। क्रिकेट की तरह ही निजी जिंदगी में भी पुजारा धैर्यवान हैं। उन्होंने जिंदगी कई मुश्किलों का सामना किया। वह हमेशा कठिन परिस्थितियों में बेहतर होकर सामने आए हैं। पुजारा के लिए शुरू में क्रिकेट खेलना आसान नहीं रहा।


पिता से मिली क्रिकेट की ट्रेनिंग

पुजारा के पिता अरविंद उनके पहले कोच थे। अरविंद सौराष्ट्र की ओर से प्रथम श्रेणी मैच खेल चुके थे। पुजारा के करियर में उनके पिता का योगदान काफी है। हालांकि, पुजारा को एक बेहतर इंसान बनाने में उनकी मां, चाची और पत्नी की भूमिका बड़ी है। पिता अरविंद ने एक इंटरव्यू में पुजारा के शुरुआती करियर और उनके संघर्षों के बारे में बात की।


पार्टी से दूर रहते हैं चेतेश्वर

पुजारा जब 17 साल के थे तब उनकी मां रीना का निधन कैंसर से हो गया था। पिता का मानना है कि जिंदा रहने पर पुजारा के 100वें टेस्ट को देखकर सबसे ज्यादा खुश वही होतीं। पुजारा के पिता ने कहा, ”मां नहीं है तो 100वें टेस्ट के बारे में मैं ही पुजारा से बात करूंगा। पुजारा के जैसा बेटा पाकर मैं धन्य हो गया। वह पूरी तरह क्रिकेट को लेकर समर्पित है। उसने हमेशा अपनी जिंदगी में मुश्किल रास्ता चुना है। आज के खिलाड़ी थोड़ी सफलता मिलते ही भटक जाते हैं, लेकिन उसके पैर हमेशा जमीन पर रहे। वह पार्टी से दूर रहता है और कभी उसने शराब नहीं पी।”


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