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भदोही में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कानपुर में हुई ह्रदय विदारक घटना में जिस तरीके से जिम्मेदार अधिकारियों और व्यवस्था पर सवाल उठाए गए, उससे लखनऊ से लेकर दिल्ली तक न सिर्फ सियासी हंगामा बरपा, बल्कि अधिकारियों पर कार्रवाई की भी आवाज उठने लगी। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने मृतक परिजनों से बात कर न सिर्फ उन्हें भरोसे में लिया, बल्कि इस पूरे मामले में कड़ी कार्यवाही करने का आश्वासन भी दिया। उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के भरोसे के बाद ही परिजनों ने मृतकों का दाह संस्कार किया। इस घटना के साथ ही उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चा इस बात की हो रही है क्या बृजेश पाठक भाजपा के संकटमोचक नेता बन चुके हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक खुद को संकटमोचक नेता न मानते हुए भाजपा का एक सच्चा सिपाही बताते हैं और कहते हैं कि योगी सरकार में किसी के साथ अन्याय नहीं हो सकता।
सरकार की छवि को नहीं बिगड़ने दिया
दरअसल कानपुर घटना में जिस तरीके से बृजेश पाठक ने पूरे मामले में हस्तक्षेप किया, उससे सियासी गलियारों में उनके क्राइसिस मैनेजमेंट की चर्चाएं होने लगीं। उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि बृजेश पाठक सिर्फ कानपुर मामले में ही बहुत सक्रिय नहीं हुए, बल्कि इससे पहले भी और कई मामलों में उनकी सक्रियता ने ऐसे मामलों में बिगड़े हुए हालातों को सुधारा है। पीड़ित पक्ष को भरोसे में लेकर सरकार के खिलाफ बन रही छवि को भी बिगड़ने नहीं दिया। उत्तर प्रदेश की राजनीति को करीब से समझने वालों का कहना है कि बृजेश पाठक सिर्फ कानपुर ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश में बीते कुछ सालों में हुई बड़ी घटनाओं के दौरान संकटमोचक नेता की तरह सरकार की छवि बचाने के तौर पर सामने आए। 2017 में हुए रायबरेली में पांच लोगों की मौत का मामला हो या लखीमपुर में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र की गाड़ी से कुचल कर मरे किसानों के चलते हुए विवाद का मामला हो। लखनऊ में आईफोन बनाने वाली कंपनी एपल के मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या का मामला हो या हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की मौत का मामला। सियासी जानकारों का कहना है कि बृजेश पाठक इन सभी मामलों में न सिर्फ मौके पर पहुंचे, बल्कि बहुत हद तक बिगड़े हुए माहौल को दुरुस्त करने की न सिर्फ कोशिश की बल्कि उसे संभाला भी।
कानपुर मामले में शुरू हुई जांच
कानपुर में हुई घटना को लेकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने अमर उजाला डॉट कॉम से हुई विशेष बातचीत में कहा इस मामले में जांच तो शुरू भी हो गई है, लेकिन परिवार के साथ न सिर्फ भाजपा बल्कि उनकी पूरी सरकार खड़ी हुई है। पाठक ने बताया कि उन्होंने मृतका के बेटे से बातचीत भी। बृजेश पाठक कहते हैं कि वह भाजपा के सच्चे सिपाही हैं न कि कोई संकटमोचक। वह कहते हैं कि जहां पर उनकी जरूरत होती है वह पीड़ितों के साथ हर वक्त कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते हैं। उन्होंने बताया कि 2017 में रायबरेली में जिस तरीके से पांच लोगों की मौत के मामले में दूसरी पार्टी के नेता एफआईआर तक नहीं होने दे रहे थे। उस मामले में उन्होंने हस्तक्षेप किया और वहां जाकर लोगों से बातचीत की और हत्या में एफआईआर दर्ज करवाई। हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की मौत के मामले में भी बृजेश पाठक कहते हैं कि वह सीतापुर के महमूदाबाद में कमलेश तिवारी के परिजनों से मिले थे। सियासी जानकार बताते हैं कि बृजेश पाठक के जाने के बाद कमलेश तिवारी के परिजनों का गुस्सा भी शांत हुआ था और सरकार के नुमाइंदों से मिले भी थे।
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