[ad_1]
मिस्र के राष्ट्रपति अल-सिसी का आर्थिक बदलाव: पाकिस्तान के बाद अब इजिप्ट का आर्थिक संकट (Egypt Economic Crisis) वैश्विक उद्योग के समाचारों की चिंता का विषय बन गया है। इजिप्ट सरकार के आंकड़ों के मुताबिक देश का कर्ज एक दशक में तीन गुना बढ़कर 155 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। ऐसे में राष्ट्रपति अल सीसी (अल-सिसी) की इकॉनमी को संभालने की कोशिश नहीं हो पा रही है। क्राइसिस की ग्रैब्रिटीज से समझ आ सकती है कि मैं गलत (IMF) की तरफ से 3 अरब डॉलर की मदद के बावजूद स्थिति जस की तस बने हुए हैं। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक मिस्र के पौंड की कीमत में गिरावट आई है। कई बार लोग परेशान होते हैं।
मुस्लिम देशों ने इजिप्ट से किनारा किया
रास्ट्रपति एलसीसी ने कुछ दिन पहले कहा था कि मिस्र को हर साल खरबों डॉलर वाला बजट दिया जाएगा और जबकि उनके पास देश चलाने के लिए इसकी पहले की रकम भी नहीं है। इसके साथ में उन मुस्लिम भाईचारे वाले देशों UAE, सऊदी अरब (सऊदी अरब) और कुवैत से भी मदद मिलेगी लेकिन सभी ने मिस्र को बिना शर्त मदद देने से इनकार कर दिया है।
इस दौरान सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल जादन ने किसी देश का नाम लिए बग कहा कि पहले हम कमजोर देशों को बिना शर्त लोन देते थे, लेकिन अब नीति में बदलाव हुआ है। यानी जिन मुस्लिम देशों से मिस्र को मदद की उम्मीद थी उन्होंने उसे झटका दे दिया है।
मिस्र बेचा जा रहा है अपनी ये चीजें
‘डी डब्ल्यू डॉट कॉम’ ने आर्थिक संकट के अनुसार कमाई करने के लिए मिस्र ने अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की है। बताया जा रहा है कि कुछ मुस्लिम देशों की संपत्ति हड़पने में भी दिखाई दे रही है। वहीं कुछ सूचनाओं का ये कहना है कि जहां सुधार की उम्मीद कम हो सकती है, किसी कितने दिन किसी की मदद कर सकते हैं। यही कारण है कि अपने करीबी देश आर्थिक सुधारों का हवाला देते हुए भी मिस्र की अपनी दलाली की बिक्री के प्रस्ताव के बावजूद अपने मूल धन की संभावनाएं की चाह रहे हैं।
हिंदी ख़बरों के लिए भारत की पहली पसंद ज़ीहिंदी.कॉम – सबसे पहले, सबसे आगे
.
[ad_2]
Source link