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एस जयशंकर ने सुनाया वाकया।
– फोटो : अमर उजाला
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक साक्षात्कार के दौरान अपने पिता को लेकर पूर्व की इंदिरा गांधी और राजीव गांधी सरकार पर जनकर हमला बोला। उन्होंने मंगलवार को कहा कि मेरे पिता मेरे पिता सरकारी अधिकारी थे और वो 1979 में जनता सरकार में सचिव बने थे, लेकिन साल 1980 में जब इंदिरा गांधी ने सत्ता में वापसी की तो आते ही उन्होंने मेरे पिता डॉ के सुब्रह्मण्यम को रक्षा उत्पादन सचिव के पद से हटा दिया गया। इतना ही नहीं कुछ ऐसा ही राजीव गांधी के कार्यकाल में भी हुआ। एएनआई के साथ साक्षात्कार में उन्होंने ब्यूरोक्रेसी से लेकर अपनी राजनीति की यात्रा के बारे में बड़े विस्तार से चर्चा की।
सबसे अच्छा विदेश सेवा अधिकारी बनना चाहता था
विदेश मंत्री ने कहा कि मैं एक ब्यूरोक्रेट परिवार में पैदा हुआ था ऐसे में हमेशा से मैं सबसे अच्छा विदेश सेवा अधिकारी बनना चाहता था और मेरे दिमाग में बेस्ट का मतलब था फॉरेन सेक्रेटरी के पद तक पहुंचना। मेरे पिता भी सचिव हो गए थे। उन्होंने कहा कि हमारे घर में भी ऐसा ही माहौल था। हालांकि ऐसा करने के लिए कोई पारिवारिक दबाव नहीं था, लेकिन हम सभी इस बात को जानते हैं कि मेरे पिता जो एक नौकरशाह थे, उस समय सचिव बन गए थे। वह उस समय 1979 में जनता सरकार में शायद सबसे कम उम्र के सचिव बने थे। हालांकि इंदिरा गांधी ने सत्ता में दोबारा वापसी के तुरंत बाद उन्हें सचिव पद से हटा दिया था। 1980 में वह रक्षा उत्पादन सचिव थे। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सत्ता में वापसी के दौरान वह पहले सचिव थे जिन्हें उन्होंने हटाया था। वह रक्षा पर सबसे अधिक जानकार व्यक्ति थे। जयशंकर ने आगे कहा कि ‘इसके अलावा उनके पिता डॉ के सुब्रह्मण्यम बहुत ईमानदार व्यक्ति भी थे, हो सकता है कि समस्या इसी वजह से हुई हो, मुझे नहीं पता’।
राजीव गांधी के कार्यकाल में भी ऐसा ही हुआ
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आगे कहा कि पिता के बारे में तथ्य यह है कि एक व्यक्ति के रूप में उन्होंने हमेशा नौकरशाही में अपना करियर देखा, जो वास्तव में 1980 में रुक गया था। उसके बाद वह फिर कभी सचिव नहीं बने। बाद में जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने तब भी उनके साथ कुछ ऐसा ही हुआ। उस दौरान उन्हें अपने से जूनियर के लिए हटा दिया गया। उनके जूनियर को कैबिनेट सचिव बना दिया गया। यह कुछ ऐसा था जिसे उन्होंने हमेशा महसूस किया। उन्होंने आगे कहा कि शायद ही कभी इसके बारे में हमारे घर पर बात हुई। ऐसे में जब मेरे बड़े भाई सचिव बने तो उन्हें बहुत गर्व हुआ था।
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